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ज्ञानवापी, श्रीकृष्ण जन्मभूमि और संभल...हिंदू-मुस्लिम पक्ष ने क्यों ठुकराया सुप्रीम कोर्ट का ये प्रस्ताव?

सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने ज्ञानवापी, श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह और संभल की शाही जामा मस्जिद विवाद से जुड़े सभी पक्षों को पत्र भेजकर इस पहल में शामिल होने का निमंत्रण दिया था। अप्रैल में शुरू की गई इस पहल का मकसद आपसी सहमति से विवादों का स्वैच्छिक समाधान कराना है। इसके लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन, दोनों तरह से पंजीकरण की सुविधा दी गई है

Edited By: Rajat Kumarअपडेटेड Jul 14, 2026 पर 9:09 AM
ज्ञानवापी, श्रीकृष्ण जन्मभूमि और संभल...हिंदू-मुस्लिम पक्ष ने क्यों ठुकराया सुप्रीम कोर्ट का ये प्रस्ताव?
हिंदू और मुस्लिम पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट के मीडिएशन (आपसी बातचीत) के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है।

उत्तर प्रदेश के मंदिर-मस्जिद से जुड़े तीन बड़े विवादों में हिंदू और मुस्लिम पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट के मीडिएशन (आपसी बातचीत) के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है। दोनों पक्षों का कहना है कि इन मामलों का फैसला अदालत में कानूनी प्रक्रिया के तहत ही होना चाहिए। इन मामलों में वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद, मथुरा का श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद और संभल की शाही जामा मस्जिद से जुड़े मामले शामिल हैं।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सभी पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट को बता दिया है कि वे मीडिएशन की प्रक्रिया में शामिल नहीं होंगे। उनका मानना है कि इतने महत्वपूर्ण मामलों का समाधान केवल कानून और अदालत के फैसले के आधार पर ही होना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने मीडिएशन का सुझाव क्यों दिया?

सुप्रीम कोर्ट ने यह प्रस्ताव अपनी विशेष पहल "समाधान समारोह 2026" के तहत दिया था। इस पहल का उद्देश्य अदालतों में लंबे समय से लंबित मामलों को आपसी बातचीत और सहमति से सुलझाने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करना है। इस कार्यक्रम के तहत 21 से 23 अगस्त तक होने वाली विशेष लोक अदालत से पहले संबंधित पक्षों को बातचीत के जरिए समाधान तलाशने का मौका दिया गया था।

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