प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को News18 राइजिंग भारत शिखर सम्मेलन में बोलते हुए कहा कि भारत का आत्मविश्वास दुनिया भर के विकसित देशों के साथ व्यापार समझौते करने में एक प्रमुख फैक्टर रहा है। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत में कहा, "सामर्थ्य किसी देश में अचानक पैदा नहीं होता। सामर्थ्य पीढ़ियों में बनता है। वह ज्ञान से, परंपरा से, परिश्रम से और अनुभव से निखरता है।"
PM मोदी ने कहा कि लेकिन इतिहास के लंबे कालखंड में, गुलामी की इतनी शताब्दियों ने हमारे सामर्थ्यवान होने की भावना को हीनता से भर दिया था। दूसरे देशों से आयातित विचारधारा ने समाज में कूट-कूट कर यह भर दिया था कि हम अशिक्षित हैं और अनुगामी हैं।
उन्होंने आगे कहा, लेकिन इतिहास के लंबे कालखंड में, सदियों की गुलामी ने हमारी शक्ति की भावना को हीनता की भावना से भर दिया था।
दूसरे देशों से आयातित विचारधाराओं ने समाज में यह धारणा गहराई से बैठा दी थी कि हम अशिक्षित हैं और केवल फॉलोअर्स हैं।
दुर्भाग्य से आजादी के बाद भी भारत गुलामी की मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाया था। जिसका खामियाजा हम आज तक उठा रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण हम ट्रेड डील्स को लेकर हो रही चर्चा में देख रहे हैं।
कुछ लोग चौंक गए हैं कि यह क्या हो गया, कैसे हो गया। विकसित देश, भारत से ट्रेड डील करने में इतने उत्सुक क्यों हैं? इसका उत्तर है, हताशा और निराशा से बाहर निकल रहा आत्मविश्वासी भारत।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अगर देश आज भी 2014 से पहले वाली निराशा में होता, फ्रेजाइल फाइव में गिना जाता, पॉलिसी पैरालिसिस में होता तो कौन हमारे साथ ट्रेड डील करता। बीते 11 वर्षों में देश की चेतना में नई ऊर्जा का प्रवाह हुआ है। भारत अब अपने खोए हुए सामर्थ्य को वापस पाने का प्रयास कर रहा है।