चीन का रुख बदला है। उसने बताया है कि वह भारत की तीन बड़ी जरूरतें पूरी करने जा रहा है। इनमें फर्टिलाइजर्स और रेयर अर्थ मैटेरियल्स की सप्लाई शामिल हैं। साथ ही वह इंडिया को टनल बोरिंग मशीन भी देगा। न्यूज एजेंसी एएनआई ने 19 अगस्त को अपनी खबर में यह बताया है। न्यूज एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने विदेशमंत्री एस जयशंकर से बातचीत में भारत को इन चीजों की सप्लाई का आश्वासन दिया। यी भारत के दौरे पर हैं।
इंडिया में तरक्की को मिलेगी रफ्तार
वांग यी (Wang Yi) के इस आश्वासन को भारत से रिश्ते सुधारने की चीन की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। ऐसा लगता है कि चीन की दिलचस्पी भारत के साथ आर्थिक सहयोग बढ़ाने और द्विपक्षीय रिश्तों में भरोसा पैदा करने में है। चीन ने जिन तीन चीजों की सप्लाई का आश्वासन दिया है, उनमें से सभी इंडिया के लिए काफी अहम है। टनल बोरिंग मशीन से इंडिया में इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कामों में तेजी आएगी। फर्टिलाइजर्स कृषि उत्पादन के लिहाज से अहम है। रेयर अर्थ मिनरल्स का इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स में होता है।
दोनों देश द्विपक्षीय रिश्तों को बेहतर बनाने को तैयार
2020 में गलवान में दोनों पक्षों की सेनाओं के बीच झड़प के बाद से भारत और चीन के रिश्ते काफी खराब हो गए थे। करीब 5 साल बाद रिश्तों पर जमी बर्फ पिघलती दिख रही है। 18 अगस्त को भारत और चीन ने द्विपक्षीय संबंधों को फिर से बेहतर बनाने को लेकर अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। एस जयशंकर और वांग यी के बीच दिल्ली में कई मसलों पर व्यापक बातचीत हुई। इनमें बॉर्डर मैनेजमेंट, ट्रेड, कल्चरल एक्सचेंजेज और क्षेत्रीय मसले शामिल थे।
इस महीने के अंत में पीएम मोदी का चीन जाने का कार्यक्रम
इस महीने के आखिर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चीन जाने का कार्यक्रम है। वह तियानजिन में शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन (SCO) समिट में हिस्सा लेंगे। वांग यी ने 18 अगस्त को यह माना कि 2020 में गलवान की घटना के बाद दोनों देशों के रिश्तों के लिए मुश्किल दौर आया था। लेकिन, उन्होंने कहा कि अब दोनों देशों को आगे बढ़ने की कोशिश करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सम्मान, संवेदनशीलता और हित को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ने की दरकार है।
सीमा पर तैनात सैनिकों की संख्या घटेगी
उन्होंने पूर्वी लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर तनाव कम करने की जरूरत पर भी जोर दिया। तनाव कम करने के प्रस्ताव पर सहमति बन जाने के बावजूद टकराव वाले बिंदुओं पर हजारों जवान तैनात हैं। जयशंकर ने बताया कि यी के साथ बातचीत में आर्थिक और व्यापारिक मसलों, रिवर डेटा शेयरिंग, बॉर्डर ट्रेड, धार्मिक यात्रा, कनेक्टिविटी और आम लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर चर्चा हुई।