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India-US Deal: अमेरिका के साथ मिनी ट्रेड डील 9 जुलाई से पहले, लेकिन टैरिफ भारत की उम्मीद से ज्यादा होगा

India US Deal: इंडिया खासकर उन गुड्स पर टैरिफ में ज्यादा रियायत चाहता है, जिन्हें बनाने में लेबर का ज्यादा इस्तेमाल होता है। लेकिन, एक अमेरिकी कानून की वजह से इसकी संभावना न के बराबर है। इस वजह से इंडियन गुड्स पर अमेरिका का टैरिफ एमएफएन रेट्स से कम होने की संभावना ना के बराबर है

Edited By: Rakesh Ranjanअपडेटेड Jun 17, 2025 पर 10:03 AM
India-US Deal: अमेरिका के साथ मिनी ट्रेड डील 9 जुलाई से पहले, लेकिन टैरिफ भारत की उम्मीद से ज्यादा होगा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अप्रैल में पहले भारत सहित दूसरे देशों के गुड्स पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने का ऐलान किया। फिर, 90 दिनों के लिए रेसिप्रोकल टैरिफ टाल देने का फैसला किया।

भारत और अमेरिका के बीच 9 जुलाई से पहले मिनी ट्रेड डील हो जाने का उम्मीद है। लेकिन, भारत के लिए मोस्ट फेवर्ड नेशन (एमएफएन) रेट्स से कम टैरिफ की उम्मीद नहीं दिख रही है। इसकी बड़ी वजह अमेरिका का कानून है। इस मसले से जुड़े सूत्रों ने मनीकंट्रोल को यह बताया। इंडिया चाहता है कि अमरिका भारतीय उत्पादों पर एमएफएन से कम टैरिफ लगाने को तैयार हो जाए। लेकिन, एक अमेरिकी कानून की वजह से यह मुमकिन नहीं लग रहा है।

इंडिया MFN रेट्स से कम टैरिफ चाहता है

सबसे पहले यह जान लेना जरूरी है कि Most Favoured Nation (MFN) रेट्स का मतलब क्या है। एमएफएन World Trade Organisation (WTO) के तहत एक व्यवस्था है, जिसमें डब्ल्यूटीओ के सदस्य देश दूसरे देश के गुड्स पर एक जैसा टैरिफ और व्यापार की दूसरी शर्तें लागू करते हैं। इंडिया चाहता है कि अमेरिका इंडियन प्रोडक्ट्स पर एमएफएन रेट्स से कम टैरिफ लगाए। लेकिन, एक अमेरिकी कानून की वजह से इसकी संभावना न के बराबर है। इस वजह से इंडियन गुड्स पर अमेरिका का टैरिफ एमएफएन रेट्स के बराबर हो सकता है।

MFN से कम टैरिफ में अमेरिकी कानून बड़ी बाधा

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