El Nino effect: 'बुवाई में जल्दबाजी न करें...'; मानसून की 42% कमी और अल नीनो इफेक्ट से टेंशन में किसान, सरकार ने तैयार की स्पेशल स्कीम
Monsoon and Farmer News: मानसून में 42% की कमी ने शुरुआती स्तर पर चिंता जरूर बढ़ाई है। लेकिन कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई में अच्छी बारिश होने पर स्थिति में सुधार संभव है। फिलहाल सरकार और वैज्ञानिक संस्थान दोनों संभावित संकट से निपटने के लिए तैयारी मोड में हैं। जबकि किसानों की निगाहें अब आने वाले हफ्तों की बारिश पर टिकी हुई हैं
Monsoon and Farmer News: इस साल बारिश में कमी और अल नीनो की वजह से किसान परेशान हैं
Monsoon and Farmer News: देश में 23 जून तक दक्षिण-पश्चिम मानसून की बारिश में करीब 42 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। साथ ही, अल नीनो (El Nino effect) के प्रभाव की आशंका ने किसानों और सरकार दोनों की चिंता बढ़ा दी है। मानसून में 42% की कमी ने शुरुआती स्तर पर चिंता जरूर बढ़ाई है। लेकिन कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई में अच्छी बारिश होने पर स्थिति में सुधार संभव है।
फिलहाल सरकार और वैज्ञानिक संस्थान दोनों संभावित संकट से निपटने के लिए तैयारी मोड में हैं। जबकि किसानों की निगाहें अब आने वाले हफ्तों की बारिश पर टिकी हुई हैं। कमजोर मानसून की संभावना को देखते हुए केंद्र सरकार ने खरीफ फसलों की सुरक्षा और कृषि उत्पादन पर पड़ने वाले असर को कम करने के लिए व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं।
315 जिलों को माना गया संवेदनशील
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को मानसून की स्थिति और कृषि तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में राज्यों को निर्देश दिए गए कि कम वर्षा और सिंचाई संकट वाले क्षेत्रों के लिए जिला स्तर पर आकस्मिक योजनाओं (Contingency Plans) को मजबूत किया जाए।
कृषि मंत्रालय और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के संयुक्त अध्ययन में देश के 315 जिलों को मानसून की कमी के प्रति संवेदनशील पाया गया है। इनमें से 111 जिलों को उच्च प्राथमिकता कैटेगरी में रखा गया है, जहां सिंचाई कवरेज 25 प्रतिशत से भी कम है। वहीं, 76 जिले मध्यम जोखिम कैटेगरी में हैं, जहां सिंचाई कवरेज 25 से 50 प्रतिशत के बीच है।
अल नीनो बढ़ा सकता है संकट
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अल नीनो की स्थिति आमतौर पर भारत में कमजोर मानसून से जुड़ी होती है। इसका सबसे अधिक असर बारिश पर निर्भर खरीफ फसलों जैसे सोयाबीन, दलहन और मोटे अनाज पर पड़ सकता है। यदि जुलाई और अगस्त में भी बारिश सामान्य से कम रहती है, तो किसानों को उत्पादन और आय दोनों मोर्चों पर नुकसान उठाना पड़ सकता है।
सोयाबीन की बुवाई पर टेंशन में किसान
हालांकि, सरकार ने वर्ष 2026 के लिए खरीफ खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य लगभग 176 मिलियन टन बरकरार रखा है। लेकिन सोयाबीन की बुवाई को लेकर चिंता जताई गई है। कृषि मंत्री ने स्वीकार किया कि इस प्रमुख तिलहन फसल की बुवाई सामान्य स्तर से पीछे चल रही है। इसके बावजूद खरीफ बुवाई का कुल रकबा अभी तक संतोषजनक बना हुआ है। 22 जून तक देश में 1.199 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हो चुकी थी, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 1.179 करोड़ हेक्टेयर था।
जिला स्तर पर तैयार हैं स्पेशल योजनाएं
कम बारिश की स्थिति से निपटने के लिए आईसीएआर ने जिला-विशिष्ट आकस्मिक योजनाएं तैयार की हैं। इनमें कम अवधि में तैयार होने वाली फसल किस्मों का उपयोग, वैकल्पिक फसलों की बुवाई, संशोधित बुवाई कार्यक्रम, जल संरक्षण उपाय और फसल विविधीकरण जैसी रणनीतियां शामिल हैं। सरकार का मानना है कि यदि इन योजनाओं को समय पर लागू किया गया तो कमजोर मानसून की स्थिति में भी किसानों के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
कई राज्यों पर रहेगा असर
संवेदनशील जिलों की लिस्ट में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा जैसे प्रमुख कृषि राज्य शामिल हैं। इन राज्यों में बड़ी संख्या में किसान वर्षा आधारित खेती पर निर्भर हैं, इसलिए मानसून की स्थिति आने वाले हफ्तों में कृषि क्षेत्र के लिए निर्णायक साबित होगी।
'बुवाई में जल्दबाजी न करें...'
महाराष्ट्र के कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने किसानों को सलाह दी है कि राज्य के कुछ हिस्सों में मानसून की शुरुआत के बावजूद वे बुवाई में जल्दबाजी न करें। उन्होंने कहा कि मिट्टी की पर्याप्त नमी तथा सामान्य बारिश का इंतजार करें। विधानसभा में चर्चा का जवाब देते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार बीमा, जलवायु-अनुकूल कृषि और निवेश के माध्यम से किसानों को समर्थन देने के प्रयास तेज कर रही है। भरणे ने कहा कि पिछले दो दिन में महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में मानसून पहुंच चुका है और उन्होंने पूरे राज्य में व्यापक वर्षा की उम्मीद जताई।
उन्होंने कहा, "किसानों को बुवाई में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। उन्हें पहले अपने खेतों में नमी का स्तर जांचना चाहिए और मिट्टी की पर्याप्त नमी सुनिश्चित होने के बाद ही बुवाई करनी चाहिए। हमें अगले तीन से चार दिन में अच्छी बारिश की उम्मीद है।" मंत्री ने साथ ही बताया कि कृषि विभाग भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी), कृषि विश्वविद्यालयों और कृषि विज्ञान केंद्रों के साथ मिलकर काम कर रहा है, ताकि अल नीनो के संभावित प्रभाव सहित मौसम की अनिश्चितताओं से निपटने में किसानों की मदद की जा सके।
कपास की खेती का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि केंद्र प्रायोजित कपास उत्पादकता मिशन 2026-27 से 2030-31 तक महाराष्ट्र में लागू किया जाएगा। भरणे ने कृषि समृद्धि पहल का भी उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य कृषि में निवेश बढ़ाना, जल संरक्षण को बढ़ावा देना और कीटनाशक छिड़काव के लिए ड्रोन जैसी तकनीकों के उपयोग का विस्तार करना है।
संशोधित मौसम आधारित फल फसल बीमा योजना के तहत संतरा, मौसंबी, अनार, चीकू, अमरूद, नींबू, सीताफल और अंगूर जैसी फसलें शामिल हैं। एक सत्र के लिए इस योजना के तहत 45 करोड़ रुपये का मुआवजा स्वीकृत किया गया है। इसमें से 31 करोड़ रुपये पहले ही किसानों के खातों में भेजे जा चुके हैं।