पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और तेल संकट की आशंका के बीच केंद्र सरकार अब खुद खर्च और ईंधन बचाने की तैयारी में जुट गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोगों से खर्चे कम करने और पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील के कुछ दिन बाद सरकार अब मंत्रालयों में भी “किफायत अभियान” शुरू करने जा रही है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्र सरकार ने मंत्रालयों से ऐसे प्लान मांगे हैं, जिनसे ईंधन की खपत कम की जा सके। इसके तहत गैर-जरूरी यात्राओं पर रोक, ज्यादा से ज्यादा वर्चुअल मीटिंग, पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल और वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।
सरकार चाहती है कि पहले सरकारी विभाग खुद ये कदम अपनाएं ताकि आम लोग भी इससे प्रेरित हों। बताया जा रहा है कि बड़े सरकारी कार्यक्रम, भोज और ज्यादा गैस खर्च वाले आयोजनों को भी छोटा किया जा सकता है।
इसके अलावा कारपूलिंग बढ़ाने, बेवजह सरकारी गाड़ियों के इस्तेमाल को कम करने और प्राइवेट कंपनियों में भी हाइब्रिड या रिमोट वर्क को बढ़ावा देने पर चर्चा चल रही है। अगर हालात और बिगड़ते हैं तो बड़े समारोह और शादियों पर भी कुछ सीमाएं लगाने पर विचार हो सकता है।
इसी बीच मध्य प्रदेश में बीजेपी नेताओं के बड़े काफिले को लेकर विवाद भी खड़ा हो गया। पीएम मोदी की ईंधन बचाने की अपील के बावजूद बीजेपी नेता सौभाग्य सिंह ठाकुर कई गाड़ियों के काफिले के साथ भोपाल पहुंचे थे, जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। विपक्ष ने इसे लेकर बीजेपी पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया।
प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में लोगों से पेट्रोल-डीजल कम इस्तेमाल करने, सोने की खरीद सीमित रखने, विदेश यात्राएं कम करने और स्वदेशी चीजों को बढ़ावा देने की अपील की थी। विपक्ष ने इन बातों को सरकार की नाकामी का संकेत बताया है।