Bangladesh Vs India: भारत ने ढाका में भारतीय हाई कमीशन को हाल ही में मिली धमकियों और बांग्लादेशी राजनीतिक नेताओं के भारत विरोधी भड़काऊ बयानों पर औपचारिक विरोध दर्ज कराने के लिए नई दिल्ली में बांग्लादेश के राजदूत रियाज हामिदुल्लाह को तलब किया है। भारत ने बांग्लादेश में बिगड़ते सुरक्षा माहौल को लेकर बांग्लादेशी हाई कमिश्नर के समक्ष अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है। भारत ने बांग्लादेश के उच्चायुक्त रियाज को ढाका में भारतीय उच्चायोग को मिली धमकी पर अपनी चिंता जताई।
हालांकि, धमकी के बारे में डिटेल्स नहीं बताया गया है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक बयान में कहा कि रियाज हामिदुल्लाह को बांग्लादेश में बिगड़ते सुरक्षा माहौल को लेकर भारत की गहरी चिंताओं के बारे में बताया गया। भारत ने अगस्त 2024 में व्यापक अशांति के बीच पहले ही अपने उच्चायोग से गैर-जरूरी कर्मचारियों और आश्रितों को निकाल लिया था। इस बीच, खबर है कि ढाका में भारतीय वीजा एप्लीकेशन सेंटर बुधवार दोपहर 2:00 बजे बंद हो जाएगा।
हामिदुल्लाह को तलब सोमवार को नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) के हसनात अब्दुल्ला द्वारा दी गई चेतावनी के एक दिन बाद किया गया है। उन्होंने कहा था कि ढाका भारत विरोधी ताकतों को पनाह दे सकता है। साथ ही कहा था कि भारत की सात बहनों अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड और त्रिपुरा को अलग करने में मदद कर सकता है। अब्दुल्ला ने ये टिप्पणियां ढाका के सेंट्रल शहीद मीनार में एक सभा को संबोधित करते हुए की।
बांग्लादेशी नेताओं का भड़काऊ बयान
हालांकि, उन्होंने सीधे तौर पर नई दिल्ली का नाम नहीं लिया। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इन टिप्पणियों को गैर-जिम्मेदाराना और खतरनाक बताया। सीएम ने कहा, "भारत एक बहुत बड़ा देश है। एक परमाणु शक्ति है। दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। बांग्लादेश इसके बारे में सोच भी कैसे सकता है?"
भारत लंबे समय से पूर्वोत्तर में सक्रिय आतंकवादी और अलगाववादी समूहों पर बांग्लादेश को एक सुरक्षित ठिकाने और लॉजिस्टिक्स बेस के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाता रहा है। खासकर 1990 के दशक के अंत और 2000 के दशक के दौरान असम और त्रिपुरा के कई विद्रोही संगठनों ने सीमा पार कैंप, सुरक्षित ठिकाने या सहायता नेटवर्क बनाए हुए थे।
पूर्वोत्तर से परे बांग्लादेश ने भारत से जुड़े इस्लामी चरमपंथी नेटवर्क को भी पनाह दी थी। हरकत-उल-जिहाद-अल-इस्लामी (HuJI) और बाद में जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) जैसे ग्रुप्स को भारतीय एजेंसियों ने उनकी सीमा पार मौजूदगी और पूर्वी भारत को प्रभावित करने वाले कट्टरपंथ और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को बढ़ावा देने के लिए चिह्नित किया था।