इबादत, सब्र और रूहानी सुकून के पाक महीने रमजान के समापन का इंतजार कर रहे करोड़ों अकीदतमंदों की निगाहें गुरुवार शाम आसमान की ओर टिकी थीं, लेकिन चांद के दीदार नहीं हो सके। दिल्ली समेत देश के किसी भी हिस्से में गुरुवार को शव्वाल (इस्लामी कैलेंडर का 10वां महीना) का चांद नजर नहीं आया। इसके चलते अब पूरे भारत में ईद-उल-फित्र का त्यौहार शनिवार, 21 मार्च को धूमधाम से मनाया जाएगा।
बादलों ने छिपाई चांद की चमक
राजधानी दिल्ली में गुरुवार शाम को मौसम का मिजाज कुछ बदला हुआ था। आसमान में छाए बादलों की वजह से दृश्यता कम रही और चांद नजर नहीं आया। फतेहपुरी मस्जिद के शाही इमाम मौलाना मुफ्ती मुकर्रम अहमद ने जानकारी देते हुए बताया कि केवल दिल्ली-एनसीआर ही नहीं, बल्कि गुजरात, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों की प्रमुख चांद समितियों से भी संपर्क किया गया, लेकिन कहीं से भी चांद दिखने की तस्दीक (पुष्टि) नहीं हुई।
30 रोजों की मुकम्मल इबादत
इस्लामी कैलेंडर के अनुसार, महीना 29 या 30 दिनों का होता है, जो पूरी तरह से चंद्रमा की स्थिति पर निर्भर करता है। पिछले साल रमजान का महीना 29 दिनों का रहा था, लेकिन इस बार रोजेदारों को 30 रोजों की मुकम्मल इबादत का मौका मिला है। रमजान के इस पवित्र महीने में मुस्लिम समुदाय के लोग सूर्योदय से पहले 'सहरी' और सूर्यास्त के बाद 'इफ्तार' के जरिए अपना व्रत पूर्ण करते हैं।
ईद की खुशियां और 'फित्रा' का महत्व
ईद सिर्फ पकवानों और नए कपड़ों का त्यौहार नहीं है, बल्कि यह आपसी भाईचारे और जरूरतमंदों की मदद का संदेश भी देता है। शाही इमाम मुफ्ती मुकर्रम अहमद ने अपील की है कि समर्थ लोगों को ईद की नमाज से पहले 'फित्रा' (अनिवार्य दान) जरूर अदा करना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि एक मध्यमवर्गीय परिवार को अपने घर के प्रत्येक सदस्य की ओर से कम से कम 100 रुपये फित्रे के तौर पर गरीबों को देने चाहिए, ताकि वे भी खुशी-खुशी ईद मना सकें।
चांद नहीं दिखने और ईद के शनिवार को होने की खबर के बाद बाजारों में एक बार फिर रौनक बढ़ गई है। जिन लोगों की खरीदारी अधूरी रह गई थी, उनके पास अब शुक्रवार का पूरा दिन शेष है। दिल्ली के चांदनी चौक, जामा मस्जिद और ओखला जैसे इलाकों में देर रात तक चहल-पहल देखी जा रही है। शनिवार सुबह देशभर की ईदगाहों और मस्जिदों में ईद की विशेष नमाज अदा की जाएगी, जिसके बाद लोग एक-दूसरे के गले मिलकर अमन-चैन की दुआ मांगेंगे।