E25 Petrol: 20% एथेनॉल वाले पेट्रोल के बाद अब 25% ब्लेंडिंग पर आई ये जानकारी, कार और बाइक चलाने वालों के लिए बड़ी खबर!

देश में 20 फीसदी एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल को लेकर चल रही तीखी बहस के बीच अब 25 फीसदी एथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक सरकार अब 25% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की प्रस्तावित प्रक्रिया की रफ्तार को स्लो कर सकती है।

अपडेटेड Jul 07, 2026 पर 11:33 AM
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E20 के बाद E25 पेट्रोल का प्लान धीमा क्यों? जानें पूरी वजह

E25 Petrol News: देश में 20 फीसदी एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल को लेकर चल रही तीखी बहस के बीच अब 25 फीसदी एथेनॉल ब्लेंडिंग यानी E25 पेट्रोल को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। द इंडियन एक्सप्रेस की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक E20 फ्यूल के तेजी से हुए रोलआउट के बाद उपजी चिंताओं को देखते हुए सरकार अब 25 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की प्रस्तावित प्रक्रिया की रफ्तार को स्लो कर सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र सरकार E25 पेट्रोल (जिसमें 75 प्रतिशत पेट्रोल और 25 प्रतिशत एथेनॉल होगा) की शुरुआत को कैलिब्रेटेड और ग्रेडेड तरीके से करने के पक्ष में है। इसके मुताबिक सरकार अब चाहती है कि ऑटो मेकर्स और पूरे फ्यूल कोसिस्टम को तैयारी के लिए थोड़ा और अधिक समय दिया जाना चाहिए।

सरकार की दो हालिया फैसलों से बढ़ी थीं उम्मीदें

हालांकि, सरकार की तरफ से अभी तक E25 पेट्रोल के लिए किसी भी औपचारिक समयसीमा की घोषणा नहीं की गई है। लेकिन हाल ही में लिए गए दो नीतिगत फैसलों ने उम्मीदें बढ़ा दी थीं कि सरकार अब E20 से आगे बढ़ने की तैयारी कर रही है। केंद्र सरकार ने 22 से 30 प्रतिशत एथेनॉल वाले पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी से छूट दी थी। इसके अलावा भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने भी इस तरह के उच्च एथेनॉल मिश्रणों के लिए अपने स्पेसिफिकेशंस को लिस्टेड कर दिया था।


पिछले हफ्ते हुई उच्च स्तरीय बैठक, माइलेज और इंजन डैमेज पर हुई चर्चा

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले हफ्ते सरकार के वरिष्ठ स्तर पर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में वाहन मालिकों द्वारा माइलेज, परफॉर्मेंस और गाड़ी के पार्ट्स को होने वाले संभावित नुकसान को लेकर उठाई गई चिंताओं को वैज्ञानिक तरीके से हल करने की आवश्यकता पर चर्चा की गई। अधिकारियों का कहना है कि हालांकि कुछ शिकायतों को बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया माना गया लेकिन उन्होंने इस बात को स्वीकार किया कि ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स को गाड़ी मालिकों की इन चिंताओं पर जवाब देने की जरूरत है।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि, 'सरकार यह विचार कर है कि E20 से आगे बढ़ने के बदलाव को थोड़ा समय देना होगा। ऑटोमेकर्स से भी हमें यही संकेत मिले हैं। अब आइडिया ये है कि मौजूदा वाहनों के लिए कैलिब्रेटेड और ग्रेडेड तरीके से ही E25 की ओर बढ़ा जाए।'

5 साल पहले हासिल हुआ लक्ष्य तो पुरानी गाड़ियों के मालिकों ने जताई चिंता

सरकार ने मूल रूप से साल 2030 तक देश भर में E20 पेट्रोल उपलब्ध कराने की योजना बनाई थी लेकिन इस लक्ष्य को पांच साल पहले ही आगे बढ़ा दिया गया। वर्तमान में देश भर में बिकने वाला मानक पेट्रोल मिश्रण E20 ही है। ऐसे कई दावे किए जा रहे हैं कि इस तेजी से हुए बदलाव की वजह से उन पुराने कार और दोपहिया वाहनों (बाइक-स्कूटर) के मालिकों की शिकायतें बढ़ गई हैं जिन्हें विशेष रूप से E10 पेट्रोल के लिए डिजाइन किया गया था। वाहन चालकों ने माइलेज घटने की रिपोर्ट की है और फ्यूल-सिस्टम के पार्ट्स के टिकाऊपन पर भी चिंता जताई है।

कार और बाइक पर कैसे असर डालता है ज्यादा एथेनॉल?

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक एथेनॉल और पेट्रोल के मिश्रण से कुछ असर जरूर पड़ता है। इसके मुताबिक पेट्रोल की तुलना में एथेनॉल का कैलोरीफिक मान कम होता है। इससे गाड़ी का माइलेज कम हो सकता है। इसका असर गाड़ी की लाइफ, इंजन की डिजाइन और उसके सर्टिफिकेशन के आधार पर अलग-अलग होता है। एथेनॉल हाइग्रोस्कोपिक होता है। इसका मतलब है कि यह नमी को सोखता है। ऐसे में जो पार्ट्स उच्च मिश्रण वाले पेट्रोल के लिए डिजाइन नहीं किए गए हैं, उनमें जंग लगने का खतरा काफी बढ़ सकता है।

ऑटोमेकर्स को करना होगा और काम, भविष्य के मॉडल्स पर चल रहा काम

अगर सरकार E25 की तरफ कदम बढ़ाती है तो वाहन निर्माताओं को इंजन कैलिब्रेशन, फ्यूल-सिस्टम ड्यूरेबिलिटी, मटेरियल कम्पैटिबिलिटी और जंग प्रतिरोधकता पर एक्सट्रा काम करना होगा। इसके अलावा सुरक्षा, एमिशन और रोडवर्थिनेस को कवर करने वाली नियामक प्रमाणन प्रक्रिया यानी होमोलोगेशन से भी वाहनों और उनके पार्ट्स को गुजरना होगा। कई ऑटोमेकर्स ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि उन्होंने उच्च एथेनॉल मिश्रण पर बेहतर प्रदर्शन के लिए हाई कम्प्रेशन रेशियो वाले इंजन विकसित करना शुरू कर दिया है। ये बदलाव काफी हद तक भविष्य में आने वाले नए मॉडल्स पर लागू होंगे, न कि पहले से सड़क पर चल रहे पुराने वाहनों पर।

आपको बता दें कि सरकार ने पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करने और परिवहन ईंधन के कार्बन कंटेंट को घटाने के लिए एथेनॉल ब्लेंडिंग को बढ़ावा दिया है। हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट रखा है कि उच्च मिश्रण वाले ईंधन को पूरी टेस्टिंग और सभी स्टेकहोल्डर्स) के साथ परामर्श के बाद ही पेश किया जाएगा।

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