'ये मैंने नहीं किया, भगवान ने किया है' CJI गवई पर जूता फेंकने वाले वकील राजेश किशोर को नहीं कोई पछतावा

ये घटना चीफ जस्टिस गवई के भगवान विष्णु को लेकर दिए गए बयान के जवाब में हुई। CJI के इस बयान की सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना भी हुई थी। खजुराहो में भगवान विष्णु की 7 फुट ऊंची सिर कटी मूर्ति के पुनर्निर्माण के लिए न्यायिक हस्तक्षेप की मांग करने वाली जनहित याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कथित तौर पर कहा, जाओ और खुद भगवान से ही कुछ करने के लिए कहो

अपडेटेड Oct 07, 2025 पर 2:01 PM
CJI गवई पर जूता फेंकने वाले वकील राजेश किशोर को नहीं कोई पछतावा

सुप्रीम कोर्ट के अंदर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी.आर. गवई पर जूता फेंककर सुर्खियां बटोरने वाले वकील राजेश किशोर ने अब मीडिया के सामने खुलकर कहा कि उन्हें अपनी इस हरकत का कोई पछतावा नहीं है। उन्होंने मुख्य न्यायाधीश पर सनातन धर्म का मजाक उड़ाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा, " ये मैंने नहीं किया, भगवान ने किया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश ने सनातन धर्म का मजाक उड़ाया। यह सर्वशक्तिमान का आदेश था, एक एक्शन की रिएक्शन था।"

ये घटना चीफ जस्टिस गवई के भगवान विष्णु को लेकर दिए गए बयान के जवाब में हुई। CJI के इस बयान की सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना भी हुई थी। खजुराहो में भगवान विष्णु की 7 फुट ऊंची सिर कटी मूर्ति के पुनर्निर्माण के लिए न्यायिक हस्तक्षेप की मांग करने वाली जनहित याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कथित तौर पर कहा, "जाओ और खुद भगवान से ही कुछ करने के लिए कहो।"

उनकी इस टिप्पणी की काफी आलोचना हुई और कई लोगों ने मुख्य न्यायाधीश को भगवान विष्णु के भक्तों की आस्था अनादर करने वाला बताया। मुख्य न्यायाधीश ने बाद में कहा, "किसी ने मुझे बताया कि मैंने जो टिप्पणी की थी, उसे सोशल मीडिया पर एक खास तरीके से पेश किया गया है। मैं सभी धर्मों का सम्मान करता हूं।"


बुधवार को सुनवाई के दौरान एक बुजुर्ग वकील ने चीफ जस्टिस पर जूता फेंका। जूता बेंच के सामने गिरा। मुख्य न्यायाधीश, इस व्यवधान से बेपरवाह सुनवाई करते रहे। उन्होंने कहा, "मैं ऐसी चीजों से प्रभावित होने वाला आखिरी व्यक्ति हूं। कृपया (सुनवाई जारी रखें)।"

जैसे ही किशोर ने जूता फेंका, उसे हिरासत में ले लिया गया, ताकि सुरक्षा एजेंसियां ​​जांच के तहत उससे पूछताछ कर सकें।

बाद में मुख्य न्यायाधीश ने रजिस्ट्री को उस व्यक्ति के खिलाफ कोई कार्रवाई न करने का निर्देश दिया। हालांकि, बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने उसे सस्पेंड कर दिया।

किशोर ने कहा, "बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने सारी हदें पार कर दी हैं। उन्होंने मामले को किसी अनुशासन समिति को भेजे बिना और मेरी बात सुने बिना ही मुझे निलंबित कर दिया।"

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