रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने गुरुवार को 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी दे दी। इससे भारतीय वायुसेना (IAF) की ताकत काफी बढ़ने की उम्मीद है। यह सौदा करीब 3.25 लाख करोड़ रुपए का है। यह मंजूरी फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की इस महीने होने वाली भारत यात्रा से पहले दी गई है।
सूत्रों के मुताबिक, इस योजना को “एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी” (AoN) की मंजूरी मिल गई है। पिछले महीने रक्षा सचिव की अध्यक्षता वाले रक्षा खरीद बोर्ड ने भी इस प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी थी। इससे फ्रांस की कंपनी डसॉल्ट एविएशन के साथ औपचारिक बातचीत आगे बढ़ेगी।
यह भारत के सबसे बड़े लड़ाकू विमान सौदों में से एक है। फिलहाल वायुसेना के पास करीब 29 फाइटर स्क्वाड्रन हैं, जबकि जरूरत 42 स्क्वाड्रन की है। ऐसे में सीमाओं पर बढ़ते खतरों को देखते हुए यह खरीद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
योजना के तहत 18 राफेल विमान सीधे फ्रांस से तैयार हालत में आएंगे। बाकी 96 विमानों को भारत में असेंबल किया जाएगा। करीब 80 प्रतिशत विमान देश में ही बनाए जाने की योजना है। “मेक इन इंडिया” के तहत इसमें 60 प्रतिशत तक स्वदेशी सामग्री इस्तेमाल की जा सकती है।
सूत्रों के अनुसार, वायुसेना को 88 सिंगल-सीट और 26 ट्विन-सीट विमान मिलेंगे। डसॉल्ट एविएशन भारत की निजी कंपनियों के साथ मिलकर निर्माण, असेंबली और रखरखाव का काम कर सकती है। इससे देश में रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।