अल नीनो का कहर, देश के इस राज्य में सूखी नदी में हुआ बप्पा का विसर्जन

देश के दक्षिणी राज्य आंध्र प्रदेश में इस साल गणपति बप्पा की विदाई काफी सूखी रही। यहां चित्रावती नदी में बिलकुल पानी नहीं बचा है। इसलिए भक्तों को बिना पानी की सूखी नदी में बप्पा को विदा करना पड़ा। राज्य में अल नीनो के प्रभाव के कारण सूखे जैसे हालात हैं। आइए जानें पूरी खबर

अपडेटेड Sep 21, 2026 पर 3:28 PM
  • Follow Us On Google
  • Add as a Preferred Source on Google
चित्रावती नदी में बप्पा को विदा करने पहुंचे तो यहां जरा भी पानी ही नहीं था।

इस देश में गणेश उत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है। खासतौर से देश के दक्षिणी राज्यों में इस उत्सव की खूब रौनक रहती है। लेकिन इस साल आंध्र प्रदेश में गणेश उत्सव का ऐसा नजारा सामने आया है, जिसने सबको हैरान कर दिया है। इस साल राज्य में पर्याप्त बारिश न होने की वजह से सूखे जैसे हालात हैं। इसके कारण कई जगह नदियां सूख गई हैं और लोगों को सूखी नदी में बप्पा को विदा करने पर मजबूर होना पड़ा है।

कम बारिश से सूखी चित्रावती नदी

यह मामला आंध्र प्रदेश के पुत्तलुरू का है। यहां हर साल चित्रावती नदी में बप्पा का विसर्जन होता था। लेकिन इस बार भीषण सूखे की हालत में एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने लोगों के दिल को छू लिया। लोग चित्रावती नदी में बप्पा को विदा करने पहुंचे तो यहां जरा भी पानी ही नहीं था। ऐसे में लोगों ने मजबूरी में बप्पा की मूर्तियों को सूखी नदी की रेत पर ही छोड़कर विदा कर दिया क्योंकि इसके अलावा उनके पास और कोई चारा नहीं था।

क्यों बने सूखे के हालात?

आंध्र प्रदेश में आये इस सूखे के पीछे मानसून की भारी कमी को मुख्य कारण माना जा रहा है। दैनिक जागरण की खबर के अनुसार, इस साल आंध्र प्रदेश के कई हिस्सों में मानसून के दौरान सामान्य से बहुत कम बारिश दर्ज की गई है। वहीं अलनीनो भी इस सूखे के पीछे एक बड़ा कारण हो सकता है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, 'वैश्विक जलवायु पैटर्न अल नीनो के प्रभाव के कारण मानसून कमजोर पड़ गया। अल नीनो के कारण भारत के दक्षिणी हिस्सों में वर्षा की अनिश्चितता बढ़ जाती है, जिससे इस क्षेत्र में सूखे जैसे हालात पैदा हुए।

लगातार कम बारिश होने की वजह से प्राकृतिक जल स्रोतों जैसे तालाबों और टैंकों का जलस्तर तो घटा ही, साथ ही भूजल का पुनर्भरण भी नहीं हो पाया। कृषि और घरेलू आवश्यकताओं के लिए बोरवेलों पर अत्यधिक निर्भरता के कारण लगभग 60% बोरवेल पूरी तरह सूख गए, जिससे पानी का संकट और गहरा गया।


स्थानीय स्तर पर जलाशयों के रखरखाव और जल प्रबंधन की कमियों के कारण भी सूखे का प्रभाव ज्यादा गंभीर हो गया। सही समय पर सिंचाई और पेयजल के लिए पानी का उचित भंडारण व वितरण न हो पाने से कृषि और आम जनजीवन दोनों ही बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।

NTA exam schedule: यूपीएससी, एसएससी और रेलवे के लिए एक परीक्षा कैलेंडर हो सकता है जारी, तारीखों के टकराव से बचाने के लिए बनेगी व्यवस्था

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।