India-US Trade Deal: अमेरिका के साथ ट्रेड डील के बीच भारत सरकार ने रिफाइनरियों से मांगा रूसी तेल इंपोर्ट का वीकली डेटा, क्या कम होगा आयात?

India-US Trade Talks: भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध पिछले साल से तनावपूर्ण रहे है। रूस से भारी मात्रा में तेल खरीदने को लेकर ट्रंप प्रशासन ने भारतीय सामानों पर आयात शुल्क बढ़ाकर 50% कर दिया था

अपडेटेड Jan 03, 2026 पर 10:10 AM
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माना जा रहा है कि अमेरिका को खुश करने के लिए भारत रूस से तेल आयात को 10 लाख बैरल प्रति दिन से नीचे ला सकता है

India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका एक बीच बीते कई महीनों से ट्रेड डील को लेकर बातचीत जारी है। इसके तहत एक बड़ा अपडेट सामने आया है। सरकार ने देश की तेल रिफाइनरियों से रूस और अमेरिका से खरीदे जाने वाले कच्चे तेल का साप्ताहिक डेटा मांगा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम वाशिंगटन के साथ एक महत्वपूर्ण ट्रेड डील को अंतिम रूप देने की कवायद का हिस्सा है। माना जा रहा है कि अमेरिका को खुश करने के लिए भारत रूस से तेल आयात को 10 लाख बैरल प्रति दिन से नीचे ला सकता है। बता दें कि भारत के रूस से तेल खरीद को लेकर ट्रंप ने इंडिया पर 50% तक का टैरिफ लगा दिया था।

साप्ताहिक डेटा की मांग क्यों?

पेट्रोलियम मंत्रालय की सेल (PPAC) ने रिफाइनरियों से यह जानकारी मांगी है। इसके पीछे मुख्य कारण कूटनीतिक हैं। दरअसल सरकार चाहती है कि जब अमेरिका रूसी तेल पर सवाल उठाए, तो भारत के पास 'सेकेंडरी सोर्स' के बजाय खुद का वेरिफाइड और सटीक डेटा हो। सूत्रों के अनुसार, यह जानकारी सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा मांगी गई है ताकि व्यापार वार्ता के दौरान मजबूती से पक्ष रखा जा सके। आमतौर पर यह डेटा मासिक सीमा कस्टम रिपोर्ट से मिलता है, लेकिन यह पहली बार है जब सरकार साप्ताहिक आधार पर जानकारी जुटा रही है।


अमेरिका-भारत ट्रेड वॉर और टैरिफ का दबाव

भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध पिछले साल से तनावपूर्ण रहे है। रूस से भारी मात्रा में तेल खरीदनेको  लेकर ट्रंप प्रशासन ने भारतीय सामानों पर आयात शुल्क बढ़ाकर 50% कर दिया था। जुलाई में बातचीत तब विफल हो गई थी जब भारत ने अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए अपना बाजार खोलने से इनकार कर दिया था। इसके बाद अगस्त में टैरिफ और बढ़ा दिए गए। अक्टूबर में ट्रंप ने दावा किया था कि पीएम मोदी ने रूसी तेल खरीदना बंद करने का वादा किया है, हालांकि भारत सार्वजनिक रूप से कहता रहा है कि रूसी तेल उसकी 'ऊर्जा सुरक्षा' के लिए जरूरी है।

रूसी तेल आयात में भारी गिरावट

कड़े प्रतिबंधों और कूटनीतिक दबाव के कारण रूस से भारत आने वाले तेल की मात्रा पहले ही कम होने लगी है। दिसंबर 2025 में रूसी तेल का आयात 12 लाख बैरल प्रति दिन रहा, जो पिछले तीन साल का न्यूनतम स्तर है। यह जून के 20 लाख बैरल प्रति दिन के उच्चतम स्तर से लगभग 40% की गिरावट है। माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में इसे 10 लाख बैरल प्रति दिन से नीचे लाया जाएगा।

अमेरिकी तेल की बढ़ती हिस्सेदारी

रूस के विकल्प के रूप में भारत अब अमेरिका की ओर देख रहा है। 'केप्लर' के डेटा के अनुसार, 2025 में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी 6.6% थी, जबकि रूस की 35%। ट्रेड डील के हिस्से के रूप में भारत अमेरिकी कच्चे तेल और गैस की खरीद बढ़ाने पर विचार कर रहा है ताकि अमेरिका के साथ व्यापार घाटा कम किया जा सके।

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