'फंडिंग गैप, काम में देरी...', एनर्जी सिक्योरिटी के संकट के बीच स्ट्रैटेजिक ऑयल रिजर्व को लेकर संसदीय समिति ने जताई गंभीर चिंता

Strategic Oil Reserves: भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का 88% हिस्सा आयात करता है, ऐसे में युद्ध जैसी स्थिति में सुरक्षित भंडार ही काम आते हैं। भारत के पास विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पादुर में कुल 5.33 मिलियन टन की क्षमता वाले तीन भूमिगत भंडार हैं। फिलहाल इनमें सिर्फ 3.37 मिलियन टन यानी 64% तेल ही भरा है

अपडेटेड Mar 26, 2026 पर 2:48 PM
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वित्त वर्ष 2025 में आवंटित बजट का केवल 45% और वित्त वर्ष 2026 में अब तक मात्र 47% हिस्सा ही खर्च हो पाया है

Strategic Oil Reserves: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग के बीच भारत की 'एनर्जी सिक्योरिटी' को लेकर एक परेशान करने वाली रिपोर्ट सामने आई है। संसद की एक समिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि सरकार ने पिछले दो वर्षों में रणनीतिक कच्चे तेल के भंडार के लिए तय बजट का आधा हिस्सा भी खर्च नहीं किया है। समिति ने चेतावनी दी है कि भारत को वैश्विक मानकों के अनुरूप 90 दिनों का बफर स्टॉक तैयार करने की दिशा में तेजी से काम करना चाहिए।

पैसा होने पर भी धीमे हुआ काम

17 मार्च को पेश हुई संसदीय समिति की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले तीन वित्त वर्षों में बजट आवंटन और वास्तविक खर्च के बीच एक बड़ी खाई दिखी है। वित्त वर्ष 2025 में आवंटित बजट का केवल 45% और वित्त वर्ष 2026 में अब तक मात्र 47% हिस्सा ही खर्च हो पाया है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने इसका कारण सुरक्षाकर्मियों की तैनाती न होना, बिजली और मैनपावर लागत में कमी, स्टाफ की नियुक्ति में देरी और मैंगलोर रिफाइनरी के साथ वेयरहाउसिंग समझौते में हो रही देरी को बताया है।


फिलहाल सिर्फ 9-10 दिन का है बैकअप

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का 88% हिस्सा आयात करता है, ऐसे में युद्ध जैसी स्थिति में सुरक्षित भंडार ही काम आते हैं। भारत के पास विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पादुर में कुल 5.33 मिलियन टन की क्षमता वाले तीन भूमिगत भंडार हैं। फिलहाल इनमें सिर्फ 64% तेल ही भरा है। यह भंडार देश की खपत के हिसाब से मात्र 9-10 दिन के लिए पर्याप्त है। सरकारी रिफाइनरियों के पास मौजूद 65 दिनों के स्टॉक को मिला दें, तो भारत के पास कुल 74-75 दिनों का बैकअप है, जो अंतरराष्ट्रीय मानक (90 दिन) से कम है।

फेज-II प्रोजेक्ट्स की रफ्तार सुस्त

सरकार ने 2021 में दूसरे चरण के तहत दो और भंडार बनाने की मंजूरी दी थी, लेकिन इनका काम अटका हुआ है। ओडिशा के चांदीखोल (4 mt) और कर्नाटक के पादुर (2.5 mt) में नए भंडार बनने हैं। रिपोर्ट के अनुसार, हर साल इन प्रोजेक्ट्स के लिए बजट तो तय किया जाता है, लेकिन बाद में संशोधित अनुमान में इसे भारी कटौती के साथ कम कर दिया जाता है। उदाहरण के लिए, वित्त वर्ष 24 में ₹508 करोड़ का प्रावधान था, जिसे घटाकर ₹40 करोड़ कर दिया गया और खर्च शून्य रहा।

मिडिल ईस्ट युद्ध ने बढ़ाई चिंता

ईरान और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध ने भारत के लिए जोखिम बढ़ा दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा आने से भारत के 50% तेल और 90% एलपीजी आयात पर खतरा मंडरा रहा है। संसदीय पैनल ने मंत्रालय से कहा है कि वे नए स्टोरेज की तलाश करें और फंड का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करें ताकि किसी भी आपात स्थिति में देश की अर्थव्यवस्था न रुके।

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