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Corporate Fraud: इस कंपनी पर कब्जे की लड़ाई, दिल्ली पुलिस ने शुरू की जांच, ED के पास जाएगा मामला!

Corporate Fraud: दिल्ली पुलिस एक ऐसे मामले में जांच कर रही है जिसमें बड़े पैमाने पर कॉरपोरेट फर्जीवाड़ा मामला सामने आया है। यह मामला एक कंपनी पर कब्जे से जुड़ा है और इसमें करोड़ों रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग का भी आरोप है। अनुमान लगाया जा रहा है कि यह मामला ईडी (ED) के भी पास जा सकता है

Edited By: Jeevan Deep Vishawakarmaअपडेटेड Jan 26, 2026 पर 1:06 PM
Corporate Fraud: इस कंपनी पर कब्जे की लड़ाई, दिल्ली पुलिस ने शुरू की जांच, ED के पास जाएगा मामला!
आर्थिक मामलों की जांच करने वाली दिल्ली पुलिस की विंग EOW ने बड़े पैमाने के कॉरपोरेट फ्रॉड को लेकर एक मामला दर्ज किया है। इस फ्रॉड में फर्जी डॉक्यूमेंट्स और शेयरों के अवैध तरीके से लेन-देन हुआ। (File Photo-Pexels)

Corporate Fraud: आर्थिक मामलों की जांच करने वाली दिल्ली पुलिस की विंग EOW ने बड़े पैमाने के कॉरपोरेट फ्रॉड को लेकर एक मामला दर्ज किया है। इस फ्रॉड में फर्जी डॉक्यूमेंट्स और शेयरों के अवैध तरीके से लेन-देन हुआ। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह शिकायत जायन यूनिवर्सल (Zion Universal) की तरफ से उनके पावर ऑफ अटॉर्नीहोल्डर सिद्धार्थ शर्मा ने दर्ज कराई है। इस मामले में आरोपी के तौर पर सदर हिमालयन पैराडाइज़ प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का नाम शामिल है, जिसने बाद में अपना नाम बदलकर IHHR हॉस्पिटैलिटी (हिमाचल) प्राइवेट लिमिटेड कर लिया। इसके अलावा मामले में इसके डायरेक्टर और वरिष्ठ अधिकारी भी आरोपी बनाए गए हैं।

शिकायत के मुताबिक सभी आरोपियों ने साजिश कर कंपनी के शेयरों को अवैध तरीके से बेचने, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और गैरकानूनी तरीके से कंपनी पर नियंत्रण हासिल करने की योजना बनाई। आरोपों के मुताबिक इसमें करोड़ों रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग हुई। EOW के पास दर्ज एफआईआर में कई आरोपियों के नाम शामिल हैं; जिनमें धैर्य चौधरी, सुमंत कपूर, राजेश रोहितभाई मेहता, प्रकाश लाल कपूर, संजीव त्रेहन, ममता पंवार, नवजोत मेहता, अशोक खन्ना, घनश्याम सेठ, मनप्रीत कौर टक्कर और दिलीप चिनुभाई चोकसी समेत अन्य शामिल हैं।

क्या है पूरा मामला?

एफआईआर के हिसाब से फरवरी 2025 में कंपनी में 99.98% हिस्सेदारी जायन इंटरनेशननल की थी और सभी अहम फैसले में इसके मंजूरी की जरूरत पड़ती थी। हालांकि इसके बावजूद आरोप है कि अगस्त 2024 से ही आरोपी कंपनी का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की साज़िश रचने लगे थे। आरोप है कि दिसंबर 2024 में कथित तौर पर जाली दस्तावेजों के ज़रिये एक इंटेरेस्ट-फ्री लोन एग्रीमेंट तैयार किया गया, जिसे बाद में बिना उचित मंजूरी के इक्विटी में बदलने की योजना थी।

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