Gita Gopinath: अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री और हार्वर्ड प्रोफेसर गीता गोपीनाथ ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में भारत को एक कड़ा संदेश दिया है। उनका मानना है कि अमेरिकी टैरिफ या वैश्विक व्यापार युद्ध की तुलना में प्रदूषण भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बहुत बड़ा और 'खामोश' खतरा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर भारत को अपनी आर्थिक रफ्तार बरकरार रखनी है, तो प्रदूषण को 'युद्ध स्तर' पर खत्म करना होगा।
आर्थिक विकास का 'साइलेंट किलर' है प्रदूषण
गीता गोपीनाथ के अनुसार, प्रदूषण केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं है, बल्कि इसके गहरे आर्थिक परिणाम है। खराब हवा के कारण लोगों की कार्यक्षमता घट रही है और बीमारियों की वजह से वर्किंग डेज का नुकसान हो रहा है। वायु प्रदूषण से भारत में हर साल लगभग 17 लाख मौतें होती है जो कुल मौतों का 18% है। स्वास्थ्य पर होने वाला यह विशाल खर्च जीडीपी को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। गोपीनाथ ने चेतावनी दी कि कोई भी विदेशी निवेशक भारत में ऑपरेशंस शुरू करने से पहले वहां के वातावरण और रहने की स्थिति को देखता है। अगर हवा जहरीली रही, तो प्रतिभा और पैसा दोनों बाहर जा सकते हैं।
वर्तमान में अमेरिकी टैरिफ चर्चा का केंद्र बना हुआ है, लेकिन वे बाहरी और अस्थायी हो सकते हैं। जबकि प्रदूषण एक आंतरिक और स्थायी चुनौती है। गोपीनाथ के अनुसार, 'प्रदूषण का असर किसी भी टैरिफ से कहीं अधिक परिणामी और गंभीर है।'
प्रदूषण के खिलाफ- 'एक राष्ट्रीय मिशन की जरूरत'
गीता गोपीनाथ कहा कि, प्रदूषण से निपटने के लिए इसे शीर्ष राष्ट्रीय प्राथमिकता का विषय बनाना होगा। देश के बड़े शहरों में बुनियादी ढांचे के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन पर काम करना होगा। इसके साथ ही केवल तात्कालिक समाधान के बजाय स्थायी समाधान खोजना होगा जो लंबे समय तक चले और टिकाऊ रहे।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख
गीता गोपीनाथ के बयान के बीच ही भारत में सुप्रीम कोर्ट ने भी कड़ा रुख अपनाया है। बुधवार को कोर्ट ने केंद्र सरकार के साथ-साथ दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सरकारों को निर्देश दिया कि वे वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) द्वारा प्रस्तावित दीर्घकालिक उपायों को लागू करने के लिए ठोस एक्शन प्लान पेश करें।