Ram Mandir Chanda Case: इस वक्त अयोध्या के राम मंदिर को मिले दान और चंदों में कथित गड़बड़ी का मामला देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। फिलहाल इस मामले की एसआईटी जांच की जा रही है। इस बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के खर्चों और दान राशि के हिसाब-किताब को लेकर एक और जानकारी सामने आई है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से आए एक आदेश के बाद जब अयोध्या जिला प्रशासन ने राम मंदिर ट्रस्ट से आय-व्यय, दान और संपत्तियों का पूरा विवरण मांगा तो ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने इसे देने से फिलहाल इनकार कर दिया है। चंपत राय ने इसके पीछे अयोध्या में राम मंदिर परियोजना से जुड़े आरोपों को लेकर चल रही एसआईटी जांच का हवाला दिया।
अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने ट्रस्ट की आय, खर्च, मिले दान, बैंक खातों, भूमि सौदों (जमीन के लेन-देन) और संपत्तियों से जुड़ा कोई भी विवरण देने से साफ मना कर दिया है। चंपत राय ने प्रशासन को बताया कि राम मंदिर परियोजना से जुड़े आरोपों को लेकर वर्तमान में एक विशेष जांच दल (SIT) की जांच चल रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच पैनल इस समय मामले से जुड़े सभी प्रासंगिक रिकॉर्ड और जानकारियां इकट्ठा कर रहा है। चंपत राय की इस दलील के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में नोट किया है कि चल रही जांच को देखते हुए फिलहाल मांगी गई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा सकती।
पीएमओ (PMO) से अयोध्या प्रशासन तक कैसे पहुंचा यह मामला?
इस पूरे मामले की शुरुआत भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता रजनीश सिंह द्वारा प्रधानमंत्री कार्यालय में दर्ज कराई गई एक शिकायत से हुई थी। रजनीश सिंह की इस शिकायत को पीएमओ ने आवश्यक कार्रवाई के लिए अयोध्या जिला प्रशासन को फॉरवर्ड कर दिया था। इसके बाद अपर जिला मजिस्ट्रेट (कानून व्यवस्था) इंद्रकांत द्विवेदी ने अपर जिला मजिस्ट्रेट (प्रशासन) विशु राजा को 23 जून को एक पत्र लिखा। इस पत्र में एडीएम (कानून व्यवस्था) ने बताया कि उन्होंने शिकायत में मांगी गई जानकारियों को जुटाने के लिए ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से संपर्क किया था। इस पर चंपत राय ने एसआईटी जांच जारी होने की बात कहकर विवरण देने से असमर्थता जताई।
भाजपा नेता की शिकायत में किन-किन चीजों का मांगा गया था हिसाब?
भाजपा नेता रजनीश सिंह ने 12 जून को PMO को अपनी शिकायत सौंपी थी। इस शिकायत में उन्होंने मांग की थी कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को उसके गठन (शुरुआत) से लेकर आज तक के अपने पूरे वित्त और संपत्तियों का विवरण सार्वजनिक डोमेन में रखने का निर्देश दिया जाए। पीएमओ द्वारा फॉरवर्ड की गई इस शिकायत में मुख्य रूप से कुछ विवरणों के खुलासे की मांग की गई थी। इसमें समर्पण निधि अभियान के माध्यम से एकत्र किए गए कुल फंड की जानकारी, दान और उपहारों का विवरण, देश-विदेश से योगदान के रूप में मिले सोने, चांदी और अन्य आभूषणों का ब्योरा, ट्रस्ट के सभी बैंक खातों और उनके वित्तीय लेन-देन की पूरी जानकारी, राम मंदिर परियोजना के तहत की गई जमीनों की खरीद और बिक्री का विवरण, मंदिर निर्माण और उसके प्रशासन पर अब तक हुआ कुल खर्च के अलावा ट्रस्ट की अब तक की ऑडिट और निरीक्षण रिपोर्ट की जानकारी मांगी गई थी।
शिकायतकर्ता बीजेपी नेता रजनीश सिंह ने अपने प्रतिवेदन में इस मांग के पीछे करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का तर्क दिया है। उन्होंने कहा कि भारत और विदेशों में रहने वाले करोड़ों सनातन भक्तों ने राम मंदिर के निर्माण में अपनी श्रद्धा से योगदान और समर्पण किया है। ऐसे में उन सभी दाताओं और भक्तों के पास यह जानने का पूरा नैतिक और लोकतांत्रिक अधिकार है कि उनके द्वारा दिए गए दान और चढ़ावे का उपयोग किस प्रकार और कहां किया गया है।
अयोध्या में पहले से ही चल रही है गंभीर वित्तीय गड़बड़ियों की SIT जांच
आपको बता दें कि यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अयोध्या में राम मंदिर परियोजना से जुड़े वित्तीय लेन-देन और दान के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं के आरोपों की जांच पहले से ही चल रही है। इन गंभीर आरोपों को सुलझाने और सच सामने लाने के लिए ही विशेष जांच दल का गठन किया गया है। SIT इस समय मंदिर से जुड़े सभी वित्तीय दस्तावेजों को खंगालने में जुटा हुआ है। इसी जांच को आधार बनाकर ट्रस्ट ने जिला प्रशासन को फिलहाल कोई भी नया वित्तीय विवरण सौंपने से रोक दिया है।