India Oil Tanker Crosses Hormuz: अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण जंग के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर आई है। दुनिया के सबसे खतरनाक समुद्री रास्ते 'स्ट्रैट ऑफ होर्मुज' से भारत के लिए कच्चा तेल लेकर आ रहा एक विशाल ऑयल टैंकर सुरक्षित बाहर निकल गया है।
हैरान करने वाली बात यह है कि ईरान की खतरनाक सेना 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) ने खुद इस भारतीय टैंकर को रास्ता दिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका और ईरान के बीच पर्दे के पीछे एक बड़े शांति समझौते को लेकर कूटनीतिक बातचीत चल रही है।
विशाखापट्टनम आ रहा है 'निसोस केरोस', 3 जून को पहुंचेगा भारत
समुद्री जहाजों पर नजर रखने वाले ग्लोबल ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म्स के मुताबिक, भारत के लिए पेट्रोलियम उत्पाद लेकर आ रहा एक बड़ा जहाज तनाव वाले क्षेत्र से सुरक्षित आगे बढ़ चुका है।
मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला यह ऑयल टैंकर 'निसोस केरोस' (Nissos Keros) 21 मई को शारजाह से रवाना हुआ था। शुक्रवार, 29 मई की सुबह करीब 6 बजे इसे भारत के पश्चिमी तट के पास उत्तरी अरब सागर में ट्रैक किया गया है।
यह भारतीय टैंकर तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसके 3 जून को विशाखापट्टनम बंदरगाह पर पहुंचने की उम्मीद है।
ईरान की सेना IRGC ने खुद दी हरी झंडी
स्ट्रैट ऑफ होर्मुज एक ऐसा संकरा समुद्री रास्ता है, जहां से पूरी दुनिया के कुल तेल और गैस की सप्लाई का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। युद्ध के कारण इस रास्ते पर ईरान का कड़ा पहरा है।
ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी 'इरना' (IRNA) के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में ईरान की आईआरजीसी (IRGC) नौसेना ने 'निसोस केरोस' समेत कुल 23 कमर्शियल जहाजों और ऑयल टैंकर्स को इस रास्ते से गुजरने की इजाजत दी है। हालांकि, इसके लिए ईरानी नौसेना अधिकारियों के साथ एक 'आधिकारिक कूटनीतिक तालमेल' किया गया था, जिसके बाद भारत की लाइफलाइन कहे जाने वाले इस तेल को सुरक्षित रास्ता मिल सका।
अमेरिका-ईरान युद्ध पर बड़ा अपडेट
भारत के इस टैंकर का सुरक्षित निकलना इस बात का संकेत है कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म होने की उम्मीदें जाग गई हैं। बता दें कि इसी साल 29 फरवरी को वाशिंगटन द्वारा तेहरान पर किए गए हवाई हमलों के बाद दोनों देशों में युद्ध छिड़ गया था।
ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देशों के वार्ताकार युद्ध को रोकने के लिए एक बड़े शांति समझौते के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। सीजफायर को आगे बढ़ाने के लिए 60 दिनों के एक एमओयू (MoU) पर सहमति बन गई है।
ट्रंप की मंजूरी का इंतजार
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से जब इस पीस डील के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि फिलहाल यह 'TBD' यानी तय होना बाकी है। दोनों देश इस समझौते पर आगे बढ़ चुके हैं, लेकिन अब इस पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अंतिम मुहर और मंजूरी मिलना बाकी है।
भारत के लिए क्यों है बड़ी राहत?
इस युद्ध के कारण भारत में कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होने का बड़ा खतरा मंडरा रहा था। अगर होर्मुज जलडमरूमध्य बंद हो जाता, तो भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू सकती थीं। लेकिन ईरान द्वारा भारतीय टैंकर को सुरक्षित रास्ता देना और अमेरिका के साथ शांति समझौते की ओर बढ़ना, भारतीय अर्थव्यवस्था और घरेलू बाजार के लिए एक बूस्टर डोज की तरह है।