दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण और तापमान के बीच, हरियाली बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है। इसी दिशा में, दिल्ली यूनिवर्सिटी के मिरांडा हाउस कॉलेज ने अपने कैंपस में एक ‘कार्बन गार्डन’ बनाया है। कॉलेज का कहना है कि कार्बन सोखने की क्षमता बढ़ाने और जैव-विविधता को बढ़ावा देने के साथ-साथ, यह गार्डन छात्रों को पर्यावरण से जुड़े मुद्दों की व्यावहारिक समझ हासिल करने में भी मदद करेगा।
50 अलग-अलग प्रजातियों के पौधे लगाए गए
मिरांडा हाउस के इस कार्बन गार्डन में लगभग 50 अलग-अलग तरह के पौधे लगाए गए हैं। इनमें अलग-अलग तरह के जीवन वाले पौधे शामिल हैं, जैसे कि हाइड्रोफाइट्स (पानी में उगने वाले), जेरोफाइट्स (सूखी जगह पर उगने वाले) और मेसोफाइट्स (सामान्य नमी वाली जगह पर उगने वाले)। अमरूद और सहजन जैसी देसी प्रजातियों को भी इस गार्डन में शामिल किया गया है। कॉलेज के अनुसार, इतने तरह के पौधे लगाने का मकसद सिर्फ हरियाली बढ़ाना नहीं है, बल्कि एक छोटा इकोसिस्टम बनाना है जहां छात्र पौधों, बायोडायवर्सिटी और पर्यावरण के आपसी संबंधों को बेहतर ढंग से समझ सकें।
छात्रों के लिए बनेगा लिविंग लैब
मिरांडा हाउस का यह कार्बन गार्डन छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए एक जीवंत प्रयोगशाला (living laboratory) के तौर पर काम करेगा। यहां छात्र कार्बन सोखने की प्रक्रिया (carbon sequestration), पौधों की विविधता, इकोसिस्टम और पर्यावरण के अनुकूल तौर-तरीकों जैसे विषयों की व्यावहारिक समझ हासिल कर सकेंगे।
प्रो. दीनबंधु साहू ने किया उद्घाटन
कार्बन गार्डन का उद्घाटन दिल्ली यूनिवर्सिटी के बॉटनी डिपार्टमेंट के हेड और रिसर्च, इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप काउंसिल के चेयरपर्सन प्रोफेसर दीनबंधु साहू ने किया। प्रोफेसर साहू भारत के पहले कार्बन गार्डन के संस्थापक भी हैं। प्रोफेसर साहू ने कहा कि प्रकृति से जुड़ाव लंबे समय से भारतीय संस्कृति और परंपराओं का अहम हिस्सा रहा है। उन्होंने आधुनिक विज्ञान और पर्यावरण की समझ को जोड़कर इस जुड़ाव को और आगे बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। दिल्ली जैसे शहरों में ग्रीन स्पेस की अहम भूमिका पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने पर्यावरण संरक्षण में युवाओं की भागीदारी के महत्व पर भी जोर दिया।
मानसिक स्वास्थ्य से भी जुड़ा है गार्डन
कार्बन गार्डन के फायदे सिर्फ पर्यावरण तक ही सीमित नहीं माने जाते हैं। प्रोफेसर साहू के अनुसार, ऐसी हरी-भरी जगहें छात्रों को प्रकृति के करीब ला सकती हैं और साथ ही उनके मानसिक स्वास्थ्य और समग्र कल्याण में भी योगदान दे सकती हैं। मिरांडा हाउस की प्रिंसिपल प्रोफेसर बिजयालक्ष्मी नंदा ने कहा कि कॉलेज अपनी पर्यावरणीय जिम्मेदारी को गंभीरता से लेता है। उनका मानना है कि यह पहल छात्रों को जलवायु परिवर्तन से निपटने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में सक्रिय रूप से काम करने के लिए प्रेरित कर सकती है।
दिल्ली से शुभांगी तिवारी की रिपोर्ट