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कहर बन रही हीटवेव! मजदूर, बुजुर्ग और बच्चों को ज्यादा खतरा, निपटने के लिए कितना तैयार है भारत?

भारत में हीटवेव अब गंभीर स्वास्थ्य संकट बनती जा रही है। तापमान में तेज बढ़ोतरी, कमजोर इन्फ्रास्ट्रक्चर और असमानता खतरे को बढ़ा रहे हैं। जानिए हीटवेव का असर, सबसे ज्यादा जोखिम में कौन और इससे निपटने की तैयारी कितनी है।

Suneel Kumarअपडेटेड Apr 21, 2026 पर 10:59 PM
कहर बन रही हीटवेव! मजदूर, बुजुर्ग और बच्चों को ज्यादा खतरा, निपटने के लिए कितना तैयार है भारत?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि तापमान में 4 से 7 डिग्री की अचानक वृद्धि अब 'न्यू नॉर्मल' बन गई है।

गर्मी अब सिर्फ पसीना बहाने वाली चीज नहीं रही, यह धीरे-धीरे जानलेवा मुसीबत बनती जा रही है। पहले हीटवेव यानी लू को लोग मौसम का हिस्सा मानकर सह लेते थे। लेकिन, अब हालात ऐसे हो गए हैं कि यह सीधे सेहत पर हमला कर रही है। गांव हो या शहर, हर जगह भीषण गर्मी का असर दिख रहा है।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि तापमान में 4 से 7 डिग्री की अचानक वृद्धि अब 'न्यू नॉर्मल' बन गई है। मार्च 2026 दिल्ली के इतिहास के सबसे गर्म दशकों में से एक रहा है और अब अप्रैल भी उसी राह पर है। यह स्थिति जलवायु संकट (Climate Crisis) का सीधा सबूत है। इसमें मौसम एक चरम यानी बेमौसम बारिश से दूसरे चरम यानी भीषण गर्मी की ओर बहुत तेजी से बदल रहा है।

ऐसे में सवाल है कि क्या भारत इस बढ़ती आफत से निपटने के लिए सच में तैयार है? इसका जवाब जानने से पहले हीटवेव के बारे में जान लेते हैं।

हीटवेव क्या होती है

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