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Harish Rana Euthanasia: अरुणा शानबाग से हरीश राणा तक: कैसे खुला ‘Right to Die’ का रास्ता?

सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस जे बी परदीवाला और जस्टिस के वी विश्वनाथन शामिल थे, ने निर्देश दिया कि राणा को ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) में पैलियेटिव केयर में भर्ती किया जाए। कोर्ट ने कहा कि उनकी लाइव सेवर मशीनों को हटाने की प्रक्रिया एक तय मेडिकल योजना के तहत की जाए, ताकि उनकी गरिमा बनी रहे

Shubham Sharmaअपडेटेड Mar 11, 2026 पर 4:52 PM
Harish Rana Euthanasia: अरुणा शानबाग से हरीश राणा तक: कैसे खुला ‘Right to Die’ का रास्ता?
Harish Rana Euthanasia: अरुणा शानबाग से हरीश राणा तक: कैसे खुला ‘Right to Die’ का रास्ता?

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक अहम फैसला सुनाते हुए 12 साल से ज्यादा समय से कोमा में पड़े 32 साल के युवक के लिए पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दे दी। कोर्ट ने आदेश दिया कि मरीज को दी जा रही आर्टिफिशियल लाइफ सेवर सिस्टम धीरे-धीरे वापस ली जा सकती है, ताकि उसकी मौत प्राकृतिक रूप से हो सके और उसकी गरिमा बनी रहे।

क्या है हरीश राणा केस?

हरीश राणा, जो गाजियाबाद के रहने वाले हैं, 2013 में एक इमारत की चौथी मंजिल से गिर गए थे। इस हादसे में उनके सिर में गंभीर चोट आई और तब से वे लगातार कोमा में हैं।

सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस जे बी परदीवाला और जस्टिस के वी विश्वनाथन शामिल थे, ने निर्देश दिया कि राणा को ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) में पैलियेटिव केयर में भर्ती किया जाए।

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