Flydubai Incident: फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 के भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार ने विमान के कॉकपिट में हुए उस खौफनाक घटनाक्रम के बारे में नए और चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उनके ओमानी को-पायलट ने 34,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ रहे विमान में उनके सिर पर हमला कर दिया था। विमान में उस वक्त 174 लोग सवार थे। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बातचीत के दौरान कैप्टन मच्छार ने बताया कि उड़ान हर रोज की तरफ सामान्य थी। उनका को-पायलट नमाज पढ़ने के लिए अपनी सीट से उठा था। इस दौरान सम्मान के चलते उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। लेकिन कुछ मिनट बाद अचानक उनके सिर के पीछे जोरदार वार हुआ।
उन्होंने कहा, "यह सामान्य उड़ान थी। को-पायलट नमाज पढ़ना चाहता था, जैसा कि कई स्थानीय लोग करते हैं। वह नमाज पढ़ रहा था। इस दौरान सम्मान के कारण मैंने पीछे की ओर नहीं देखा। करीब चार-पांच मिनट बाद अचानक मेरे सिर के पीछे जोरदार चोट लगी।" बुधवार को दुबई से तेल अवीव जा रहे फ्लाईदुबई के विमान एफजेड1073 के कॉकपिट में उनके को-पायलट ने मच्छार पर चाकू से हमला किया था, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। विमान में 27 बच्चों समेत 174 यात्री सवार थे।
पहले लगा विमान में कोई बड़ी खराबी हो गई
कैप्टन मच्छार ने बताया कि शुरुआती हमले के बाद लगातार वार होते रहे। पहले उन्हें लगा कि शायद विमान में ही कोई गंभीर तकनीकी समस्या आ गई है। उन्होंने कहा, "लेकिन उसके बाद लगातार वार होते रहे। तभी मुझे समझ आया कि समस्या विमान में नहीं है। बल्कि कॉकपिट में मेरे साथ मौजूद दूसरे व्यक्ति ने मुझ पर हमला किया है।" हमले को रोकने की कोशिश में उनकी नजर धुंधली होने लगी। उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने की कोशिश भी की। लेकिन हमलावर ने दरवाजा फिर बंद कर दिया, जिससे वह जमीन पर गिर पड़े।
'मेरे अंदर आखिरी लड़ाई बाकी थी'
कैप्टन ने बताया कि इसी दौरान विमान अचानक तेजी से नीचे की ओर झुकने लगा और यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। उस समय उन्हें लगा कि अगर उन्होंने कुछ नहीं किया तो विमान में सवार सभी लोगों की जान जा सकती है। उन्होंने कहा, "मेरे अंदर एक आखिरी लड़ाई बाकी थी। आप इसे निजी लड़ाई कहें या लोगों के लिए लड़ाई, लेकिन मैंने वह किया। अगर मैं ऐसा नहीं करता तो मैं मर जाता।" उन्होंने आगे बताया कि पूरी ताकत लगाकर उन्होंने कॉकपिट के दरवाजे तक पहुंचने की कोशिश की और आखिरकार उसे खोलने में सफल रहे। इसके बाद बाहर मौजूद लोगों ने स्थिति संभाल ली और विमान का अपने कंट्रोल में वापस ले लिया।
कोड के बावजूद कैसे खुला कॉकपिट का दरवाजा?
मच्छार ने बताया कि कॉकपिट के दरवाजे में बाहर से खोलने के लिए कोड की व्यवस्था थी। उनके सहयोगी बाहर से कोड डालकर दरवाजा खोलने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन हमलावर उन्हें दरवाजा खोलने नहीं दे रहा था। ऐसे में उनके पास एक ही रास्ता बचा था दरवाजे के अंदर मौजूद नॉब तक पहुंचना। उन्होंने कहा, "यह एक छोटा और तेज ट्विस्ट था। जैसे ही मेरे हाथ नॉब तक पहुंचे, मैंने उसे घुमाया और दरवाजा खोल दिया।" इसके बाद बाहर मौजूद लोगों ने कॉकपिट में पहुंचकर स्थिति को संभाला और विमान को सुरक्षित कंट्रोल में लिया।
नेतन्याहू ने बताया 'किस्मत का मोड़', इजरायल आने का दिया न्योता
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की तारीफ करते हुए इसे 'किस्मत का एक मोड़' करार दिया। नेतन्याहू ने बातचीत के दौरान मच्छार से कहा कि वह इजरायल, भारत और पूरी दुनिया के हीरो हैं। उन्होंने उन्हें इजरायल के स्वतंत्रता दिवस समारोह में मशाल जलाने के लिए आमंत्रित भी किया। यह घटना उस समय बेहद गंभीर हो गई थी जब 34,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ रहे विमान के कॉकपिट में ही पायलट पर हमला हुआ। कैप्टन मच्छार की सूझबूझ और आखिरी क्षण तक विमान को बचाने की कोशिश ने संभावित बड़े हादसे को टालने में अहम भूमिका निभाई। इस वक्त उनकी पूरी दुनिया में तारीफ हो रही है।