Govt Schemes: वित्त वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीनों में सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं पर खर्च की रफ्तार बेहद धीमी रही है। एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार ने अपनी 53 सबसे बड़ी योजनाओं के लिए आवंटित कुल बजट का मात्र 41.2 प्रतिशत हिस्सा ही अब तक जारी किया है। विश्लेषण से पता चलता है कि 500 करोड़ रुपये से अधिक के बजट वाली इन योजनाओं में से अधिकतर के आवंटन में भारी कटौती की गई है। आशंका जताई जा रही है कि मार्च में वित्त वर्ष खत्म होने तक इन योजनाओं का कुल खर्च शुरुआती बजट के 75 प्रतिशत के आंकड़े को भी पार नहीं कर पाएगा।
प्रमुख योजनाओं के बजट में की जा रही भारी कटौती
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, विश्लेषण की गई 53 योजनाओं में से 47 के बजट को संशोधित कर कम कर दिया गया है। मूल बजट अनुमान जो 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक था, उसे घटाकर अब 3.8 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है। सबसे चौंकाने वाली कटौती प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) में देखी गई, जहां बजट 850 करोड़ रुपये से घटाकर मात्र 150 करोड़ रुपये कर दिया गया है। केवल मनरेगा (MGNREGS) और अनुसूचित जनजातियों के लिए पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप जैसी तीन योजनाओं में ही मूल बजट से अधिक खर्च दर्ज किया गया है।
जल जीवन मिशन और पीएम आवास योजना जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर असर
हाई-वैल्यू योजनाओं में फंड जारी करने की स्थिति और भी चिंताजनक है। जल जीवन मिशन, जिसके लिए 67,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट रखा गया था, उसमें पहले नौ महीनों में केवल 31 करोड़ रुपये ही जारी किए गए। इसी तरह 'पीएम श्री स्कूल' (PM SHRI) योजना के 7,500 करोड़ रुपये के बजट में से केवल 473 करोड़ रुपये और 'प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना' के 2,140 करोड़ रुपये में से मात्र 40 करोड़ रुपये खर्च हुए है। पीएम ई-बस सेवा और प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स में भी फंड रिलीज मूल बजट के 10 प्रतिशत से भी कम रहा है।
क्या है इस सुस्ती के पीछे की वजह?
इनमें से अधिकांश योजनाएं राज्य सरकारों के साथ मिलकर चलाई जाती हैं, जहां केंद्र और राज्य एक निर्धारित फॉर्मूले के तहत पैसा साझा करते है। विशेषज्ञों का मानना है कि फंड रिलीज में इस देरी के पीछे संशोधित आवंटन में कटौती, राज्यों की ओर से फंड के उपयोग की धीमी गति और तकनीकी प्रक्रियाएं मुख्य कारण हो सकती है। चूंकि वित्त वर्ष के आखिरी तीन महीनों में खर्च का दबाव बढ़ता है, लेकिन मौजूदा आंकड़ों को देखते हुए यह स्पष्ट है कि इस साल कई महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा और सामाजिक कल्याण की योजनाओं के लक्ष्यों को पूरा करना एक बड़ी चुनौती होगी।