FIR vs SIR: संसद के शीतकालीन सत्र में होगा बवाल! सोनिया, राहुल गांधी के खिलाफ कार्रवाई से कांग्रेस के लिए नई मुसीबत
यह मामला उन आरोपों पर आधारित है कि नेताओं और उनके सहयोगियों ने मिलकर उस कंपनी का गलत तरीके से नियंत्रण हासिल किया, जो पहले कांग्रेस से जुड़ी थी और जिसकी संपत्ति लगभग 2,000 करोड़ रुपए की थी। 3 अक्टूबर को दर्ज FIR के अनुसार, यह अधिग्रहण यंग इंडियन के जरिए किया गया, एक ऐसी कंपनी जिसमें गांधी परिवार के पास कुल मिलाकर 76 प्रतिशत शेयर थे
FIR vs SIR: संसद के शीतकालीन सत्र में होगा बवाल! सोनिया, राहुल गांधी के खिलाफ कार्रवाई से कांग्रेस के लिए नई मुसीबत
कांग्रेस सोमवार से शुरू हो रहे शीतकालीन सत्र में चुनाव आयोग की विशेष गहन समीक्षा (SIR), चीन और लाल किला विस्फोट जैसे अलग-अलग मुद्दों पर सरकार को घेरने के लिए अपने हथियार तेज कर रही थी, तभी खबर आई कि नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया और राहुल गांधी के नाम पर एक नई FIR दर्ज की गई है। कांग्रेस भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी लड़ाई 2014 में ही हार चुकी थी, जब नरेंद्र मोदी एक मजबूत और स्वच्छ सरकार देने के वादे के साथ प्रधानमंत्री बने थे। तब से, प्रधानमंत्री इस बात पर जोर देते रहे हैं कि कैसे कांग्रेस की पहचान भ्रष्टाचार से जुड़ी है, जिसके तार सबसे ऊपर यानी गांधी परिवार तक है।
FIR में क्या कहा गया है?
दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) के कथित अनियमित अधिग्रहण के संबंध में कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी और राहुल गांधी सहित छह अन्य के खिलाफ FIR दर्ज की है।
यह मामला उन आरोपों पर आधारित है कि नेताओं और उनके सहयोगियों ने मिलकर उस कंपनी का गलत तरीके से नियंत्रण हासिल किया, जो पहले कांग्रेस से जुड़ी थी और जिसकी संपत्ति लगभग 2,000 करोड़ रुपए की थी। 3 अक्टूबर को दर्ज FIR के अनुसार, यह अधिग्रहण यंग इंडियन के जरिए किया गया, एक ऐसी कंपनी जिसमें गांधी परिवार के पास कुल मिलाकर 76 प्रतिशत शेयर थे।
पुलिस की यह कार्रवाई प्रवर्तन निदेशालय (ED) की हेडक्वार्टर जांच यूनिट (HIU) की ओर से दर्ज की गई शिकायत के चलते हुई। ED ने नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 2008 से 2024 के बीच की अवधि की अपनी जांच के विस्तृत निष्कर्ष साझा किए थे।
धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 66(2) के तहत जानकारी साझा करने से ED को किसी अनुसूचित अपराध को दर्ज करने और उसकी जांच करने के लिए किसी दूसरी एजेंसी से अनुरोध करने का अधिकार मिल जाता है। एक बार ऐसा अपराध दर्ज हो जाने पर, यह ED के लिए अपनी धन शोधन जांच जारी रखने का आधार — या पूर्वगामी अपराध — बन जाता है।
ED की जांच पूर्व भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद सुब्रमण्यम स्वामी की ओर से दायर एक निजी शिकायत पर आधारित है। पटियाला हाउस स्थित एक मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने जून 2014 में शिकायत का संज्ञान लेते हुए कानूनी प्रक्रिया शुरू की थी। तब से, ED एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) और उसके अधिग्रहण से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच कर रहा है।
FIR पर बवाल
कांग्रेस के प्रमुख क़ानूनी रणनीतिकार अभिषेक मनु सिंघवी ने दर्ज हुई ताजा FIR को महज एक दोहराई गई कवायद करार देते हुए खारिज कर दिया है। कांग्रेस का कहना है कि जब भी पार्टी कोई नया मुद्दा उठाना चाहती है, पुराने मामलों को दोबारा उछाल दिया जाता है।
कानूनी दृष्टि से यह भले ही कांग्रेस का पक्ष हो और राहुल गांधी भले ही कहें कि वे अपने ख़िलाफ़ दर्ज कई मामलों को “सम्मान के प्रतीक” की तरह पहनते हैं, लेकिन सर्दियों के सत्र की शुरुआत से ठीक एक दिन पहले हुई यह कार्रवाई पार्टी पर असर डालेगी, क्योंकि अब उसे इस मोर्चे पर भी लड़ाई लड़नी होगी।
नेशनल हेराल्ड मामले में अदालत 16 दिसंबर को अपना फ़ैसला सुनाएगी। अगर यह फ़ैसला शीर्ष नेतृत्व को कठघरे में खड़ा करता है, तो कांग्रेस की लड़ाई और कमज़ोर होती दिखेगी और पूरे संगठनात्मक ढांचे से उम्मीद की जाएगी कि वह दिशा बदलकर अपना ध्यान गांधी परिवार की कानूनी लड़ाई पर केंद्रित करे।
लेकिन राहुल गांधी की मूल रणनीति यह नहीं थी। वे चाहते थे कि कर्नाटक में चल रही सत्ता-संघर्ष की कहानी को भी फ़िलहाल पीछे धकेल दिया जाए, ताकि ध्यान SIR मुद्दे से न भटके, जिसके लिए 14 दिसंबर को मेगा रैली और संसद के भीतर ज़ोरदार टकराव की योजना बनाई गई थी।
क्या हेराल्ड, INDIA ब्लॉक को एकजुट करेगा?
सियासी उथल-पुथल के दौर में हर सहयोगी की ज़रूरत होती है और कांग्रेस भी यही चाहेगी कि पूरा गठबंधन उसके साथ खड़ा नज़र आए। सवाल यह है कि द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके), तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) जैसे दल, जिन पर खुद भी भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं, क्या संसद के भीतर गांधी परिवार के साथ खुलकर खड़े होंगे?
मौजूदा कड़वाहट और खेमेबंदी को देखते हुए इसकी संभावना पर सवाल खड़े होते हैं। इसके साथ ही, ज़्यादातर घटक दल अपने-अपने चुनावी मोर्चों पर व्यस्त हैं, जैसे बंगाल में टीएमसी और तमिलनाडु में डीएमके। ये दल वही लड़ाई चुनना चाहेंगे जो उन्हें चुनावी तौर पर फ़ायदा पहुंचाए, ऐसे में यह केस इंडिया ब्लॉक की एकता की कहानी में कोई नया मोड़ लाएगा, इसकी गारंटी नहीं दिखती।
राहुल गांधी इस मामले को अपने सिद्धांतों की लड़ाई के रूप में पेश कर सकते हैं, कांग्रेस इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताकर शोर भी मचा सकती है, लेकिन नेशनल हेराल्ड का साया, पार्टी के सामने खड़ी पहले से मौजूद चुनौतियों के ठीक पहले, एक बार फिर उसे सताने लौट आया है।