India-US Trade Surplus: ट्रेड डील के साथ ही भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों में एक नया और ऐतिहासिक अध्याय शुरू होने वाला है। SBI की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका द्वारा टैरिफ में की गई कटौती भारतीय निर्यातकों के लिए किसी 'लॉटरी' से कम नहीं है। अनुमान है कि भारत का अमेरिका के साथ ट्रेड सरप्लस सालाना $90 अरब को पार कर सकता है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी।
15 प्रमुख आइटम के एक्सपोर्ट से $97 अरब का जंप
SBI की रिपोर्ट एक बहुत ही दिलचस्प आंकड़े की ओर इशारा करती है। भारत से अमेरिका भेजे जाने वाले टॉप 15 उत्पादों में सालाना करीब $97 अरब के अतिरिक्त निर्यात की क्षमता है। अगर अन्य उत्पादों को भी जोड़ लिया जाए, तो यह आंकड़ा आसानी से $100 अरब के पार निकल जाएगा। गौर करने वाली बात यह है कि वित्तीय वर्ष 2025 में भारत का ट्रेड सरप्लस $40.9 अरब था, जो अब दोगुने से भी ज्यादा होने की कगार पर है। इस पूरे उछाल का भारत की GDP पर लगभग 1.1 प्रतिशत का सीधा पॉजिटिव असर पड़ सकता है।
अमेरिका के लिए भी भारत है 'अनलिमिटेड मार्केट'
व्यापार सिर्फ एक तरफा नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अमेरिकी सामानों के लिए भी बहुत बड़ा बाजार मौजूद है। वर्तमान में भारत के कुल आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी सिर्फ 7 प्रतिशत है, जबकि सेवाओं के मामले में यह 15 प्रतिशत है। इसका मतलब है कि अमेरिकी कंपनियों के पास भारत में विस्तार करने का जबरदस्त मौका है। भारत ने अमेरिकी औद्योगिक सामानों और कृषि उत्पादों पर टैरिफ कम करने या खत्म करने की सहमति दी है, जिससे अमेरिका से आयात में $55 अरब की बढ़ोतरी हो सकती है।
5 साल में $500 अरब की बड़ी खरीदारी
भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से $500 अरब के सामान खरीदने का लक्ष्य रखा है। कुछ क्षेत्रों में तो अमेरिका पहले से ही हावी है। जैसे भारत में आने वाले कुल बादामों में से 90 प्रतिशत अकेले अमेरिका से आते हैं। टैरिफ कम होने से भारत को इन आयातित वस्तुओं पर विदेशी मुद्रा भंडार में करीब $3 अरब की बचत होने का अनुमान है।
बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने का सुनहरा मौका
SBI की इस रिपोर्ट का निचोड़ यह है कि अमेरिका द्वारा टैरिफ कम करना भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार पर कब्जा जमाने का एक 'गोल्डन चांस' है। जहां एक ओर हमारे निर्यात में भारी उछाल आएगा, वहीं दूसरी ओर घरेलू खपत के लिए अमेरिकी सामान भी सस्ते होंगे। यह 'Win-Win' स्थिति भारत को वैश्विक व्यापार मंच पर एक नई मजबूती प्रदान करेगी।