Contempt Case Against IAS Durga Shakti Nagpal: उत्तर प्रदेश की चर्चित IAS अफसर दुर्गा शक्ति नागपाल एक बार फिर सुर्खियों में हैं। वह अभी देवीपाटन डिवीजन की कमिश्नर हैं। गोंडा में लंबे समय से लंबित नजूल भूमि विवाद की सुनवाई कर रहीं सिविल जज शबीना खान को कथित तौर पर फोन करके प्रभावित करने और दबाव बनाने के मामले में हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। नागपाल पर अब अवमानना का केस चलेगा। सीनियर डिवीजन सिविल जज सबीना खान ने IAS अधिकारी के खिलाफ डिस्ट्रिक्ट जज को चिट्ठी लिखकर गंभीर आरोप लगाया है।
जज को फोन कर कथित रूप से दबाव बनाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने गोंडा की कमिश्नर दुर्गा शक्ति नागपाल के इस कथित कृत्य को न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार बताया है। हाई कोर्ट ने कहा कि अदालतों को ऐसे दबावों से मुक्त रखना जरूरी है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले को आपराधिक अवमानना की कार्यवाही के लिए चीफ जस्टिस को भेज दिया है।
कोर्ट ने कहा, "कमिश्नर अपने पद का गलत इस्तेमाल कर रही हैं। उन्होंने एक पेंडिंग केस को लेकर मुझ पर बेवजह दबाव डाला और हाई कोर्ट में शिकायत करने की धमकी दी। उन्होंने मेरे संस्कारों पर भी सवाल उठाए। इससे मुझे दुख पहुंचा है।" अपनी चिट्ठी में जज ने IAS अफसर के साथ हुई बातचीत का ब्योरा दिया और केस को दूसरी कोर्ट में ट्रांसफर करने की अपील की। उनकी गुजारिश के बाद, केस को सिविल जज (FTC) नवीन, गोंडा सीनियर डिवीज़न की कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया। अगली सुनवाई 24 अगस्त यानी आज होनी है।
महिला जज ने IAS अफसर पर दबाव बनाने का आरोप लगाया
'दैनिक भास्कर' की रिपोर्ट के मुताबिक, यह पूरा मामला 'ज्योति विद्या मंदिर बनाम म्युनिसिपैलिटी' केस से जुड़ा है, जो निचली अदालत में करीब 30 साल से पेंडिंग है। केस काफी पुराना होने की वजह से कोर्ट तेज़ी से सुनवाई कर रही थी। केस निपटारे के करीब पहुंच गया है। आरोप है कि कमिश्नर दुर्गा शक्ति नागपाल इसी मामले के सिलसिले में सिविल जज पर दबाव डाल रही थीं।
सिविल जज की चिट्ठी में बताई गई घटनाओं का क्रम पढ़ें
पहली कॉल (15 जुलाई) दोपहर 1:26 बजे: भास्कर के मुताबिक, सिविल जज सबीना खान को उनके फोन पर एक अनजान नंबर से कॉल आया। उस समय, उनके 7 साल के बेटे ने कॉल उठाया। कॉल करने वाली महिला ने पूछा कि तुम्हारी मां कहाँंहैं? बच्चे ने बताया, "मां वॉशरूम में हैं।" इसके बाद, महिला ने बच्चे से उसका नाम, उम्र और परिवार से जुड़ी बातें पूछीं। जब बच्चे ने उसका नाम पूछा, तो उसने अपना नाम बताए बिना कॉल काट दिया।
दूसरी कॉल दोपहर 2:32 बजे: फिर करीब एक घंटे बाद एक और कॉल आया। जब जज को फोन आया और उन्होंने अपनी पहचान बताने को कहा तो महिला ने कहा, "मैं कमिश्नर देवीपाटना डिवीजन दुर्गा शक्ति नागपाल बोल रही हूं। आप कब तक छुट्टी पर रहेंगे?" जब जज ने छुट्टी के बारे में पूछने का कारण जानना चाहा, तो कमिश्नर ने कहा कि वह कोर्ट में चल रहे एक केस के बारे में बात करना चाहती हैं। जज ने तुरंत फोन काट दिया, क्योंकि उन्हें यकीन नहीं हुआ कि कोई कमिश्नर फ़ोन पर सीधे किसी केस के बारे में बात करेगा। क्योंकि सरकारी पक्ष के लिए पहले से ही सरकारी वकील नियुक्त होते हैं।
स्टेनो का फोन 3:21 PM बजे आया: जज को स्टेनो आशुतोष के नंबर से भी फोन आया। उसने बताया, "कमिश्नर मैडम का स्टेनो आपकी छुट्टी और आपके नंबर के बारे में जानकारी मांग रहा था।"
तीसरा फोन 3:32 PM: इसके बाद, कमिश्नर और सिविल जज के बीच एक और बातचीत हुई। शिकायत पत्र के अनुसार, कमिश्नर ने कहा. "अच्छा हुआ कि आपने बात कर ली, वरना मैं आपके बारे में हाई कोर्ट में शिकायत करने वाली थी। क्या आपको यह समझ नहीं है कि सीनियर IAS अफसर से कैसे बात करते हैं? मैंने अपनी 27 साल की सर्विस में ऐसा अफसर नहीं देखा। आपके व्यवहार से तो शक होता है कि आप जुडिशियल अफसर हैं भी या नहीं।"
सिविल जज ने पत्र में लिखा कि जब उन्होंने कमिश्नर को अपनी बात समझाने की कोशिश की, तो उन्होंने सुनने से इनकार कर दिया। कमिश्नर ने कहा. "आपने मुझे बोलने का मौका भी नहीं दिया। आप मेरे फोन कॉल नहीं उठा रही हैं। मुझे लगता है कि आपकी परवरिश कैसी है?"
इस पर सिविल जज शबीना खान ने जवाब दिया कि वह छुट्टी की अवधि या समय के बारे में जानकारी देने के लिए बाध्य नहीं हैं। न ही वह फ़ेक कॉल या अनजान नंबरों पर केस के बारे में चर्चा कर सकती हैं।उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का पक्ष रखने के लिए सरकारी वकील अदालत में मौजूद होते हैं। इसके बावजूद, कमिश्नर ने एक सीनियर IAS अधिकारी होने का हवाला देते हुए अपना गुस्सा जाहिर किया। उन्होंने अनुरोध किया कि निष्पक्ष न्याय के हित में, उनकी अदालत में लंबित केस को दूसरी अदालत में ट्रांसफर कर दिया जाए।