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यूरिया के मामले में 100% आत्मनिर्भर बनेगा भारत! 8-9 नए प्लांट और 10 मिलियन टन कैपिसिटी का ये है पूरा प्लान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में नेशनल इन्वेस्टमेंट पॉलिसी फॉर यूरिया-2026 (NIPU-2026) को मंजूरी दे दी गई। इस नई नीति के तहत देश में 8 से 9 नए यूरिया प्लांट स्थापित करने का रास्ता साफ हो गया है।

Moneycontrol Hindi Newsअपडेटेड Jul 15, 2026 पर 5:06 PM
यूरिया के मामले में 100% आत्मनिर्भर बनेगा भारत! 8-9 नए प्लांट और 10 मिलियन टन कैपिसिटी का ये है पूरा प्लान
यूरिया के मामले में 100% आत्मनिर्भर बनेगा भारत!

भारत को खेती-किसानी और फर्टिलाइजर (उर्वरक) के क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने आज एक बड़ा फैसला लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में नेशनल इन्वेस्टमेंट पॉलिसी फॉर यूरिया-2026 (NIPU-2026) को मंजूरी दे दी गई है। इस नई नीति के तहत देश में 8 से 9 नए यूरिया प्लांट स्थापित करने का रास्ता साफ हो गया है। इससे भारत की आयातित (इंपोर्टेड) यूरिया पर निर्भरता पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। कैबिनेट बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस नई निवेश नीति से देश में सालाना लगभग 1 करोड़ मीट्रिक टन (10 मिलियन टन) नई यूरिया उत्पादन क्षमता जुड़ेगी।

यूरिया का मौजूदा गणित: मांग, उत्पादन और 25% का गैप

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने देश में यूरिया की जरूरत और उत्पादन के मौजूदा आंकड़ों को साझा करते हुए बताया कि नई नीति की जरूर क्यों पड़ी। अभी भारत में यूरिया की कुल मांग 40 मिलियन टन है। इसके मुकाबले घरेलू उत्पादन क्षमता लगभग 30 मिलियन टन (वर्तमान घरेलू उत्पादन क्षमता करीब 26.9 मिलियन टन) है। मांग और आपूर्ति के बीच इस 10 मिलियन टन के अंतर (सप्लाई गैप) को पूरा करने के लिए भारत को हर साल भारी मात्रा में यूरिया का आयात करना पड़ता है। यह गैप कुल मांग का लगभग 25 प्रतिशत है। देश में यूरिया की आवश्यकता में हर साल 5 प्रतिशत की दर से बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में यह नई नीति देश की संपूर्ण यूरिया आवश्यकता को स्थानीय स्तर पर पूरा करने में मदद करेगी।

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