Delhi Ease of Doing Business Bill 2026: दिल्ली में बिजनेस करना होगा आसान! कैबिनेट ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल 2026 को दी मंजूरी

Delhi Ease of Doing Business Bill 2026: दिल्ली कैबिनेट ने बुधवार को दिल्ली ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल, 2026 को मंजूरी दे दी। इस बिल का मकसद राजधानी में कारोबार शुरू करने और चलाने के लिए जरूरी मंजूरी, रजिस्ट्रेशन, लाइसेंस और दूसरी अनुमति लेने की प्रक्रिया को आसान और तेज बनाना है।

अपडेटेड Sep 03, 2026 पर 10:23 AM
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दिल्ली कैबिनेट ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल 2026 को दी मंजूरी

Delhi Ease of Doing Business Bill 2026: दिल्ली कैबिनेट ने बुधवार को दिल्ली 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल, 2026' को मंजूरी दे दी। इस बिल का मकसद राजधानी में कारोबार शुरू करने और चलाने के लिए जरूरी मंजूरी, रजिस्ट्रेशन, लाइसेंस और दूसरी अनुमति लेने की प्रक्रिया को आसान और तेज बनाना है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मंजूर किए गए इस बिल में एक सिंगल-विंडो ऑनलाइन सिस्टम का प्रस्ताव है। इसके जरिए कारोबारी अलग-अलग मंजूरी, रजिस्ट्रेशन, नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC), लाइसेंस और दूसरी जरूरतों के लिए अप्लाई कर सकेंगे। प्रस्तावित सिस्टम के लिए दिल्ली स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (DSIIDC) नोडल एजेंसी होगी।

प्रस्तावित कानून के तहत, शेड्यूल-3 में बताई गई कम जोखिम वाली कई गतिविधियों के लिए एप्लीकेशन जमा करते ही मंजूरी, परमिशन, लाइसेंस या NOC दे दी जाएगी। तय सीमा के अंदर आने वाली कुछ कम जोखिम वाली गतिविधियों और मामलों के लिए सेल्फ-डिक्लेरेशन (स्व-घोषणा) भी स्वीकार किया जाएगा।


तय समय में नहीं मिली मंजूरी तो मानी जाएगी स्वीकृत

जो गतिविधियां शेड्यूल-3 में शामिल नहीं हैं, उनके लिए 'नागरिकों को समय पर और आसानी से सेवाएं देने का अधिकार अधिनियम, 2026' के तहत तय समय-सीमा में मंजूरी देनी होगी। बिल में यह भी प्रस्ताव है कि अगर सक्षम अधिकारी तय समय-सीमा में फैसला नहीं ले पाते हैं, तो मंजूरी अपने-आप मिल जाएगी।

कारोबारियों को कई तरह के रजिस्ट्रेशन से मिलेगी राहत

इस प्रस्तावित कानून का मकसद व्यवसायों पर कई तरह के रजिस्ट्रेशन का बोझ कम करना है। जो कंपनियां पहले से ही GST व्यवस्था, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI), सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास अधिनियम या लेबर कोड के तहत रजिस्टर्ड हैं, उन्हें व्यापार, स्वास्थ्य व्यापार, ईटिंग हाउस या दुकानों और प्रतिष्ठानों के लिए अलग से रजिस्ट्रेशन कराने की जरूरत नहीं होगी।

3 साल तक नहीं होगा सामान्य निरीक्षण

बिल में भरोसे पर आधारित निरीक्षण व्यवस्था का भी प्रस्ताव है, जिसके तहत किसी कंपनी के रजिस्ट्रेशन के बाद तीन साल तक कोई रूटीन निरीक्षण नहीं किया जाएगा। हालांकि, गंभीर शिकायत होने पर निरीक्षण किया जा सकता है।

नेगेटिव-लिस्ट के आधार पर काम करने की व्यवस्था

सरकार ने 'नेगेटिव-लिस्ट' पर आधारित एक सिस्टम का प्रस्ताव भी दिया है। इसके तहत, किसी कंपनी को किसी भी जगह पर कोई भी काम करने की इजाजत होगी, जब तक कि वह काम बिल की 'शेड्यूल-2' में मना की गई गतिविधियों की लिस्ट में न आता हो।

एक ही जानकारी बार-बार देने से मिलेगी राहत

एक और अहम प्रावधान का मकसद यह है कि विभाग बार-बार उन डॉक्युमेंट्स या जानकारी के लिए कारोबारियों से न पूछें जो पहले से ही दिल्ली सरकार के किसी दूसरे विभाग के पास मौजूद हैं। इसलिए, आवेदकों को सरकार को जानकारी सिर्फ एक बार देनी होगी।

समय और लागत दोनों बचेंगे

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि प्रस्तावित सुधारों से दिल्ली में बिजनेस शुरू करने और चलाने में लगने वाले समय, लागत और अनिश्चितता में कमी आएगी, साथ ही इससे निवेश आकर्षित करने और रोजगार पैदा करने में भी मदद मिलेगी।

बता दें कि यह बिल केंद्र सरकार की उस पहल के दूसरे चरण के तहत तैयार किया गया है, जिसका मकसद रेगुलेटरी जरूरतों और नियमों के पालन के बोझ को कम करना है। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद, इस बिल को अब आगे की कार्रवाई के लिए गृह मंत्रालय भेजा जाएगा।

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