Chennai Bird Flu: शुक्रवार को चेन्नई के कई इलाकों में सैकड़ों कौवे मृत पाए गए। जांच में इनमें H5N1 वायरस की पुष्टि हुई है, जिससे इलाके में बर्ड फ्लू फैलने का संकेत मिला है। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने लोगों के लिए एक सलाह जारी की है और हालात पर काबू पाने की तैयारी की जा रही है।
अधिकारियों ने निर्देश दिया है कि आगे संक्रमण को रोकने के लिए जैव सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुसार कौवों और मुर्गी-मुर्गियों के सभी शवों को या तो जला दिया जाए या गहराई में दफना दिया जाए।
जनता को मृत पक्षियों को छूने या संभालने के खिलाफ सख्त सलाह दी गई है और उनसे आग्रह किया गया है कि वे किसी भी नए मृत पक्षी के दिखने पर तुरंत स्थानीय अधिकारियों को सूचित करें।
H5N1 इन्फ्लूएंजा A वायरस का एक खतरनाक प्रकार है, जो मुख्य रूप से पक्षियों और खासकर मुर्गी और जंगली पक्षियों को संक्रमित करता है। इसे आमतौर पर 'बर्ड फ्लू' के नाम से जाना जाता है और यह पक्षियों की आबादी में तेजी से फैल सकता है, जिससे अक्सर गंभीर बीमारी और उच्च मृत्यु दर होती है।
हालांकि, H5N1 मुख्य रूप से पक्षियों को प्रभावित करता है, लेकिन यह कभी-कभी मनुष्यों (हालांकि दुर्लभ) और अन्य जानवरों को संक्रमित पक्षियों या दूषित वातावरण के निकट संपर्क के माध्यम से संक्रमित कर सकता है। इंसानों में इसके मामले बहुत कम होते हैं, लेकिन अगर संक्रमण हो जाए तो यह गंभीर हो सकता है। इसी वजह से बर्ड फ्लू के मामलों पर कड़ी निगरानी रखी जाती है और इसके फैलाव को रोकने के लिए सख्त सुरक्षा उपाय अपनाए जाते हैं।
यह कितना खतरनाक हो सकता है?
H5N1 को अत्यधिक खतरनाक माना जाता है, लेकिन मुख्य रूप से कुछ खासर परिस्थितियों में, न कि आम जनता के लिए। पक्षियों में, यह तेजी से फैल सकता है और मुर्गी पालन में भारी प्रकोप पैदा कर सकता है, जिससे मृत्यु दर बहुत अधिक हो जाती है।
मनुष्यों में, संक्रमण दुर्लभ है, लेकिन जब होता है, तो यह गंभीर हो सकता है। अब तक जिन लोगों में H5N1 की पुष्टि हुई है, उनमें से कई को सांस की गंभीर बीमारी, जैसे निमोनिया, हुआ है। पिछले प्रकोपों में देखा गया है कि इससे मरने की दर सामान्य फ्लू की तुलना में काफी ज्यादा रही है। इसलिए इस वायरस को लेकर स्वास्थ्य एजेंसियां बहुत सतर्क रहती हैं।