Ganga Expressway impact: 28 अप्रैल को यूपी को मिल रहा नया 'गंगा एक्सप्रेसवे', इन 12 जिलों की इकॉनमी अब दौड़ेगी

Ganga Expressway impact: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तर प्रदेश के मेरठ से प्रयागराज के बीच बनाए गए गंगा एक्सप्रेसवे को हरदोई में आयोजित कार्यक्रम के दौरान देशवासियों को समर्पित करेंगे। राज्य सरकार द्वारा जारी बयान के अनुसार, इस परियोजना को एक्सप्रेसवे सह औद्योगिक गलियारा मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है

अपडेटेड Apr 27, 2026 पर 12:16 PM
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Ganga Expressway impact: पीएम नरेंद्र मोदी 28-29 अप्रैल को यूपी के दौरे पर रहेंगे

Ganga Expressway impact News: उत्तर प्रदेश अब 'एक्सप्रेसवे प्रदेश' के रूप में अपनी पहचान को और मजबूत करने जा रहा है। यूपी को एक नया एक्सप्रेसवे मिलने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 अप्रैल को हरदोई में 594 किलोमीटर लंबे 'गंगा एक्सप्रेसवे' को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। यह ग्रीनफील्ड कॉरिडोर पश्चिमी यूपी को पूर्वी यूपी से एक निर्बाध हाई-स्पीड लिंक के जरिए जोड़ देगा।

इन 12 जिलों की तरक्की को मिलेगा पुश

'गंगा एक्सप्रेसवे' यूपी के 12 महत्वपूर्ण जिलों को कवर करता है। इसका लाभ सीधे तौर पर इन जिलों को मिलेगा:-


मेरठ, बुलंदशहर, हापुड़, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज।

गंगा एक्सप्रेसवे की ये 5 खूबियां भी जान लीजिए

1- दूरी हुई आधी: मेरठ से प्रयागराज के बीच यात्रा का समय जो अभी 10-12 घंटे लगता है, वह घटकर मात्र 6 घंटे रह जाएगा।

2- भविष्य में 8 लेन: फिलहाल यह 6-लेन का है। लेकिन इसे भविष्य में 8-लेन तक विस्तारित करने की सुविधा दी गई है।

3- रणनीतिक महत्व: शाहजहांपुर जिले में 3.5 किलोमीटर लंबी हवाई पट्टी (Airstrip) बनाई गई है। आपात स्थिति में यहां वायुसेना के लड़ाकू विमान लैंड कर सकेंगे, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम है।

4- औद्योगिक गलियारा: एक्सप्रेसवे के किनारे लगभग 2,635 हेक्टेयर क्षेत्र में एकीकृत विनिर्माण (Manufacturing) और लॉजिस्टिक कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे।

5- लागत: इस विशाल परियोजना के निर्माण में लगभग 36,230 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।

गंगा एक्सप्रेसवे सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि एक 'इकोनॉमिक कॉरिडोर' है। बेहतर कनेक्टिविटी से स्थानीय किसानों को दिल्ली, लखनऊ और प्रयागराज जैसे बड़े शहरी बाजारों तक सीधी पहुंच मिलेगी। इससे उनकी आय में वृद्धि होगी।

एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित होने वाले औद्योगिक क्लस्टर्स से पूरे क्षेत्र में लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। लॉजिस्टिक लागत कम होने से उद्योगों को निवेश के लिए बढ़ावा मिलेगा और विनिर्माण के क्षेत्र में यूपी की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।

यूपी के एक्सप्रेसवे नेटवर्क की रीढ़ की हड्डी

गंगा एक्सप्रेसवे राज्य के मौजूदा नेटवर्क के लिए बैकबोन का काम करेगा। यह आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, जेवर लिंक एक्सप्रेसवे और फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे जैसे अन्य कॉरिडोर से जुड़ा होगा। इसे मेरठ से हरिद्वार तक विस्तार देने की भी योजना है। ऐसा होने पर उत्तर प्रदेश में उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक एक हाई-स्पीड रोड ग्रिड तैयार हो जाएगा।

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