मिडिल ईस्ट से आ गई बड़ी खबर! अमेरिका और ईरान के बीच 'समझौते' का अंतिम ड्राफ्ट तैयार, अब रुक जाएगा महायुद्ध...

US Iran Tentative Deal: इसी बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया कि उसने ईरान के 5 खतरनाक अटैक ड्रोन्स को मार गिराया और बंदर अब्बास के पास ईरान के एक ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन को तबाह कर दिया। कुवैत में स्थित एक बड़े अमेरिकी सैन्य बेस को निशाना बनाकर दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल को कुवैती सेना ने हवा में ही मार गिराया

अपडेटेड May 29, 2026 पर 9:11 AM
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यह हलचल ऐसे समय पर हुई है जब दोनों देशों के बीच बैक-टू-बैक मिसाइल और ड्रोन हमले हो रहे हैं

US Iran Tentative Deal: मिडिल ईस्ट से इस वक्त एक बड़ी खबर आ रही है। लगातार जारी सैन्य झड़पों और तनाव के बीच अमेरिका और ईरान एक बड़े शांति समझौते के बेहद करीब पहुंच गए हैं। सीएनएन की एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों के बीच जारी सीजफायर को आगे बढ़ाने और दुनिया की लाइफलाइन कहे जाने वाले 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को दोबारा पूरी तरह खोलने के लिए एक अस्थायी समझौता हो गया है।

हालांकि, इस डील को जमीन पर उतरने के लिए अभी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के सर्वोच्च नेता की अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है। यह कूटनीतिक हलचल ऐसे समय पर हुई है जब दोनों देशों के बीच बैक-टू-बैक मिसाइल और ड्रोन हमले हो रहे हैं। आइए जानते हैं इस महा-समझौते की इनसाइड स्टोरी और बड़ी शर्तें।

क्या है इस सीक्रेट समझौते में?


सूत्रों के मुताबिक, दोनों देशों के शीर्ष कूटनीतिज्ञों ने समझौते का जो मसौदा तैयार किया है, उसमें मुख्य रूप से तीन बातें शामिल हैं:

सीजफायर 60 दिन और बढ़ेगा: रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस नए समझौते के तहत दोनों देशों के बीच जारी युद्धविराम को अगले 60 दिनों के लिए बढ़ा दिया जाएगा। इस दौरान बातचीत के जरिए विवादित मुद्दों को सुलझाया जाएगा।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: एएफपी के मुताबिक, ईरान अगले 30 दिनों के भीतर इस समुद्री रास्ते में बिछाई गई बारूदी माइंस को साफ करेगा। इसके बदले में अमेरिकी नौसेना इस इलाके की अपनी आर्थिक और सैन्य नाकेबंदी को पूरी तरह खत्म कर देगी। व्यापारिक जहाजों को बिना किसी टैक्स या परेशानी के आने-जाने की छूट होगी।

परमाणु कार्यक्रम पर सीधी बात: इस 60 दिनों के भीतर अमेरिका और ईरान के बीच तेहरान के परमाणु कार्यक्रम और वहां जमा किए गए अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम (Highly Enriched Uranium) के भंडार को लेकर भी निर्णायक बातचीत होगी.

अभी ट्रंप को मनाना बाकी!

इस पूरे शांति समझौते के रास्ते में सबसे बड़ी दीवार खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हैं।अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि ट्रंप अभी इस मौजूदा समझौते से पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं। वे तेहरान से ऐसा पुख्ता आश्वासन चाहते हैं जो 2015 के 'ओबामा कालीन परमाणु समझौते' से कहीं ज्यादा सख्त और मजबूत दिखे। आपको याद दिला दें कि ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में ओबामा की उसी डील को रद्दी का टुकड़ा बताकर अमेरिका को बाहर कर लिया था।

अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस ने पुष्टि की है कि बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है और दोनों पक्ष बहुत करीब हैं। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक ट्रंप की अंतिम मुहर नहीं लगती, तब तक इसे फाइनल न माना जाए।

ईरान की फूंक-फूंक कर कदम रखने की नीति

दूसरी तरफ, ईरान इस डील की खबरों को लेकर बेहद सतर्क और आक्रामक रुख अपनाए हुए है। ईरान की अर्ध-सरकारी न्यूज एजेंसी 'तस्नीम' ने साफ कहा है कि समझौते का ड्राफ्ट अभी फाइनल या पुख्ता नहीं हुआ है। ईरानी सूत्रों का कहना है कि जब तक तेहरान आधिकारिक रूप से इसका एलान नहीं करता, तब तक ट्रंप के किसी एकतरफा बयान को अंतिम नहीं माना जाएगा।

इस पूरी मध्यस्थता में पाकिस्तान मुख्य भूमिका निभा रहा है और शुक्रवार को पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार इस सिलसिले में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से वॉशिंगटन में मुलाकात भी करने वाले हैं।

समझौते के बीच भी हुआ ताजा सैन्य टकराव

दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ कूटनीतिक टेबल पर शांति की रूपरेखा तैयार हो रही है, तो दूसरी तरफ समुद्र और आसमान में गोलियां चल रही हैं:

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया कि उसने ईरान के 5 खतरनाक अटैक ड्रोन्स को मार गिराया और बंदर अब्बास के पास ईरान के एक ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन को तबाह कर दिया।

कुवैत में स्थित एक बड़े अमेरिकी सैन्य बेस को निशाना बनाकर दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल को कुवैती सेना ने हवा में ही मार गिराया। कुवैत ने इसे ईरान का 'आपराधिक हमला' बताया है। इसके तुरंत बाद ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि उन्होंने उसी अमेरिकी बेस को निशाना बनाया जहां से ईरान पर हमले हो रहे थे।

कुल मिलाकर फिलहाल खाड़ी देश बारूद के ढेर पर बैठे हैं। अगर ट्रंप और ईरान के सुप्रीम लीडर इस 60 दिनों की एक्सटेंशन डील को हरी झंडी दे देते हैं, तो दुनिया एक विनाशकारी युद्ध और भीषण तेल संकट से बच सकती है।

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