'ऊर्जा सुरक्षा भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता, राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर होगा फैसला', वेनेजुएला से तेल आयात पर बोला विदेश मंत्रालय

MEA On Venezuela: विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत की रणनीति का मुख्य हिस्सा ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण है। इसका मतलब है कि भारत केवल एक या दो देशों पर निर्भर रहने के बजाय दुनिया भर के बाजारों से तेल खरीदने के व्यावसायिक लाभ देखेगा

अपडेटेड Feb 05, 2026 पर 4:03 PM
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MEA ने कहा कि भारत के सभी निर्णय हमेशा राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखकर ही लिए जाएंगे

MEA On Venezuela Oil Import: भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने आज स्पष्ट किया है कि 1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बाजार की स्थितियों और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुरूप स्रोतों में विविधता लाने की रणनीति पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत के सभी निर्णय हमेशा राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखकर ही लिए जाएंगे। विदेश मंत्रालय का यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे पर प्रतिक्रिया के तौर पर आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत रूसी तेल खरीदना बंद कर देगा।

भारत के वेनेजुएला के साथ है पुराने रिश्ते, नए अवसरों पर चर्चा जारी

वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदने की संभावना पर जायसवाल ने कहा कि वेनेजुएला ऊर्जा क्षेत्र में भारत का पुराना और भरोसेमंद भागीदार रहा है। भारत 2019-20 तक वहां से तेल आयात कर रहा था, जिसे प्रतिबंधों के कारण रोकना पड़ा था। हालांकि 2023-24 में इसे फिर से शुरू किया गया, लेकिन प्रतिबंधों के दोबारा लागू होने से इसे फिर से रोकना पड़ा। प्रवक्ता ने जानकारी दी कि भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां (PSUs) 2008 से वेनेजुएला की राष्ट्रीय तेल कंपनी PDVSA के साथ साझेदारी में हैं। भारत अब अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए किसी भी व्यावसायिक रूप से फायदेमंद तेल आपूर्ति विकल्प को तलाशने के लिए पूरी तरह तैयार है।


ट्रंप के क्या थे दावे?

MEA का यह स्पष्टीकरण राष्ट्रपति ट्रंप के उस सोशल मीडिया पोस्ट के बाद आया है जिसमें उन्होंने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की घोषणा की थी। ट्रंप ने दावा किया था कि प्रधानमंत्री मोदी रूसी तेल की खरीद बंद करने और अमेरिका व वेनेजुएला से अधिक तेल खरीदने पर सहमत हुए हैं। इसके बदले में अमेरिका ने भारतीय सामानों पर टैरिफ 25% से घटाकर 18% कर दिया है। हालांकि भारत ने रूस का नाम लिए बिना यह साफ कर दिया है कि वह किसी एक देश पर निर्भर रहने के बजाय अपने विकल्पों को खुला रखेगा, ताकि देश के विकास के लिए जरूरी सस्ती और निरंतर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

बाजार की स्थिति के अनुरूप बदलती है नीति

विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत की रणनीति का मुख्य हिस्सा ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण है। इसका मतलब है कि भारत केवल एक या दो देशों पर निर्भर रहने के बजाय दुनिया भर के बाजारों से तेल खरीदने के व्यावसायिक लाभ देखेगा। भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते आर्थिक सहयोग के बीच, वेनेजुएला और अमेरिका से तेल आयात बढ़ाना भारत के लिए एक कूटनीतिक और आर्थिक संतुलन बनाने का तरीका हो सकता है। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और भू-राजनीतिक बदलावों का असर भारतीय उपभोक्ताओं की जेब और देश की ऊर्जा जरूरतों पर न पड़े।

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