दिल्ली-NCR में नहीं चलेंगी पेट्रोल-डीजल कारें! 2030 तक 'इलेक्ट्रिक क्रांति' के लिए एक्सपर्ट्स का बड़ा प्रस्ताव

End of Petrol Diesel Cars In Delhi NCR: योजना के अनुसार, BS-I, BS-II और BS-III वाहनों को तत्काल सड़कों से बाहर कर दिया जाना चाहिए। इसके बाद अगले पांच वर्षों में BS-IV वाहनों को पूरी तरह हटाने का लक्ष्य है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब तक के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले BS-VI वाहनों के लिए भी समयसीमा तय की गई है

अपडेटेड Feb 05, 2026 पर 12:05 PM
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समिति ने चेतावनी दी है कि जब AQI 250 के पार होता है, तो एक नवजात शिशु रोजाना 10-15 सिगरेट के बराबर धुआं अंदर लेता है

End of Petrol Diesel Cars In NCR: दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति ने एक क्रांतिकारी रोडमैप तैयार किया है। आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर अशोक झुनझुनवाला की अध्यक्षता वाली इस समिति ने सुझाव दिया है कि प्रदूषण फैलाने वाले पेट्रोल और डीजल वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाकर इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन वाहनों की ओर निर्णायक बदलाव किया जाना चाहिए। समिति ने चेतावनी दी है कि जब AQI 250 के पार होता है, तो एक नवजात शिशु रोजाना 10-15 सिगरेट के बराबर धुआं अंदर लेता है। इसी गंभीर स्वास्थ्य संकट को देखते हुए यह सख्त कदम उठाने की सिफारिश की गई है।

BS-I से BS-VI तक, वाहनों को हटाने का चरणबद्ध प्लान

विशेषज्ञ पैनल ने इंटरनल कंबशन इंजन (ICE) यानी पेट्रोल-डीजल वाहनों के लिए 'एक्सपायरी डेट' तय करने का प्रस्ताव दिया है। योजना के अनुसार, BS-I, BS-II और BS-III वाहनों को तत्काल सड़कों से बाहर कर दिया जाना चाहिए। इसके बाद अगले पांच वर्षों में BS-IV वाहनों को पूरी तरह हटाने का लक्ष्य है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब तक के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले BS-VI वाहनों के लिए भी समयसीमा तय की गई है। BS-VI दो-पहिया वाहनों को 2035 तक और कारों को 2040 तक सड़कों से हटाने का सुझाव दिया गया है, ताकि हाल ही में गाड़ी खरीदने वालों पर अचानक बोझ न पड़े।


2027 से 2030 के दौरान नए रजिस्ट्रेशन पर लगेगी लगाम

समिति ने नए वाहनों के रजिस्ट्रेशन के लिए भी कड़े डेडलाइन की सिफारिश की है। प्रस्ताव के मुताबिक, अप्रैल 2027 से सभी नए कमर्शियल दो-पहिया वाहन और टैक्सियों का 'जीरो टेलपाइप एमिशन' (ZTE) यानी इलेक्ट्रिक या हाइड्रोजन संचालित होना अनिवार्य होना चाहिए। अप्रैल 2028 से हल्के मालवाहक वाहनों (जैसे पिकअप वैन) के लिए भी यही नियम लागू होगा। सबसे बड़ा बदलाव अप्रैल 2030 से प्रस्तावित है, जिसके बाद दिल्ली-एनसीआर में केवल इलेक्ट्रिक कारों के ही रजिस्ट्रेशन की अनुमति देने का सुझाव दिया गया है।

'राइट टू चार्ज' और प्रदूषण निगरानी की नई तकनीक

इस बदलाव को आसान बनाने के लिए पैनल ने 'राइट टू चार्ज' (Right to Charge) का कानूनी ढांचा तैयार करने की बात कही है। इसके तहत घर और कार्यस्थल पर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा। साथ ही, प्रदूषण जांच (PUC) की पुरानी व्यवस्था को बदलकर 'रियल-वर्ल्ड एमिशन मॉनिटरिंग' शुरू की जाएगी। इसके लिए सड़कों पर रिमोट सेंसिंग डिवाइस लगाए जाएंगे, जो बिना गाड़ी रोके इंफ्रारेड और अल्ट्रावाइलेट लाइट की मदद से चलती गाड़ी से निकलने वाले खतरनाक प्रदूषकों (NOx, CO, PM) को माप सकेंगे। इसके अलावा, लोगों को इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु हर कैटेगरी में सब्सिडी देने की भी सिफारिश की गई है।

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