Mamata Banerjee: नई गाइडलाइंस जारी कर रहा EC! वोटर लिस्ट जारी होने से पहले फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं ममता बनर्जी; SIR पर उठाए सवाल

Mamata Banerjee: राज्य की फाइनल वोटर लिस्ट जारी होने में अब लगभग 24 घंटे भी नहीं बचे है। उससे पहले यह विवाद और गहरा गया है। राज्य सरकार का दावा है कि लोगों के वोटिंग अधिकारों की रक्षा के लिए वह कोर्ट गई है। वहीं विपक्ष इसे चुनाव से पहले माहौल बनाने की कोशिश बता रहा है

अपडेटेड Feb 27, 2026 पर 11:06 PM
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चीज जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने उन्होंने शिकायत की

West Bengal SIR: पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया को लेकर सियासी और कानूनी लड़ाई लगातार तेज होती जा रही है। शनिवार, 28 फरवरी को फाइनल वोटर लिस्ट जारी होने वाली है। इससे पहले आज शुक्रवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एक बार फिर इस मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंची हैं। राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट में आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद चुनाव आयोग न्यायिक अधिकारियों को लेकर नई गाइडलाइंस जारी कर रहा है।

कपिल सिब्बल का कहना है कि कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को भरोसे में लिए बिना ज्यूडिशियल अधिकारियों को ट्रेनिंग और निर्देश दिए जा रहे हैं। चीज जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने उन्होंने शिकायत की कि 'आयोग यह तय कर रहा है कि कौन से दस्तावेज स्वीकार किए जाएंगे और कौन से नहीं।' खास तौर पर SDO द्वारा जारी डोमिसाइल सर्टिफिकेट को स्वीकार न करने की बात भी कोर्ट में उठाई गई।

इस पर सुप्रीम कोर्ट की ओर कहा गया कि अगर आयोग ट्रेनिंग नहीं देगा तो फिर कौन देगा? कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर हर छोटे मुद्दे पर रोज कोर्ट आना पड़े तो कामकाज मुश्किल हो जाएगा। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने स्पष्ट रूप से कहा, 'न्यायिक अधिकारियों पर संदेह करना बंद करें।' सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही निर्देश दिया था कि SIR प्रक्रिया की निगरानी न्यायिक अधिकारियों की देखरेख में होगी और दस्तावेजों की जांच उसी आधार पर की जाएगी। इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि चुनाव आयोग भाजपा के दबाव में काम कर रहा है और वोटर लिस्ट से नाम हटाने की कोशिश हो रही है।


वहीं, भाजपा का कहना है कि SIR प्रक्रिया का मकसद फर्जी नाम हटाकर मतदाता सूची को साफ करना है। बता दें कि राज्य की फाइनल वोटर लिस्ट जारी होने में अब लगभग 24 घंटे भी नहीं बचे है। उससे पहले यह विवाद और गहरा गया है। राज्य सरकार का दावा है कि लोगों के वोटिंग अधिकारों की रक्षा के लिए वह कोर्ट गई है। वहीं विपक्ष इसे चुनाव से पहले माहौल बनाने की कोशिश बता रहा है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ममता बनर्जी आखिरी समय तक चुनाव आयोग पर दबाव बनाए रखना चाहती है, ताकि वोटर लिस्ट से किसी भी तरह की छेड़छाड़ न हो सके। बता दें कि राज्य में पहली बार SIR प्रक्रिया के तहत वोटर लिस्ट तैयार की जा रही है। माना जा रहा है कि इसका असर चुनाव पर देखने को मिल सकता है, क्योंकि बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम काटे जाने की आशंका जताई जा रही है।

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