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₹16 करोड़ में बिकी गांधीजी की पांडुलिपि फिर नेशनल गांधी म्यूजियम ने की ना बेचने की अपील, कहा- यह निजी संपत्ति नहीं, देश की धरोहर

Gandhi Museum: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के कई लेटर, पांडुलिपियां और निजी सामान नीलाम होने के कुछ दिनों बाद नेशनल इ ए. अन्नामलाई ने कहा कि ऐसी चीजें सिर्फ़ निजी संपत्ति नहीं हैं। बल्कि यह भारत की साझा विरासत का हिस्सा हैं। उन्होंने ऐसी चीजें रखने वालों से अपील की है कि वे इन्हें सुरक्षित रखने के लिए संस्थान को सौंप दें

Akhilesh Nath Tripathiअपडेटेड Aug 23, 2026 पर 12:05 PM
₹16 करोड़ में बिकी गांधीजी की पांडुलिपि फिर नेशनल गांधी म्यूजियम ने की ना बेचने की अपील, कहा- यह निजी संपत्ति नहीं, देश की धरोहर
Gandhi Museum: नेशनल गांधी म्यूजियम ने कहा है कि गांधीजी की पांडुलिपि निजी संपत्ति नहीं, बल्कि देश की धरोहर है

Gandhi Museum: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के कई पत्रों, पांडुलिपियों और निजी वस्तुओं की नीलामी के कुछ दिन बाद नेशनल गांधी म्यूजियम के डायरेक्टर ए. अन्नामलाई ने कहा कि ऐसी वस्तुएं केवल निजी संपत्ति नहीं हैं। बल्कि भारत की साझा विरासत का हिस्सा हैं। उन्होंने इन वस्तुओं को अपने पास रखने वालों से इन्हें संरक्षण के लिए संस्थान को सौंपने की अपील की है। 19 अगस्त को 'सैफरनार्ट' (Saffronart) की नीलामी में कुल 86 चीजें नीलाम की गईं। इनमें गांधीजी के हाथ से लिखे 688 विचारों का संग्रह भी शामिल था।

'ए थॉट फॉर द डे' शीर्षक वाला यह संग्रह गांधी ने अपने करीबी सहयोगी और स्वतंत्रता सेनानी आनंद टी. हिंगोरानी को करीब दो वर्षों की अवधि में लिखा था। इसे 16.20 करोड़ रुपये में बेचा गया, जो नीलामी में बिके किसी भारतीय ऐतिहासिक दस्तावेज के लिए विश्व रिकॉर्ड है। अन्नामलाई ने शनिवार को जारी एक बयान में इस खबर को बेहद दुखद और पीड़ादायक बताया।

उन्होंने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा, "कुछ दिन पहले महात्मा गांधी द्वारा लिखे गए कुछ पत्रों और उनके इस्तेमाल की गई कुछ वस्तुओं को अंतरराष्ट्रीय नीलामी के लिए रखा गया था। खबरों के अनुसार, इससे मालिक को 16 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मिली। यह बेहद दुखद और पीड़ादायक खबर है।"

कई किताबों में प्रकाशित हो चुके हैं गांधी जी के लेटर

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