यूपी में लड़कियों को स्कूल में हिजाब पहनकर आने की अनुमति नहीं; इलाहाबाद HC ने खारिज की मुस्लिम छात्रा की याचिका

Hijab in Islam: इलाहाबाद हाईकोर्ट की बेंच ने स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हिजाब (हेड स्कार्फ) पहनकर प्रवेश की अनुमति मांगने वाली छात्रा की याचिका को खारिज कर दिया है। हाई कोर्ट ने कमेंट किया है कि दूसरी हाई कोर्ट्स की भी यही राय रही है कि हिजाब पहनना इस्लामिक आस्था का अनिवार्य हिस्सा नहीं है

अपडेटेड Aug 25, 2026 पर 10:45 AM
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Hijab in Islam: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्कूल में हिजाब पहनने की अनुमति से संबंधित याचिका खारिज कर दी

Hijab in Islam: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्कूल में स्कार्फ या हिजाब पहनने की अनुमति देने का स्कूल अधिकारियों को निर्देश जारी करने के अनुरोध वाली याचिका खारिज कर दी है। प्रयागराज के अतरसुइया थाना अंतर्गत टैगोर पब्लिक स्कूल की छात्रा सुकैना रिजवी ने अपनी मां के जरिए यह याचिका दायर की थी। रिजवी ने इस स्कूल से 10वीं की परीक्षा पास की है। वह इसी स्कूल में 11वीं कक्षा में एडमिशन ले रही है। अदालत ने कहा कि दूसरी हाई कोर्ट्स की भी यही राय रही है कि हिजाब पहनना इस्लामिक आस्था का अनिवार्य हिस्सा नहीं है।

जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ल की पीठ ने कहा, "हमने याचिकाकर्ता से जुड़ी विभिन्न कक्षाओं की तस्वीरें देखी हैं और केवल उसे छोड़कर किसी भी छात्रा ने हिजाब नहीं पहना है। यहां तक कि जिस धार्मिक समुदाय से वह आती है, उस समुदाय की छात्राओं ने भी हिजाब नहीं पहना है।"

अदालत ने कहा, "जब कभी भी यह मुद्दा उठा है, उच्च न्यायालयों का एकमत रहा है कि हिजाब पहनना इस्लामिक आस्था का आवश्यक हिस्सा नहीं है। एक महिला के हिजाब नहीं पहनने से आस्था खतरे में नहीं पड़ जाएगी।" हाई कोर्ट ने 21 अगस्त को दिए अपने फैसले में कहा, "यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि याचिका में यह दावा कि हिजाब पहनना एक जरूरी धार्मिक प्रथा है, केवल एक दावा भर है।"


स्टूडेंट ने स्कूल प्रशासन से यूनिफॉर्म के अलावा सिर पर स्कार्फ पहनने की इजाजत देने की मांग की थी। याचिका में कहा गया था कि सिर पर स्कार्फ पहनना इस्लामिक परंपरा का एक जरूरी हिस्सा है। छात्रा उसी स्कूल में छठी कक्षा से ही इसे पहनती आ रही हैं।

'हेडस्कार्फ पहनना इस्लाम की जरूरी प्रथा नहीं'

हाई कोर्ट ने इस दलील को भी खारिज कर दिया कि हेडस्कार्फ पहनना इस्लाम की एक जरूरी प्रथा है। कोर्ट ने आगे कहा, "जहां भी यह मुद्दा उठा है, हाई कोर्ट्स की राय एक रही है कि महिलाओं के लिए हेडस्कार्फ पहनना इस्लामी आस्था का कोई जरूरी हिस्सा नहीं है, जिसके बिना आस्था खतरे में पड़ जाएगी।" अपने फैसले में कोर्ट ने यह भी कहा, "यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि रिट याचिका में यह दावा कि हेडस्कार्फ पहनना एक जरूरी धार्मिक प्रथा है, महज एक दावा भर है।"

कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि जब तक किसी स्कूल का यूनिफॉर्म कोड निष्पक्ष और बिना भेदभाव का है। उसे संस्थान में अनुशासन और समानता बनाए रखने के लिए लागू किया गया है, तब तक संस्थान को अपने आंतरिक अनुशासन और ड्रेस कोड को लागू करने की पूरी आजादी है।

हाई कोर्ट ने कहा कि किसी भी बिना सरकारी मदद वाले प्राइवेट शिक्षण संस्थान को अपने परिसर में एक जैसा ड्रेस कोड लागू करने का पूरा अधिकार है। कोर्ट ने माना कि तय स्कूल यूनिफॉर्म का पालन करना जरूरी है। साथ ही व्यक्तिगत आधार पर उसमें हेडस्कार्फ जोड़ने की अनुमति मांगने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।

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कोर्ट ने साफ किया कि अगर यूनिफॉर्म सभी छात्रों पर समान रूप से लागू होती है। व्यक्तिगत छात्रों को अपनी पसंद के आधार पर तय यूनिफ़ॉर्म में बदलाव करने या उसे न पहनने की अनुमति देने से यूनिफॉर्म का मूल मकसद ही खत्म हो जाएगा। इससे स्कूल के अनुशासन को तय करने का अधिकार संस्थान के हाथ से निकलकर व्यक्तिगत छात्रों के हाथ में चला जाएगा।

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