Gandhi Museum: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के कई पत्रों, पांडुलिपियों और निजी वस्तुओं की नीलामी के कुछ दिन बाद नेशनल गांधी म्यूजियम के डायरेक्टर ए. अन्नामलाई ने कहा कि ऐसी वस्तुएं केवल निजी संपत्ति नहीं हैं। बल्कि भारत की साझा विरासत का हिस्सा हैं। उन्होंने इन वस्तुओं को अपने पास रखने वालों से इन्हें संरक्षण के लिए संस्थान को सौंपने की अपील की है। 19 अगस्त को 'सैफरनार्ट' (Saffronart) की नीलामी में कुल 86 चीजें नीलाम की गईं। इनमें गांधीजी के हाथ से लिखे 688 विचारों का संग्रह भी शामिल था।
'ए थॉट फॉर द डे' शीर्षक वाला यह संग्रह गांधी ने अपने करीबी सहयोगी और स्वतंत्रता सेनानी आनंद टी. हिंगोरानी को करीब दो वर्षों की अवधि में लिखा था। इसे 16.20 करोड़ रुपये में बेचा गया, जो नीलामी में बिके किसी भारतीय ऐतिहासिक दस्तावेज के लिए विश्व रिकॉर्ड है। अन्नामलाई ने शनिवार को जारी एक बयान में इस खबर को बेहद दुखद और पीड़ादायक बताया।
उन्होंने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा, "कुछ दिन पहले महात्मा गांधी द्वारा लिखे गए कुछ पत्रों और उनके इस्तेमाल की गई कुछ वस्तुओं को अंतरराष्ट्रीय नीलामी के लिए रखा गया था। खबरों के अनुसार, इससे मालिक को 16 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मिली। यह बेहद दुखद और पीड़ादायक खबर है।"
कई किताबों में प्रकाशित हो चुके हैं गांधी जी के लेटर
नेशनल गांधी म्यूजियम के डायरेक्टर ए. अन्नामलाई ने कहा कि गांधी के कई पत्र पहले ही किताबों में प्रकाशित हो चुके हैं। लेकिन मूल पत्रों और उनके हस्तलिखित दस्तावेजों का संरक्षण करना हमारी ऐतिहासिक जिम्मेदारी है। करीब दो साल की अवधि में उनके करीबी सहयोगी और स्वतंत्रता सेनानी आनंद टी. हिंगोरानी को लिखे गए इस संग्रह को 16.20 करोड़ रुपये में बेचा गया। यह नीलामी में बिकने वाले किसी भारतीय ऐतिहासिक दस्तावेज के लिए एक विश्व रिकॉर्ड है।
शनिवार को जारी एक बयान में अन्नामलाई ने इस खबर को बेहद दुखद और पीड़ादायक बताया। उन्होंने कहा, "कुछ दिन पहले महात्मा गांधी के लिखे कुछ पत्र और उनके इस्तेमाल की कुछ चीजें अंतरराष्ट्रीय नीलामी के लिए रखी गई थीं। खबर है कि नीलामी से मालिक को 16 करोड़ रुपये से अधिक मिले। यह बेहद दुखद और पीड़ादायक खबर है।"
गांधी म्यूज़ियम के डायरेक्टर ने कहा कि भले ही गांधीजी के कई पत्र पहले ही किताबों में छप चुके हैं। किन असली पत्रों और उनके हाथ से लिखी पांडुलिपियों को सुरक्षित रखना हमारी ऐतिहासिक ज़िम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि आज जिनके पास ऐसे पत्र और सामान हैं, वे मूल मालिकों की तीसरी या चौथी पीढ़ी के लोग हैं। शायद उनके ऐतिहासिक महत्व को पूरी तरह नहीं समझते हैं।
गांधीजी के सामान वापस करने की मांग
अन्नामलाई ने उन सभी लोगों से अपील की है (जिनके पास गांधीजी के पत्र, हाथ से लिखी पांडुलिपियां या उनके इस्तेमाल की गई चीजें हैं) कि वे उन्हें बेचें या नीलाम न करें। बल्कि आगे आएं और उन्हें दिल्ली के नेशनल गांधी म्यूजियम को सौंप दें, ताकि हमारी राष्ट्रीय धरोहर की ये कीमती चीजें आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखी जा सकें।
'गांधी: फ्रॉम द कलेक्शन ऑफ आनंद टी हिंगोरानी' नाम की इस नीलामी में गांधीजी से जुड़ी 86 चीजें शामिल थीं। नीलाम करने वाली संस्था के अनुसार, सबसे ज्यादा कीमत पर बिकी पांडुलिपि में सत्य, अहिंसा, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह, निर्भयता, धार्मिक समानता, अस्पृश्यता निवारण, प्रार्थना, रामनाम, सेवा, श्रम, भूख, कर्तव्य, स्वराज, नैतिक जिम्मेदारी, मौन, अंतरात्मा की आवाज़, अनासक्ति और ईश्वर की खोज जैसे विषयों पर बात की गई है।
अन्य चीजों में ईश्वर और भगवद गीता पर गांधीजी के विचारों से जुड़ी तीन पांडुलिपियों और पत्रों का एक सेट शामिल था। इसका शीर्षक "मैसेज ऑन गॉड" (ईश्वर पर संदेश) था। यह 1.68 करोड़ रुपये में बिका।
नीलामी में शामिल निजी चीजों में गांधीजी का 'पेटी चरखा' (बॉक्स वाला चरखा) और सूत कातने के आध्यात्मिक अनुशासन पर लिखे दो पत्र भी शामिल थे। इनकी अनुमानित कीमत 50-70 लाख रुपये थी। यह 1.02 करोड़ रुपये में बिका।
गांधीजी की लिखते हुए एक हस्ताक्षरित तस्वीर 78 लाख रुपये में बिकी और आर्थिक आजादी पर गांधीजी के पत्रों, टेलीग्राम और पोस्टकार्ड का एक सेट 57.60 लाख रुपये में बिका। हिंगोरानी परिवार द्वारा पीढ़ियों से सहेजकर रखे गए इस संग्रह से हिंगोरानी के साथ गांधीजी के लंबे समय के रिश्ते के जरिए उनके बारे में एक निजी नजरिया मिलता है। हालांकि खरीदार की पहचान उजागर नहीं की गई है।