सरकार ने एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन के तहत MSME के लिए दो स्कीमें लॉन्च की, जानिए इनके फायदे

निर्यातकों के लिए इस इंटरेस्ट सबवेंशन स्कीम पर करीब 5,181 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह स्कीम छह साल यानी 2025 से 2031 तक के लिए होगी। शुरुआत में शर्तें पूरी करने वाले एमएसएमई को 2.75 फीसदी कम इंटरेस्ट रेट पर कर्ज मिलेगा

अपडेटेड Jan 02, 2026 पर 7:30 PM
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दिसंबर की शुरुआत में सरकार ने एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन (EPM) को मंजूरी दी थी।

कॉमर्स मिनिस्ट्री ने 2 जनवरी को एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन के और दो कंपोनेंट को लॉन्च कर दिया। इसमें निर्यात प्रोत्साहन एनिशिएटिव के तहत प्री और पोस्ट शिपमेंट एक्सपोर्ट क्रेडिट के लिए एक इंटरेस्ट सबवेंशन स्कीम शामिल है। इससे एमएसएमई को मार्केट में चल रहे इंटरेस्ट रेट्स के मुकाबले कम इंटरेस्ट पर कर्ज मिलेगा।

इंटरेस्ट सबवेंशन स्कीम छह साल के लिए होगी

निर्यातकों के लिए इस इंटरेस्ट सबवेंशन स्कीम पर करीब 5,181 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह स्कीम छह साल यानी 2025 से 2031 तक के लिए होगी। शुरुआत में शर्तें पूरी करने वाले एमएसएमई को 2.75 फीसदी कम इंटरेस्ट रेट पर कर्ज मिलेगा। कर्ज का इंटरेस्ट रेट फ्लोटिंग होगा, जो रेपो रेट से लिंक्ड होगा।


नए बाजारों को एक्सपोर्ट करने वालों को अतिरिक्त इनसेंटिव

कॉमर्स मिनिस्ट्री ने कहा कि नए और उभरते बाजारों को एक्सपोर्ट करने वाले एमएसएमई को अतिरिक्त इनसेंटिव मिलेगा, जिसकी अधिसूचना बाद में इश्यू की जाएगी। सरकार का मकसद एक्सपोर्ट डायवर्सिफिकेशन को बढ़ावा देना है।

कम कोलैटरल पर एमएसएमई को बैंक से मिलेगा लोन

सरकारी की दूसरी स्कीम कोलैटरल सपोर्ट फॉर एक्सपोर्ट क्रेडिट है। इस स्कीम के तहत एमएसएमई कम कोलैटरल या थर्ड पार्टी गारंटी के साथ बैंक से लोन ले सकेंगे। यह स्कीम क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज (CGTMSE) के जरिए लागू की जाएगी।

इंटरेस्ट सबवेंशन स्कीम से होंगे ये फायदे

एमएसएमई को अक्सर कोलैटरल और गारंटी के अभाव में लोन के लिए ज्यादा इंटरेस्ट चुकाना पड़ता है। कई बार इंटरेस्ट रेट 9.5 से 12.5 फीसदी तक पहुंच जाता है। इंटरेस्ट सबवेंशन स्कीम से उन्हें 2.5 फीसदी इंटरेस्ट रेट पर लोन मिल सकेगा। इससे उनकी प्रोडक्शन कॉस्ट में कमी आएगी। साथ ही विदेश में उनके प्रोडक्ट्स की प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ेगी।

एमएसएमई पर अमेरिकी टैरिफ का असर 

सरकार ऐसे वक्त एमएसएमई की मदद करने की कोशिश कर रही है, जब अमेरिका के भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने का असर बड़ी संख्या में एमएसएमई पर पड़ा है। सरकार कह चुकी है कि वह अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित एमएसएमई की मदद करेगी।

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दिसंबर में एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन को मिली थी मंजूरी

दिसंबर की शुरुआत में सरकार ने एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन (EPM) को मंजूरी दी थी। इस मिशन पर 25,060 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इससे खासकर एमएसएमई और लेबर-इनटेंसिव सेक्टर्स को फायदा होगा।

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