Jharkhand Politics: कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बुधवार (3 दिसंबर) को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बात की। इसके बाद कहा कि राज्य में 'इंडिया' गठबंधन पूरी तरह से एकजुट और मजबूत है। पिछले कई दिनों से सोशल मीडिया पर लोग यह अटकलें लगा रहे हैं कि सोरेन भारतीय जनता पार्टी (BJP) की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल हो सकते हैं। इसके बाद कांग्रेस नेतृत्व के निर्देश पर केसी वेणुगोपाल ने झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता से बात की है।
वेणुगोपाल ने X पर पोस्ट किया, "आज झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी से बात हुई। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि झारखंड में हमारा 'इंडिया' गठबंधन पूरी तरह से मजबूत एवं एकजुट है। और जन-केंद्रित कल्याणकारी नीतियों को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है जो झारखंड के प्रत्येक नागरिक की आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करता है।"
उन्होंने कहा कि दक्षिणपंथी ट्रोल नेटवर्क का दुष्प्रचार और संगठित अफवाहें उनकी बढ़ती हुई हताशा और राजनीतिक असुरक्षा के संकेत हैं। कांग्रेस महासचिव ने कहा, "हम इस तरह की सस्ती ट्रोलिंग से प्रभावित नहीं होते हैं। लोगों ने हम पर जो भरोसा जताया है, उसे वे कभी कम नहीं कर सकते। हमारी एकता बरकरार है। हमारा उद्देश्य स्पष्ट है। हमारा गठबंधन पहले से कहीं अधिक मजबूत है।"
झारखंड में सत्तारूढ़ 'इंडिया' गठबंधन के सहयोगी दलों झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM), कांग्रेस एवं राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के रिश्तों में तनाव की खबरों तथा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के दिल्ली दौरों के बीच राज्य में राजनीतिक बदलाव की अटकलें तेज हो गई हैं। झारखंड में संभावित सियासी बदलाव की अटकलें तब शुरू हुई थीं, जब झारखंड मुक्ति मोर्चा के दिवंगत नेता शिबु सोरेन के दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती होने के दौरान भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कई वरिष्ठ नेता उनका हालचाल जानने पहुंचे थे।
पार्टी ने कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल पर राजनीतिक साजिश रचने तथा महागठबंधन में शामिल होने के बावजूद उसे सीटों से वंचित रखने का आरोप लगाया था। JMM ने यह भी कहा था कि वह विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' में अपनी भूमिका की समीक्षा करेगी। JMM की इस घोषणा के कुछ हफ्तों बाद झारखंड में सियासी रहस्य गहरा गया है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी के 28 नवंबर को दिल्ली पहुंचने एवं वहां कई दिनों तक रुकने के कारण अटकलें और तेज हो गई। हालांकि, दोनों झारखंड विधानसभा के पांच दिसंबर से शुरू हो रहे शीतकालीन सत्र के मद्देनजर बुधवार शाम रांची लौट आए। कांग्रेस के अलावा JMM ने भी झारखंड में सत्तारूढ़ गठबंधन में तनाव एवं राज्य में संभावित सियासी बदलाव की अटकलों को अफवाह करार देते हुए खारिज किया है।
कांग्रेस की झारखंड इकाई के पूर्व अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने बीजेपी पर राज्य में सियासी बदलाव की अफवाहें फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "(झारखंड में विधानसभा) चुनाव से पहले छह महीने तक सलाखों के पीछे रहे मुख्यमंत्री को शानदार जीत मिली... वह BJP के साथ क्यों जाएंगे?" प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने 'महागठबंधन' में दरार की खबरों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, "महागठबंधन में सब कुछ ठीक है। गठबंधन के सभी सहयोगी एकजुट हैं...यह सरकार अपना कार्यकाल पूरा करेगी।"
सोरेन के दिल्ली दौरे पर कमलेश ने कहा कि यह बकाया केंद्रीय निधि और राज्य के विकास से सिलसिले में था। वहीं, JMM ने कहा कि यह दौरा परिवार में किसी मेडिकल स्थिति के कारण था। जबकि पार्टी सूत्रों ने पीटीआई से कहा कि दिल्ली में मुख्यमंत्री ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जुड़े मामलों के सिलसिले में वकीलों की सलाह भी ली।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि 81 सदस्यीय विधानसभा में सीटों का गणित भी अटकलों को हवा दे रहा है। JMM के पास 34 विधायक हैं। उसे बहुमत के लिए महज 7 और सदस्यों के समर्थन की जरूरत है। कांग्रेस के पास 16 विधायक हैं। ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि सोरेन के नेतृत्व में बीजेपी के समर्थन वाली और कांग्रेस रहित सरकार के गठन के लिए पार्टी के कुछ विधायक पाला बदल सकते हैं।
हालांकि, ऐसे स्थिति में अयोग्यता से बचने के लिए कम से कम 11 कांग्रेस विधायकों को दल बदलने की आवश्यकता होगी। बीजेपी ने अपनी ओर से गठबंधन की किसी भी संभावना से इनकार किया है। पार्टी ने सोरेन सरकार पर भ्रष्टाचार में डूबे रहने का आरोप लगाया है। वरिष्ठ पर्यवेक्षकों का कहना है कि बीजेपी औपचारिक रूप से सत्ता में भागीदार नहीं बनेगी। लेकिन अगर कांग्रेस कमजोर पड़ती है, तो वह JMM को बाहरी समर्थन देने पर विचार कर सकती है।