अस्पताल की ठंडी गलियारों में जब ज्यादातर लोग अपनों के साथ होते हैं, तब एक आठ साल का बच्चा अकेले खड़ा था- अपनी मां की लाश के पास। न कोई रिश्तेदार, न कोई सहारा। सिर्फ डर, सन्नाटा और एक मासूम बच्चा। एटा के वीरांगना अवंतीबाई मेडिकल कॉलेज की मॉर्चरी में गुरुवार सुबह जो दृश्य दिखा, उसने पुलिस और अस्पताल कर्मियों तक को झकझोर दिया।
आठ साल का सनी खुद अपनी मां के पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के लिए अधिकारियों से बात कर रहा था। पूछने पर उसने बस इतना कहा- “मेरे साथ कोई नहीं है।”
40 साल की नीलम, जो HIV से जुड़ी गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं, इलाज के दौरान दम तोड़ चुकी थीं। मौत के वक्त अस्पताल में उनके साथ सिर्फ उनका नाबालिग बेटा सनी मौजूद था। पिता पहले ही दुनिया छोड़ चुके थे, और परिवार मानो पूरी तरह बिखर चुका था।
पुलिस के मुताबिक, नीलम पिछले एक महीने से गंभीर हालत में थीं। पहले वह फर्रुखाबाद में मायके में इलाज करा रही थीं, लेकिन हालत बिगड़ने पर पांच दिन पहले अपने गांव नागला धीरज लौटीं। यहीं से उन्हें एटा मेडिकल कॉलेज लाया गया, जहां गुरुवार तड़के उनकी सांसें थम गईं।
मां की मौत के बाद अस्पताल ने पुलिस को सूचना दी। जब पुलिस पहुंची, तो मॉर्चरी में सनी को देखकर सब सन्न रह गए। बच्चा रोते-रोते बार-बार कह रहा था- “मैं ही मम्मी को लेकर आया… मैं बिल्कुल अकेला हूं।”
उसकी आंखों में डर था, आवाज कांप रही थी और आसपास सिर्फ सफेद चादर में लिपटी उसकी मां की देह पड़ी थी। सनी ने यह भी आरोप लगाया कि जमीन के विवाद को लेकर उसके चाचा उसे नुकसान पहुंचाना चाहते हैं।
जांच में सामने आया कि सनी के पिता सुरेंद्र की भी आठ महीने पहले HIV संक्रमण के चलते मौत हो चुकी थी। मां-बाप दोनों की मौत के बाद यह बच्चा और उसकी 15 साल की बहन पूरी तरह बेसहारा हो गए हैं। बहन फिलहाल ननिहाल में रहती है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) ने बताया कि माता-पिता दोनों HIV संक्रमित थे और बच्चों की स्थिति जांच के बाद ही साफ हो पाएगी। यह अनिश्चितता भी सनी के भविष्य पर एक डरावनी छाया की तरह मंडरा रही है।
आखिरकार गांववालों की मदद से नीलम के पिता और ससुराल पक्ष को सूचना दी गई। पुलिस ने खुद आगे बढ़कर अंतिम संस्कार की सारी व्यवस्था करवाई। दोपहर करीब 1 बजे, मां की चिता जली और पास खड़ा था वही बच्चा, जिसने अपनी उम्र से कहीं ज्यादा दर्द देख लिया।
पुलिस ने किसी भी तरह के जान के खतरे से इनकार किया है, लेकिन सच्चाई यह है कि इस परिवार में अब कोई कमाने वाला नहीं बचा। सनी और उसकी बहन की जिंदगी आगे किस अंधेरे रास्ते पर जाएगी- यह सवाल अब भी हवा में तैर रहा है।