Emmanuel Macron: 'रेहड़ी वाले का डिजिटल पेमेंट लेना एक सभ्यता की कहानी है...', राष्ट्रपति मैक्रों ने AI समिट में जमकर की भारत की तारीफ

Emmanuel Macron: मैक्रों ने भारत के डिजिटल बदलाव को एक महान सामाजिक परिवर्तन बताया। उन्होंने कहा, '10 साल पहले मुंबई के एक स्ट्रीट वेंडर के पास बैंक खाता तक नहीं था क्योंकि उसके पास पक्के दस्तावेज या स्थायी पता नहीं था। आज वही व्यक्ति अपने फोन पर तुरंत डिजिटल पेमेंट एक्सेप्ट करता है। यह केवल तकनीक नहीं, बल्कि एक सभ्यता की कहानी है'

अपडेटेड Feb 19, 2026 पर 12:35 PM
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मैक्रों ने कहा कि जो काम भारत ने कर दिखाया है, वह दुनिया का कोई और देश नहीं कर पाया

French President Macron: फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने 'इंडिया AI समिट 2026' में अपने संबोधन के दौरान भारत के डिजिटल बुनियादी ढांचे की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत वापस आकर उन्हें बेहद खुशी हो रही है। मैक्रों ने भारत की डिजिटल छलांग को दुनिया के लिए एक मिसाल बताते हुए कहा कि जो काम भारत ने कर दिखाया है, वह दुनिया का कोई और देश नहीं कर पाया।

मुंबई के रेहड़ी वाले का दिया उदाहरण

मैक्रों ने भारत के डिजिटल बदलाव को एक महान सामाजिक परिवर्तन बताया। उन्होंने कहा, '10 साल पहले मुंबई के एक स्ट्रीट वेंडर के पास बैंक खाता तक नहीं था क्योंकि उसके पास पक्के दस्तावेज या स्थायी पता नहीं था। आज वही व्यक्ति अपने फोन पर तुरंत डिजिटल पेमेंट एक्सेप्ट करता है। यह केवल तकनीक नहीं, बल्कि एक सभ्यता की कहानी है।' उन्होंने याद दिलाया कि 10 साल पहले दुनिया कहती थी कि 1.4 अरब लोगों को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ना असंभव है, लेकिन भारत ने सबको गलत साबित कर दिया।


इनोवेशन और जिम्मेदारी से तय होगा AI का भविष्य

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर बात करते हुए मैक्रों ने कहा कि सबसे स्मार्ट एआई वह नहीं है जो सबसे महंगा हो, बल्कि वह है जिसे बेहतरीन लोग सही उद्देश्य के लिए बनाएं। उन्होंने कहा, कोई भी देश केवल विदेशी कंपनियों के लिए बाजार या डेटा डाउनलोड करने का केंद्र नहीं बना रहना चाहता। उन्होंने कहा कि भविष्य का एआई वही लोग बनाएंगे जो तकनीक को मानवता और जिम्मेदारी के साथ जोड़ेंगे। भारत और फ्रांस मिलकर एआई के इस भविष्य को नया आकार देंगे।

सोशल मीडिया पर बच्चों की सेफ्टी को लेकर कड़ा रुख

मैक्रों ने डिजिटल दुनिया में बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि फ्रांस 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने की दिशा में बढ़ रहा है। उन्होंने जोर दिया कि बच्चों की रक्षा करना केवल 'नियम' नहीं है, बल्कि यह हमारी 'सभ्यता' को बचाने की जिम्मेदारी है। उन्होंने भरोसा जताया कि भारत भी बच्चों और किशोरों को सुरक्षित रखने के इस वैश्विक प्रयास में शामिल होगा।

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