India-EU Free Trade Deal: 'खट्टे अंगूर?'; भारत-ईयू फ्री ट्रेड डील पर कांग्रेस ने उठाए सवाल, पीयूष गोयल ने की तीखी आलोचना
India-EU Free Trade Deal: कांग्रेस ने दावा किया है कि भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते के तहत भारत ने सबसे बड़ी व्यापारिक ढील प्रदान की है। इसमें ईयू को लगभग सभी उत्पादों के निर्यात पर शुल्क में कटौती या राहत प्रदान की गई है
India-EU Free Trade Deal: कांग्रेस का दावा है कि EU के साथ FTA के तहत सबसे बड़ी व्यापार रियायतें दी गई है
India-EU Free Trade Deal: केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार (28 जनवरी) को कांग्रेस नेता जयराम रमेश की भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते की आलोचना का जवाब देते हुए तीखा हमला किया। गोयल ने पूछा कि क्या ये टिप्पणियां "खट्टे अंगूर" जैसी हैं। X पर एक विस्तृत पोस्ट में गोयल ने विपक्ष पर अतीत में संकल्प की कमी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अब वे एक ऐसे सौदे पर संदेह पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं जो उनके अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बड़े अवसर खोलेगा।
कांग्रेस ने क्या कहा?
कांग्रेस ने बुधवार को दावा किया कि भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते के तहत भारत ने सबसे बड़ी व्यापारिक ढील प्रदान की है। इसमें ईयू को लगभग सभी उत्पादों के निर्यात पर शुल्क में कटौती या राहत प्रदान की गई है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि भारत के व्यापार घाटे पर पड़ने वाले प्रभाव पर कड़ी निगरानी रखना जरूरी होगा।
भारत और ईयू ने मंगलवार को ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर किए, जिसे 'मदर ऑफ डील्स' बताया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी और यूरोपीय संघ के शीर्ष नेतृत्व ने व्यापार और रक्षा सहयोग के साथ आपसी संबंधों को मजबूत करने तथा नियम-आधारित विश्व व्यवस्था की दिशा में काम करने के लिए एक व्यापक एजेंडा पेश किया।
रमेश ने X पर पोस्ट किया, "भारत और 27 देशों वाले यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत पहली बार जून, 2007 में शुरू हुई थी। बातचीत के 16 दौर हुए, लेकिन कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति न बन पाने के कारण मई 2013 में इन्हें निलंबित कर दिया गया। इसके बाद जून 2022 तक एफटीए पर बातचीत स्थगित ही रही, जब इसे फिर से शुरू किया गया।"
उनका कहना था कि यह बहु-प्रचारित एफटीए अब तक किसी भी व्यापारिक साझेदार को भारत द्वारा दी गई सबसे बड़ी व्यापारिक ढील है, जिसके तहत ईयू से भारत को होने वाले 96 प्रतिशत से अधिक निर्यात पर टैरिफ में कटौती या राहत प्रदान की गई है।
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि इससे भारत के ईयू से आयात के दोगुना होने की उम्मीद की जा रही है। इसके परिणामस्वरूप भारत के व्यापार घाटे पर पड़ने वाले प्रभाव पर कड़ी निगरानी रखना जरूरी होगा।
उनके मुताबिक, "कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म’ से भारत के एल्युमीनियम और इस्पात निर्माताओं को छूट दिलाने में मोदी सरकार की नाकामी दिखी है जो एफटीए को लेकर कांग्रेस की मुख्य चिंताओं में से एक है।
रमेश ने कहा, "ईयू के सख्त स्वास्थ्य और उत्पाद सुरक्षा नियमों को लेकर भी चिंताएं हैं, जो एफटीए के बाद भी भारतीय निर्यात पर लागू रहेंगे। ये आसानी से टैरिफ़-रहित व्यापार अवरोध बन सकते हैं, और ईयू पर अन्य व्यापारिक साझेदारों द्वारा भी इस तरह के आरोप लगाए जाते रहे हैं। हमारे दवा क्षेत्र के लिए बौद्धिक संपदा के अधिकारों से जुड़े सवाल भी अब तक अनुत्तरित हैं।"
पीयूष गोयल का पलटवार
X पर एक विस्तृत पोस्ट में गोयल ने विपक्ष पर अतीत में संकल्प की कमी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अब वे एक ऐसे सौदे पर संदेह पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं जो उनके अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बड़े अवसर खोलेगा। क्या यह 'खट्टे अंगूर' वाली कहानी है?
गोयल ने कहा कि यह देखना दिलचस्प है कि जो लोग जमीनी स्तर पर लोगों से जुड़े न होने के कारण फैसले नहीं ले पाए, वे आज कुछ न करने को ही अपनी खूबी बता रहे हैं। हमारे लोगों ने इस खोए हुए मौके के लिए बहुत बड़ी कीमत चुकाई है। हमारे देश ने कीमती नौकरियां, इनकम और ग्रोथ खो दी है। लोगों ने इस निष्क्रियता के लिए कई बार सही सज़ा दी है।
उन्होंने कहा कि मुझे यह बात हैरान करती है कि जब पूरी दुनिया इसे "मदर ऑफ डील्स" कह रही है, तो मेरे दोस्त को लगता है कि यह बहुत ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया है। क्या $25 ट्रिलियन की कुल GDP, $11 ट्रिलियन का कुल ग्लोबल ट्रेड और 2 अरब लोगों का कॉमन मार्केट, भारत के $33 बिलियन के लेबर-इंटेंसिव एक्सपोर्ट्स का पहले ही दिन जीरो हो जाना, यह सब बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया है?
उन्होंने कहा कि यह भी दुर्भाग्यपूर्ण है कि मेरे दोस्त ने एक बुनियादी बात नजरअंदाज कर दी कि हम दोनों काफी हद तक एक-दूसरे के पूरक अर्थव्यवस्थाएं हैं। गोयल ने कहा कि यह जीरो-सम डील नहीं है। बल्कि एक विन-विन डील है जो हमारी आर्थिक ग्रोथ को बढ़ावा देगी। उन्होंने कहा कि हमारे बिजनेस और लोगों के लिए ढेर सारे मौके पैदा करेगी।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत सहित सभी देशों को स्वास्थ्य और सुरक्षा कारणों से नियम बनाने का अधिकार है। कोई भी इसे किसी ट्रेड एग्रीमेंट में नहीं छोड़ता। उन्हें इस तरह से अनुशासित किया जाता है कि वे ट्रेड में अनावश्यक और अनुचित बाधा न बनें। यह सुनिश्चित करने के तरीके एग्रीमेंट में पर्याप्त रूप से दिए गए हैं। IPR की बाध्यताएँ वैसी ही हैं जैसी हमारे पास WTO में TRIPS में हैं।
उन्होंने कहा कि वे सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए लचीलेपन पर जोर देते हैं। टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की जरूरत को पहचानते हैं। भारत के पारंपरिक डिजिटल ज्ञान लाइब्रेरी प्रोजेक्ट को मान्यता देते हैं। डेटा एक्सक्लूसिविटी पर हमारी पॉलिसी को सुरक्षित रखते हैं।
गोयल ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि मेरा दोस्त ऑटो सेक्टर और हम जो करने का इरादा रखते हैं, उसे समझने के लिए और समय देगा। हमारा कोटा आधारित, प्रीमियम सेगमेंट पर फोकस और चरणबद्ध ऑटो ऑफर (EIF से EVs के लिए 5 साल के टाइम गैप के साथ) 'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा देने के इरादे से है।
मंत्री ने कहा कि CKD इंपोर्ट को आसान बनाने से EU के OEMs को लोकल असेंबली लाइन लगाने के लिए बढ़ावा मिलेगा। यह एक शुरुआती कदम है, जो विदेशी OEMs को 'इंपोर्टिंग' से 'असेंबलिंग' और आखिरकार पूरी तरह से लोकलाइजेशन की ओर ले जाएगा, क्योंकि वे लोकल सप्लाई चेन बनाएंगे।