NSUI नेता से मुख्यमंत्री की कुर्सी तक: जानिए कौन हैं डीके शिवकुमार, जो संभालेंगे कर्नाटक की कमान

Who is D K Shivakumar: डी. के. शिवकुमार का मानना है कि विकास ऐसा होना चाहिए जो सिर्फ चुनिंदा लोगों के लिए न हो, बल्कि अमीर-गरीब और शहर-गांव सबको साथ लेकर चले। वे चुनाव को ध्यान में रखकर नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को ध्यान में रखकर योजनाएं बनाने पर भरोसा करते हैं

अपडेटेड May 28, 2026 पर 3:46 PM
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DK Shivakumar: NSUI नेता से मुख्यमंत्री की कुर्सी तक: जानिए कौन हैं डीके शिवकुमार, जो संभालेंगे कर्नाटक की कमान

कर्नाटक की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद अब राज्य के कद्दावर नेता और मौजूदा उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार (DKS) कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। छात्र राजनीति से अपने सफर की शुरुआत करने वाले डी. के. शिवकुमार को कांग्रेस का सबसे बड़ा 'संकटमोचक' माना जाता है।

आइए रूबरू होते हैं उनके 45 साल के राजनीतिक सफर, उनकी बड़ी उपलब्धियों और उस विजन से, जिसके दम पर वह कर्नाटक को आगे ले जाना चाहते हैं।

छात्र नेता से 'पावर कॉरिडोर' तक का सफर


1980 - राजनीति में एंट्री: कनकपुरा के एक आम कॉलेज छात्र के रूप में उन्होंने कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का प्रोत्साहन मिला।

1985 - पहला चुनाव: उन्होंने अपना पहला चुनाव सातनूर विधानसभा सीट से JDS के बड़े नेता एच. डी. देवेगौड़ा के खिलाफ लड़ा था।

1989 - पहली जीत: सातनूर सीट से ही वे पहली बार विधायक (MLA) चुनकर विधानसभा पहुंचे। इसके बाद से वे लगातार 8 बार विधायक बन चुके हैं।

1990 के दशक में मंत्री पद: साल 1990 से 1992 के बीच वे जेल और होमगार्ड मंत्री रहे, जहां उन्होंने कैदियों को हुनर सिखाने और उनके सुधार के लिए काम किया। इसके बाद 1999-2004 के बीच उन्होंने शहरी विकास मंत्री के रूप में काम संभाला।

2019 - वफादारी की परीक्षा: राजनीति के उतार-चढ़ाव के बीच उन्होंने भारी राजनीतिक दबाव का सामना किया और जेल भी गए, लेकिन उन्होंने पार्टी का साथ कभी नहीं छोड़ा। इसे कांग्रेस के प्रति उनकी वफादारी की सबसे बड़ी परीक्षा माना जाता है।

बिजली और पानी के क्षेत्र में किए बड़े काम

डी. के. शिवकुमार जब भी सरकार में रहे, उन्होंने कुछ ऐसे काम किए जिनका सीधा फायदा जनता को मिला:

कर्नाटक को बनाया 'सोलर हब': 2014 से 2018 के बीच ऊर्जा मंत्री रहते हुए उन्होंने कर्नाटक में 6,000 मेगावाट से ज्यादा सोलर पावर का प्रोडक्शन शुरू करवाया। पावागढ़ में बंजर जमीन पर एशिया का बड़ा सोलर पार्क बनवाया और 'सूर्या रैथा' योजना से किसानों को मजबूत किया।

बेंगलुरु को दिया पीने का पानी: जल संसाधन मंत्री रहते हुए उन्होंने 'कावेरी फेज-5' प्रोजेक्ट को पूरा किया, जिससे बेंगलुरु के आस-पास के 110 गांवों और नए इलाकों के करीब 50 लाख लोगों को पीने का साफ पानी मिला। इसके अलावा वे 'एत्तिनहोल प्रोजेक्ट' पर भी काम कर रहे हैं, जो सूखे इलाकों के 76 लाख लोगों तक पानी पहुंचाएगा।

कांग्रेस के 'संकटमोचक' और 'किंगमेकर'

साल 2020 में जब उन्हें कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस (KPCC) का अध्यक्ष बनाया गया, तब पार्टी काफी मुश्किल दौर में थी। शिवकुमार ने जमीन पर जाकर संगठन को दोबारा खड़ा किया। साल 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की बंपर जीत के पीछे डी. के. शिवकुमार को मुख्य रणनीतिकार माना जाता है।

'पांच गारंटियों' के पीछे का दिमाग: कांग्रेस की जिन '5 गारंटियों' (जैसे मुफ्त बिजली, महिलाओं को आर्थिक मदद आदि) ने चुनाव का पासा पलटा, उसे तैयार करने और लागू करने में उनकी मुख्य भूमिका रही। आज इसका फायदा राज्य के 7 करोड़ से ज्यादा लोगों को मिल रहा है।

राष्ट्रीय स्तर पर भूमिका: केवल कर्नाटक ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश में जब भी कांग्रेस पर कोई राजनीतिक संकट आया, डी. के. शिवकुमार ने हमेशा आगे बढ़कर मोर्चा संभाला।

बेंगलुरु और कर्नाटक के लिए क्या है उनका विजन?

बेंगलुरु शहर के विकास मंत्री के रूप में उनके पास शहर को बदलने का एक बड़ा प्लान है:

ट्रैफिक से आजादी (टनल रोड): बेंगलुरु के जाम को खत्म करने के लिए वे जमीन के नीचे 'टनल रोड' (सुरंग वाली सड़कें) नेटवर्क बनाने पर काम कर रहे हैं।

ई-खाता और डिजिटल गवर्नेंस: भ्रष्टाचार को कम करने के लिए उन्होंने 25 लाख से ज्यादा प्रॉपर्टी के रिकॉर्ड को डिजिटल (E-Khata) कर दिया है, ताकि लोगों को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।

EV कैपिटल: बेंगलुरु को भारत की इलेक्ट्रिक व्हीकल राजधानी बनाने के लिए शहर में 4,400 से ज्यादा चार्जिंग स्टेशन लगाए जा रहे हैं।

स्काई डेक: वे बेंगलुरु की पहचान बदलने के लिए एक ग्लोबल लैंडमार्क 'स्काई डेक' बनाने का सपना रखते हैं।

डी. के. शिवकुमार का मानना है कि विकास ऐसा होना चाहिए जो सिर्फ चुनिंदा लोगों के लिए न हो, बल्कि अमीर-गरीब और शहर-गांव सबको साथ लेकर चले। वे चुनाव को ध्यान में रखकर नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को ध्यान में रखकर योजनाएं बनाने पर भरोसा करते हैं।

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