India-Pakistan Clash: 7-10 मई, 2025 के बीच भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य संघर्ष को लेकर कूटनीतिक दावों की जंग तेज हो गई है। बीते दिनों चीन ने इस संघर्ष में 'मध्यस्थ' की भूमिका निभाने का दावा किया था। अब पाकिस्तान ने भी बीजिंग का समर्थन किया है। बता दें कि इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप कई बार दोनों देशों के बीच सीजफायर कराने को लेकर बयान दे चुके हैं। हालांकि, भारत ने हमेशा की तरह इस बार भी दोनों देशों के बीच हुए सीजफायर में किसी भी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप की बात को सिरे से खारिज कर दिया है।
'चीनी नेतृत्व लगातार संपर्क में था'
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने गुरुवार को प्रेस ब्रीफिंग में चीन के दावों पर मुहर लगाई। अंद्राबी ने कहा कि 6 से 10 मई के बीच चीनी नेता पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व के साथ 'लगातार संपर्क' में थे और उन्होंने भारतीय नेतृत्व से भी संपर्क किया था। पाकिस्तान के अनुसार, चीन की इन कोशिशों ने क्षेत्र में तनाव कम करने और शांति बहाल करने में 'पॉजिटिव' भूमिका निभाई।
चीन का दावा- 'हमने सुलझाए दुनिया के जटिल मुद्दे'
30 दिसंबर को चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने एक सेमिनार के दौरान 2025 की अपनी 'कामयाबियों' की सूची पेश की थी। वांग यी ने म्यांमार, ईरान और फिलिस्तीन-इजरायल विवाद के साथ-साथ 'भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव' को भी उन मुद्दों में गिनाया जहां चीन ने मध्यस्थता की। चीन का दावा है कि उसने केवल लक्षणों पर नहीं, बल्कि विवाद के 'मूल कारणों' को सुलझाने पर ध्यान केंद्रित किया।
'सेनाओं के बीच सीधी बातचीत से रुकी जंग': भारत का स्टैंड
भारत सरकार और विदेश मंत्रालय ने किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को नकारते हुए अपनी स्थिति साफ की है। नई दिल्ली का कहना है कि भारतीय सेना के भारी हमले से घबराकर पाकिस्तान के सैन्य संचालन महानिदेशक (DGMO) ने भारतीय DGMO को फोन किया था। 10 मई, 2025 से दोनों पक्ष जमीन, हवा और समुद्र में सभी सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमत हुए थे। भारत के लिए यह पूरी तरह से एक द्विपक्षीय समझौता था।
ट्रंप, चीन और पाकिस्तान का बदलता स्टैंड
इस पूरे मामले में एक दिलचस्प त्रिकोण बन गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी लगातार 'ऑपरेशन सिंदूर' को रुकवाने का श्रेय लेते रहे हैं। शुरुआत में पाकिस्तान केवल ट्रंप को श्रेय दे रहा था, लेकिन अब पहली बार उसने सार्वजनिक रूप से चीन की भूमिका को स्वीकार किया है। 7 मई को चीन ने भारत के हवाई हमलों पर 'खेद' जताया था, जबकि पाकिस्तान को सैन्य सहायता भी प्रदान की थी। अब वह खुद को एक 'शांतिदूत' के रूप में पेश कर रहा है।