डिजिटल प्लैटफॉर्म के रेवेन्यू शेयरिंग पर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने साफ कहा कि डिजिटल प्लैटफॉर्म्स को अपने रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल को बदलना होगा और कंटेंट बनाने वालों को न्यायसंगत हिस्सा देना होगा। उनका कहना है कि न्यूज पब्लिशर्स,स्वतंत्र पत्रकार,दूरदराज के क्रिएटर्स,प्रोफेसर और रिसर्चर सभी की मेहनत से प्लैटफॉर्म की कमाई होती है। इसलिए कमाई का सही बंटवारा जरूरी है। अगर प्लैटफॉर्म खुद से अपनी नीतियों में सुधार नहीं करते,तो सरकार कानूनी ढांचा बनाकर इसे सुनिश्चित करने का रास्ता अपना सकती है।
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि डिजिटल प्लैटफॉर्म्स को रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल बदलना होगा। सोशल मीडिया कंपनियां कंटेंट क्रिएटर के साथ रेवेन्यू शेयर करें। न्यूज बनाने वाले और कन्वेंशनल मीडिया को भी फायदा मिलना चाहिए। दूरदराज इलाके में बैठे क्रिएटर भी कमाई होनी चाहिए। प्रोफेसर और रिसर्चर्स को भी फायदा मिलना चाहिए। कमाई का सही हिस्सा असली कंटेंट बनाने वालों तक पहुंचना चाहिए। इन प्लेटफॉर्म को व्यक्तियों और संस्थाओं द्वारा अपलोड किए गए कंटेंट से बड़ा आर्थिक लाभ मिलता है, इसलिए क्रिएटर्स को भी उनका न्यायसंगत हिस्सा मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजस्व वितरण में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने से भारत की डिजिटल कंटेंट अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
कानूनी रास्ता अपनाने का विकल्प है खुला
उन्होंने आगे कहा कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो कानूनी रास्ता अपनाएंगे। केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने डीप फेक कंटेंट को लेकर भी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि डीप फेक और सिंथेटिक कंटेंट का गलत इस्तेमाल हो रहा है। इससे बच्चों और नागरिकों को सुरक्षित रखना होगा। सभी प्लैटफार्म को इसकी जिम्मेदारी लेनी होगी।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब सरकार डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए नियमों को सख्त कर रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने आईटी (मध्यस्थ दिशा-निर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है, जिसका उद्देश्य डीपफेक और एआई से तैयार भ्रामक सामग्री के खतरे से निपटना है।