India inks Pax Silica pact : भारत ने अमेरिका के साथ पैक्स सिलिका (PAX SILICA) में शामिल होने का करार किया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव ने 20 फरवरी को भारत में US एम्बेसडर सर्जियो गोर के साथ पैक्स सिलिका एग्रीमेंट पर औपचारिक हस्ताक्षर किया है। इस करार पर साइन करने से पहले,इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में अपने कीनोट एड्रेस में गोर ने कहा कि पैक्स सिलिका में भारत की एंट्री स्ट्रेटेजिक और ज़रूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में कॉम्पिटिटर को चैलेंज करने के लिए बेहतर टैलेंट है।
US के राजदूत ने यह भी कहा कि वॉशिंगटन भारत के साथ भरोसेमंद टेक्नोलॉजी शेयर करेगा। सर्जियो गोर ने कहा,"भारत क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग कैपेबिलिटी पर काम कर रहा है,हम इस पर भारत के साथ बातचीत कर रहे हैं। भारत के साथ भरोसेमंद टेक्नोलॉजी शेयर करेंगे।"
इस अवसर पर अश्विनी वैष्णव वैष्णव ने कहा कि भारत पैक्स सिलिका का हिस्सा बन गया है। इससे भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री को बहुत फायदा होगा। भारत में पहले से ही 10 प्लांट स्थापित हो चुके हैं और कई और स्थापित होने की प्रक्रिया में हैं। जल्द ही पहला सेमीकंडक्टर प्लांट कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू करेगा। देश में एक पूरा इकोसिस्टम उभर रहा है। पैक्स सिलिका इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और भारत के युवाओं को इससे लाभ मिलेगा।
US की अध्यक्षता में दिसंबर में पैक्स सिलिका की शुरूआत हुई थी। भारत समेत PAX SILICA के 12 सदस्य हैं। इसके सदस्यों का क्रिटिकल मिनरल, सेमीकंडक्टर, AI इंफ्रा की सप्लाई चेन बनाए रखने पर जोर है। पैक्स सिलिका का गठन चीन पर निर्भरता घटाने के लिए हुआ है। इस लक्ष्य रेयर अर्थ और सेमीकंडक्टर का सप्लाई को बेहतर करना है। इसके सदस्यो में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस, नीदरलैंड, इजराइल,जापान, कतर, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, UAE, UK और भारत शामिल हैं।
PAX SILICA की ग्लोबल जरूरत
EVs, डिफेंस, इलेट्रॉनिक्स की सप्लाई चेन सुधारने, अमेकिकी और पार्टनरों के बीच वैकल्पिक नेटवर्क बनाने, ऑयल के मुकाबले AI और सिलिकॉन बेस्ड इकोनॉमी पर जोर देने के लिए पैक्स सिलिका की ग्लोबल जरूरत है।
PAX SILICA से भारत को फायदा
पैक्स सिलिका से भारत को होने वाले फायदे की बात करें तो इससे रेयर अर्थ के लिए चीन पर निर्भरता घटेगी। भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स और चिप उत्पादन को पुश मिलेगा। जापान और नीदरलैंड जैसे देशों से भारत की पार्टनरशिप बढ़ेगी। घरेलू इंडस्ट्री को चिप और क्रिटिकल मिनरल के विकास के लिए सपोर्ट मिलेगा। देश में आत्मनिर्भर सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तैयार करने में मदद मिलेगी। बता दें कि भारत में सेमीकंडक्टर के 10 प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई है। देश में सेमीकंडक्टर पर 1.6 लाख करोड़ का निवेश किया जाएगा।