El Nino Effect: अल नीनो को लेकर किसानों में दहशत! अनाज की खरीद, MSP और खाद में मदद करेगी सरकार, इन फसलों पर होगा सीधा असर
El Nino Effect: अल नीनो को लेकर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि केंद्र और राज्य सरकारें स्थिति पर बारीकी से नजर रख रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार पानी की संभावित कमी जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए सभी जरूरी कदम उठाने को तैयार हैं। अल नीनो को लेकर कई राज्यों में किसान परेशान हैं
El Nino Effect: सरकार अल नीनो की चुनौतियों से निपटने के लिए सभी जरूरी कदम उठाने को तैयार हैं
El Nino Effect in India: देश के कई राज्यों में अल नीनो के असर के कारण खरीफ फसल के मौसम को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। इस पर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि केंद्र और राज्य सरकारें स्थिति पर बारीकी से नजर रख रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार पानी की संभावित कमी जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए सभी जरूरी कदम उठाने को तैयार हैं।
गोयल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "अल नीनो एक वैश्विक संकट है और हम स्थिति पर कड़ी नजर रख रहे हैं।" उन्होंने जोर देकर कहा कि केंद्र और महाराष्ट्र सरकारें जरूरत पड़ने पर कार्रवाई करने के लिए तैयार हैं। पानी के इंतजाम से जुड़े एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सरकार तैयार है। किसानों के हितों की रक्षा पर ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा, "अगर पानी का संकट पैदा होता है, तो उससे निपटने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे।"
अल नीनो एक मौसमी पैटर्न है जिसमें पूर्वी और मध्य उष्णकटिबंधीय प्रशांत क्षेत्र में सतह का पानी गर्म हो जाता है। इससे हवा और बारिश के वैश्विक पैटर्न में गड़बड़ी होती है। भारत के लिए यह आमतौर पर दक्षिण-पश्चिम मानसून को कमजोर कर देता है, जिससे बारिश सामान्य से कम होती है। इसके अलावा ये खरीफ फसल के मौसम के लिए खतरा पैदा करता है।
'किसान सबसे बड़ी प्राथमिकता'
गोयल ने जोर दिया कि किसान सरकार की प्राथमिकता हैं। कृषि क्षेत्र को समर्थन देने के लिए उठाए गए व्यापक नीतिगत उपायों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, "किसान हमारी प्राथमिकता हैं और हमारी सरकार उनके कल्याण और सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है।" उन्होंने पिछले दशक में सरकार द्वारा लागू किए गए समर्थन उपायों के पैकेज के बारे में भी बताया।
टेंशन में किसान
अल नीनो के बढ़ते असर और दक्षिण-पश्चिम मॉनसून में देरी के बीच भारतीय किसान बारिश, सूखे के दौर और खेती की बढ़ती लागत से जूझ रहे हैं। साथ ही, उनकी शिकायत है कि सरकार के आश्वासनों का जमीनी स्तर पर समय पर समर्थन के रूप में कोई असर नहीं दिखा है। गुजरात, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और बिहार जैसे प्रमुख कृषि राज्यों में दालों और तिलहन की बुवाई पिछले साल के स्तर से नीचे आ गई है। इससे कई किसानों को बुवाई टालने या कम पानी वाली और कम बाजार मूल्य वाली फसलों को अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
किसानों का कहना है कि जलाशय और भूजल का लेवल पहले से ही दबाव में है। उन्हें डर है कि अगर मानसून में कमी बनी रहती है, तो सिंचाई शुल्क, पंपों के लिए डीजल और अतिरिक्त खाद खरीदने की लागत उनके मुनाफे को और कम कर देगी। पानी के अलावा, उन्हें फसल खराब होने के जोखिम, MSP पर खरीद में देरी और सूखे से राहत देने वाली योजनाओं तक ठीक से पहुंच न होने की चिंता है।
क्या है किसानों की मांग?
किसानों का कहना है कि भले ही केंद्र सरकार ने खाद पर सब्सिडी और MSP में बढ़ोतरी की बात की है। लेकिन इस खरीफ सीजन में अपनी आमदनी बचाने के लिए उन्हें तुरंत राहत के उपायों की जरूरत है। जैसे कि सिंचाई में तुरंत मदद, फसल बीमा का पैसा मिलना और दालों एवं तिलहन की कीमतों में स्थिरता।
खरीद, MSP और खाद में मदद
खरीद और कीमतों में मदद का जिक्र करते हुए मंत्री गोयल ने मिनिमम सपोर्ट प्राइस (MSP) पर खरीद और MSP दरों में बढ़ोतरी में हुई प्रगति के बारे में बताया। गोयल ने कहा, "चाहे MSP पर खरीद का मामला हो हमने UPA के समय की तुलना में 3 गुना ज्यादा मात्रा में खरीद की है। या MSP दरों में बढ़ोतरी का मामला हो, जिसमें पिछले 12 सालों में ऐतिहासिक वृद्धि हुई है। या जब भी हमें लगा कि किसानों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, तब मदद देने का मामला हो..हमने निर्णायक कदम उठाए हैं।"
अल नीनो क्या है और यह भारत में मानसून की बारिश पर कैसे असर डालता है?
अल नीनो ट्रॉपिकल प्रशांत महासागर में मौसम का एक प्राकृतिक पैटर्न है। इसमें पूर्वी और मध्य प्रशांत क्षेत्र में सतह का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है। इससे व्यापारिक हवाएं (ट्रेड विंड्स) कमजोर पड़ जाती हैं और हवा एवं बारिश के वैश्विक पैटर्न में गड़बड़ी आ जाती है। भारत के लिए, अल नीनो आमतौर पर दक्षिण-पश्चिम मानसून को कमजोर कर देता है। यह नमी वाली मानसून हवाओं को लाने वाले वायुमंडलीय सर्कुलेशन में बाधा डालता है। इससे अक्सर सामान्य से कम बारिश होती है।
हालांकि, हाल की रिसर्च एक अलग तरह का असर दिखाती है। जहां अल नीनो कुल मिलाकर गर्मियों की बारिश को कम करता है। वहीं यह भारत के सबसे अधिक बारिश वाले इलाकों में बहुत तेज दैनिक बारिश की घटनाओं को भी बढ़ाता है। इससे बहुत भारी बारिश की संभावना 43-59% तक बढ़ जाती है। इसका मतलब है कि अल नीनो की मजबूत होती स्थिति भारत के खरीफ फसल सीजन पर असर डाल रही है। इससे मानसून में देरी हो रही है। इसका असर खासकर महाराष्ट्र, गुजरात और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में दालों और तिलहन की फसलों पर पड़ रहा है।
असमान बारिश के बीच बढ़ती चिंताएं और राज्यों पर दबाव
सरकार के ये बयान कृषि क्षेत्र के आउटलुक के बारे में फाइनेंशियल सेक्टर की रिसर्च से मिली चेतावनियों के बीच आए हैं। ICICI बैंक की रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है कि अल नीनो की मजबूत होती स्थिति और दक्षिण-पश्चिम मानसून में देरी का असर भारत के खरीफ सीजन पर पड़ने लगा है। कई फसलों की बुवाई पिछले साल के स्तर से नीचे आ गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अल नीनो की स्थिति हाल ही में और मजबूत हुई है, क्योंकि इसका रिलेटिव इंडेक्स थ्रेशोल्ड लेवल को पार कर गया है। इसमें और बढ़ोतरी के संकेत मिल रहे हैं। इसमें यह भी कहा गया है कि भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने बारिश का अपना अनुमान कम कर दिया है, जिससे कृषि सीजन के लिए मौसम से जुड़े जोखिम बढ़ गए हैं।