चुनाव आयोग का बड़ा फैसला, बिहार की तरह अब पूरे देश में होगा SIR, जानें क्या है आदेश में

यह घोषणा उस समय की गई है जब बिहार में इस स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है। विपक्ष खासतौर पर इस प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है। बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने इसे लेकर कई बार आलोचना की है और संकेत दिए हैं कि राज्य में होने वाले आगामी चुनावों का बहिष्कार किया जा सकता है

अपडेटेड Jul 25, 2025 पर 10:11 PM
बिहार में जारी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है।

बिहार में जारी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है।संसद में दो दिनों से SIR पर बहस करने को लेकर हंगामा मचा हुआ है।  इसी बीच चुनाव आयोग ने पूरे देश में SIR कराने का फैसला किया है। आयोग ने कहा कि देश के बाकी हिस्सों में SIR के लिए कार्यक्रम यथासमय जारी किया जाएगा

चुनाव आयोग ने कही ये बात

वोटर लिस्ट के SIR पर अपने आदेश में चुनाव आयोग ने कहा, " वोटर लिस्ट की शुद्धता बनाए रखने के अपने संवैधानिक दायित्व के तहत देशभर में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया शुरू की जा रही हैआयोग ने बताया कि देश के बाकी हिस्सों में यह प्रक्रिया कब शुरू होगी, इसकी जानकारी समय पर दी जाएगीचुनाव आयोग ने अपने आदेश में कहा है कि मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखना स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए बेहद ज़रूरी हैमतदाता सूची बनाने की प्रक्रिया, पात्रता की शर्तें और इससे जुड़ी व्यवस्था जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और वोटर रजिस्ट्रेशन नियम 1960 के तहत तय की गई हैं

मचा है काफी बवाल

यह घोषणा उस समय की गई है जब बिहार में इस स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हैविपक्ष खासतौर पर इस प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा हैबिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने इसे लेकर कई बार आलोचना की है और संकेत दिए हैं कि राज्य में होने वाले आगामी चुनावों का बहिष्कार किया जा सकता है


बिहार में मिली ये गड़बड़ियां 

बता दें कि बिहार में चल रही मतदाता सूची की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रक्रिया के दौरान चुनाव आयोग को कई गड़बड़ियां मिली हैंरिपोर्ट के मुताबिक, सूची में करीब 18 लाख मृत लोगों के नाम थे, 26 लाख ऐसे लोग पाए गए जिन्होंने अपना क्षेत्र बदल लिया था, और लगभग 7 लाख नाम दोहराए गए थे चुनाव आयोग ने इस प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा कि वह कानून के अनुसार काम कर रहा है और चुनावों की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए अयोग्य मतदाताओं के नाम हटा रहा है

आयोग ने एक हलफनामे में बताया कि पहचान की पुष्टि के लिए आधार, वोटर आईडी और राशन कार्ड का इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन इन दस्तावेज़ों को नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जा रहा है इस मामले की वैधता की समीक्षा कर रहा सुप्रीम कोर्ट 28 जुलाई को अगली सुनवाई करेगा

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