US-Iran Peace Deal: तेल-गैस संकट से राहत और गिरते रुपये को सहारा मिलने तक...अमेरिका-ईरान डील से भारत को क्या मिला?
US-Iran Peace Deal: अमेरिका और ईरान के बीच 107 दिन लंबे संघर्ष को समाप्त करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के समझौते से भारत की अर्थव्यवस्था को कई मोर्चों पर राहत मिलने की उम्मीद है। निर्यातकों और विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से पश्चिम एशिया को होने वाले भारत के निर्यात में तेजी आएगी
US-Iran Peace Deal: अमेरिका-ईरान डील से भारत को बड़ी राहत मिली है
US-Iran Peace Deal: होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही सामान्य होने या इसके फिर से खुलने से भारत जैसे दुनिया के बड़े कच्चे तेल आयातक देश को बड़ी राहत मिल सकती है। इससे तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं कम होंगी, माल ढुलाई लागत घटेगी और महंगाई पर दबाव भी कम होगा। इसके अलावा भारत के निर्यात को बढ़ावा मिलने और रुपये को सहारा मिलने की उम्मीद है।
ईरान और ओमान के बीच स्थित यह संकीर्ण समुद्री रूट्स वैश्विक तेल आपूर्ति/परिवहन का लगभग पांचवां हिस्सा संभालता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कतर जैसे प्रमुख खाड़ी उत्पादकों के लिए मुख्य निर्यात रूट्स है जो भारत के प्रमुख ऊर्जा आपूर्तिकर्ता भी हैं।
फरवरी के अंत में ईरान से जुड़े तनाव शुरू होने के बाद इस जलडमरूमध्य से कच्चे तेल (जिससे पेट्रोल और डीजल बनते हैं) और प्राकृतिक गैस (जिसका उपयोग बिजली उत्पादन, उर्वरक निर्माण, सीएनजी एवं घरेलू रसोई गैस के रूप में होता है) की आपूर्ति प्रभावित हुई थी। इससे कच्चे तेल की कीमतों, शिपिंग बीमा प्रीमियम और मालभाड़ा दरों में तेज बढ़ोतरी हुई।
उद्योग सूत्रों एवं विश्लेषकों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने और तनाव में कमी से वैश्विक ऊर्जा बाजार स्थिर हो सकते हैं। भारत जैसे आयातक देशों के लिए स्थिति बेहतर हो सकती है।
तेल की कीमतों में गिरावट
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ युद्धविराम समझौते की घोषणा के बाद रविवार को तेल कीमतों में गिरावट आई। इस समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों के टोल-फ्री आवागमन की अनुमति दी जाएगी। शांति समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक तौर पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस खबर के बाद ब्रेंट क्रूड करीब चार प्रतिशत टूटकर लगभग 84 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।
युद्ध के चरम के दौरान कच्चे तेल की कीमतें फरवरी के 70-72 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। इससे पेट्रोल-डीजल उत्पादन लागत बढ़ी। हालांकि, सरकार ने खुदरा कीमतों में संशोधन को मई के मध्य तक टाल दिया था। सरकार ने 27 मार्च को पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क 10 रुपये प्रति लीटर घटाया था। ताकि महत्वपूर्ण राज्यों में चुनाव के दौरान खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी से बचा जा सके।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उछाल
पश्चिम बंगाल समेत पांच अहम राज्यों में चुनाव के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 7.50 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई। जबकि CNG छह रुपये प्रति किलोग्राम और एलपीजी 14.2 किलोग्राम सिलेंडर पर 89 रुपये महंगी हुई।
इसके बावजूद, खुदरा कीमतें लागत से कम रहने के कारण सरकारी तेल कंपनियों को अभी भी लगभग 650 करोड़ रुपये प्रतिदिन का नुकसान हो रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, तेल कीमतों में नरमी और जलडमरूमध्य के खुलने से यह नुकसान धीरे-धीरे कम हो सकता है।
एक्सपर्ट के अनुसार, यदि यह समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है तो भारत के आयात की लागत पर दबाव कम होगा। महंगाई कंट्रोल होगी और व्यापार के लिए अनुकूल माहौल बनेगा।
भारत के निर्यात को बढ़ावा और रुपये को सहारा मिलने की उम्मीद
होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के समझौते से भारत की अर्थव्यवस्था को कई मोर्चों पर राहत मिलने की उम्मीद है। निर्यातकों और विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से पश्चिम एशिया को होने वाले भारत के निर्यात में तेजी आएगी, मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों को गति मिलेगी और रुपये को स्थिरता मिलेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है तो भारत के आयात की लागत पर दबाव कम होगा। महंगाई कंट्रोल होगी और व्यापार के लिए अनुकूल माहौल बनेगा। शांति समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक तौर पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।
अमेरिका और ईरान के बीच चार महीने से जारी युद्ध समाप्त करने के लिए शांति समझौता हो गया है। इस संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित हुई, कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं। इसके चलते पूरा पश्चिम एशिया व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष के कगार पर आ गया था। होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने से ऊर्जा बाजार स्थिर होंगे। तेल-गैस की कीमतों पर दबाव कम होगा। रुपये को मजबूती मिलेगी और आर्थिक वृद्धि के लिए बेहतर माहौल बनेगा।
किसने क्या कहा?
निर्यातक एवं टेक्नोक्राफ्ट इंडस्ट्रीज इंडिया के संस्थापक चेयरमैन शरद कुमार सराफ ने कहा कि इस घोषणा से अनिश्चितता और आर्थिक सुस्ती खत्म होने का रास्ता खुलेगा। वहीं, फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन्स (फियो) के अध्यक्ष एस. सी. राल्हन ने कहा कि क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव कम होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति सामान्य होगी और कीमतें नियंत्रित रहेंगी।
उन्होंने कहा कि इससे भारत की आयात लागत पर दबाव घटेगा, निर्यात सामान्य होंगे, रुपया स्थिर रहेगा और महंगाई संबंधी चिंताएं कम होंगी। विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने से अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में जहाजों की आवाजाही सुचारू होगी। अभी जहाजों को अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप के रास्ते लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा था, जिससे बीमा एवं मालभाड़ा लागत बढ़ गई और आपूर्ति में देरी हो रही है।
अमेरिका-ईरान युद्ध ने पश्चिम एशिया क्षेत्र के साथ भारत के व्यापार को गंभीर रूप से प्रभावित किया। इस क्षेत्र के सभी छह देश संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ओमान, कतर, सऊदी अरब, बहरीन और कुवैत भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदार हैं। यह संघर्ष 28 फरवरी को शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर सैन्य अभियान शुरू किया।
भारत के व्यापारिक साझेदार
होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद का असर भारत के निर्यात पर साफ दिखा। मार्च में देश का निर्यात 7.44 प्रतिशत घटकर 38.92 अरब डॉलर रह गया, जो पांच महीनों की सबसे बड़ी गिरावट है। पश्चिम एशिया क्षेत्र को निर्यात 57.95 प्रतिशत घटकर 3.5 अरब डॉलर रह गया। जबकि सामान्य तौर पर यह करीब छह अरब डॉलर रहता है। इसी अवधि में खाड़ी देशों से आयात भी 51.64 प्रतिशत गिरा।
खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के साथ भारत का कुल व्यापार मिला-जुला रुख दिखाता है। 2024-25 में भारत का निर्यात लगभग एक प्रतिशत बढ़कर 57 अरब डॉलर रहा। जबकि आयात 15.33 प्रतिशत बढ़कर 121.7 अरब डॉलर हो गया।
संयुक्त अरब अमीरात भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा। 2025-26 में निर्यात दो प्रतिशत बढ़कर 37.4 अरब डॉलर और आयात 63.9 अरब डॉलर रहा, जिससे 26.53 अरब डॉलर का व्यापार घाटा हुआ।
सऊदी अरब पांचवां सबसे बड़ा साझेदार रहा। निर्यात 12.55 प्रतिशत घटकर 110.28 अरब डॉलर, जबकि आयात 2.22 प्रतिशत बढ़कर 30.8 अरब डॉलर और व्यापार घाटा 20.5 अरब डॉलर रहा। कतर को निर्यात 3.7 प्रतिशत घटकर 1.62 अरब डॉलर और आयात 1.37 प्रतिशत की गिरावट के साथ 12.3 अरब डॉलर और घाटा 10.7 अरब डॉलर रहा।
ओमान को निर्यात एक प्रतिशत घटकर 4.02 अरब डॉलर और आयात 9.43 प्रतिशत की बढ़त के साथ 7.16 अरब डॉलर और घाटा 3.14 अरब डॉलर रहा। कुवैत को निर्यात 1.65 अरब डॉलर, आयात 7.91 अरब डॉलर और घाटा 6.26 अरब डॉलर रहा। बहरीन को निर्यात 77.9 करोड़ डॉलर, आयात 88.77 करोड़ डॉलर और घाटा 10.87 करोड़ डॉलर रहा।
भारत क्या करता है निर्यात?
भारत के प्रमुख निर्यात में इंजीनियरिंग सामान, रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद, खाद्य एवं कृषि उत्पाद, चावल, मांस, समुद्री उत्पाद, रत्न एवं आभूषण, रसायन, दवाएं, वस्त्र तथा मशीनरी शामिल हैं। वहीं, आयात में कच्चा तेल, एलएनजी, एलपीजी, पेट्रोरसायन, उर्वरक, प्लास्टिक, एल्यूमीनियम और अन्य खनिज ईंधन प्रमुख हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अब शांति समझौते के बाद स्थिति सामान्य होने पर भारत का इस क्षेत्र के साथ व्यापार फिर से गति पकड़ सकता है।