Noida: बेटे युवराज की मौत के बाद अकेले पड़े पिता...बेटी के साथ लंदन गए, अभी तक नहीं आई SIT की जांच रिपोर्ट

पुलिस के अनुसार, युवराज किसी तरह कार से बाहर निकलने में सफल रहे। उन्होंने तुरंत अपने पिता को फोन करके हादसे की जानकारी दी। इसके बाद उनके पिता राजकुमार मेहता ने 112 नंबर पर कॉल कर पुलिस को सूचना दी और खुद भी मौके पर पहुंच गए। सूचना मिलते ही पुलिस, फायर ब्रिगेड की टीमें, साथ ही SDRF और NDRF के जवान मौके पर पहुंचे। इसके बाद कई घंटों तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया

अपडेटेड Feb 17, 2026 पर 8:17 PM
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ग्रेटर नोएडा में एक दर्दनाक हादसे में 27 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत हो गई थी।

पिछले महीने ग्रेटर नोएडा में एक दर्दनाक हादसे में 27 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत हो गई थी। उनकी कार पानी से भरे गहरे गड्ढे में गिर गई थी। अब उनके परिवार को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। उनके पिता राजकुमार मेहता अपनी बेटी के साथ लंदन चले गए हैं। नोएडा के सेक्टर-150 स्थित टाटा यूरेका पार्क सोसाइटी में उनका घर फिलहाल बंद है। पड़ोसियों के अनुसार, उन्होंने जाते समय बताया था कि वे जल्द ही वापस आएंगे। परिवार अभी भी इस हादसे के सदमे से उबर नहीं पाया है और न्याय का इंतजार कर रहा है।

16 जनवरी को हुआ था हादसा

यह हादसा 16 जनवरी को हुआ था। युवराज की कार नोएडा के सेक्टर-150 मोड़ के पास एक पानी से भरे बेसमेंट में गिर गई थी, जो उनके घर से लगभग 500 मीटर की दूरी पर था। उस समय वे गुरुग्राम स्थित अपने ऑफिस से घर लौट रहे थे। पुलिस का मानना है कि घने कोहरे की वजह से यह हादसा हुआ हो सकता है। बताया जा रहा है कि युवराज की कार नाले की दीवार तोड़ते हुए करीब 20 से 30 फीट गहरे गड्ढे में जा गिरी थी।


पुलिस के अनुसार, युवराज किसी तरह कार से बाहर निकलने में सफल रहे। उन्होंने तुरंत अपने पिता को फोन करके हादसे की जानकारी दी। इसके बाद उनके पिता राजकुमार मेहता ने 112 नंबर पर कॉल कर पुलिस को सूचना दी और खुद भी मौके पर पहुंच गए। सूचना मिलते ही पुलिस, फायर ब्रिगेड की टीमें, साथ ही SDRF और NDRF के जवान मौके पर पहुंचे। इसके बाद कई घंटों तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया।

हादसे पर उठे थे कई सवाल

हादसे के बाद वहां मौजूद लोगों ने रेस्क्यू में हुई देरी के बारे में बताया। वहां मौजूद कुछ लोगों का कहना है कि युवराज करीब दो घंटे तक डूबती हुई कार के ऊपर खड़े रहे और लगातार मदद के लिए चिल्लाते रहे। बताया जाता है कि उन्होंने अपने पिता से फोन पर कहा, “पापा, मेरी मदद करो… मैं मरना नहीं चाहता।” आस-पास खड़े लोगों ने भी उन्हें बार-बार “पापा, बचाओ” कहते हुए सुना। इसी दौरान कार धीरे-धीरे पानी में डूबती चली गई। करीब रात 1:45 बजे वह पूरी तरह डूब गए।

रेस्क्यू टीम  पर लगे थे आरोप

आरोप लगे थे कि रेस्क्यू टीम ने पानी में उतरने से पहले कुछ देर हिचकिचाहट दिखाई। उनका कहना था कि घना कोहरा, कड़ाके की ठंड और पानी के नीचे लोहे की सरियों जैसी चीजों का खतरा मौजूद था। अधिकारियों ने हालात को “बहुत खतरनाक” बताया, जिसके कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में मुश्किलें आईं। कई घंटों तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद करीब चार घंटे में युवराज का शव बरामद किया गया। इसके साथ ही लंबी तलाश खत्म हुई। एक डिलीवरी एजेंट मोनिंदर ने भी बचाव में मदद करने की कोशिश की। वहीं पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताया गया कि युवराज की मौत दम घुटने से हुई। रिपोर्ट में कार्डियक फेलियर को भी एक कारण माना गया है।

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